शुक्रवार, 9 जून 2017

आत्मा नए शरीर में कैसे जाता है?

(श्री गरुड़ पुराण)

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"ओम् नमो भगवते वासुदेवायः"

गरुड़ ने भगवान श्री विष्णु से प्रश्न किया

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मृत्यु के बाद आत्मा कैसे शरीर के बाहर जाता है? कौन प्रेत का शरीर प्राप्त करता है? क्या भगवान के भक्त प्रेत योनि में प्रवेश करते हैं?

भगवान विष्णु ने गरुड़ को उत्तर दिया(गरुड़ पुराण)

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मृत्यु के बाद आत्मा निम्न मार्गों से शरीर के बाहर जाता है

आँख, नाक या त्वचा पर स्थिर रंध्रों से

(i) ज्ञानियों का आत्मा मस्तिस्क के उपरी सिरे से बाहर जाता है

(ii) पापियों का आत्मा उसके गुदा द्वार से बाहर जाता है( ऐसा पाया गया है कि कई लोग मृत्यु के समय मल त्याग करते हैं)

यह आत्मा को शरीर से बाहर निकलने के मार्ग हैं |

शरीर को त्यागने के बाद सूक्ष्म शरीर घर के अंदर कई दिनों तक रहता है

१.अग्नि में ३ तीन दिनों तक

२. घर में स्थित जल में ३ दिनों तक

जब मृत व्यक्ति का पुत्र १० दिनों तक मृत व्यक्ति के लिए उचित वेदिक अनुष्ठान करता है तब मृत व्यक्ति की आत्मा को दसवे दिन एक अल्पकालिक शरीर दिया जाता है जो अंगूठे के आकार का होता है| इस अल्पकालिक शरीर के रूप में वह आत्मा दसवे दिन यम लोक के लिए प्रस्थान करता है | तीन दिनों बाद अर्थात तेरहवे दिन वह यमलोक पहुंचता है|

यमलोक में चित्रगुप्त जीव के सभी कर्मो का लेखा यमराज को प्रस्तुत करते हैं| उसके आधार पर यमराज जीव के लिए स्वर्ग लोक या नरक लोक जाता तय करते हैं| जीव अपने कर्मो के अनुसार स्वर्ग या नरक लोक में रहता है और फिर उसके बाद वह पृथ्वी पर पुनः एक नए शरीर के रूप में जन्म लेता है|

प्रेत योनि में कौन जन्म लेता है?

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कुछ मनुष्य जो कुछ विशेष प्रकार का कर्म करते हैं वे यमराज द्वारा वापस पृथ्वी पर प्रेत योनि में भेजे जाते हैं जिसमे वे एक निश्चित समय तक रहते हैं |

निम्न प्रकार के कर्म करने वाले लोग प्रेत योनि प्राप्त करते हैं

(i) विवाह के बाहर किसी से शारीरिक सम्बन्ध बनाना

(ii) धोखाधडी या किसी की संपत्ति हड़प करना

(iii) आत्म हत्या करना

(iv) अकाल मृत्यु: जैसे किसी जानवर द्वारा या किसी दुर्घटना में मारा जाना आदि (अकाल मृत्यु स्वयं मनुष्य के कुछ विशेष कर्मो के कारण प्राप्त होते हैं)

व्याख्या

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प्रेत योनि प्राप्त करने के पीछे के कारण की व्याख्या इस प्रकार की जा सकती है|

जब कोई जीव मनुष्य शरीर धारण करता है तो उसके कर्मो आदि के अनुसार उसका एक समय तक पृथ्वी पर रहना अपेक्षित होता है| यमराज जब मनुष्य के सभी कर्मो की समीक्षा करते हैं और उसमे यह पाते हैं कि जीव उस अपेक्षित समय से पहले ही मृत्यु को प्राप्त हो गया तब उस जीव को बाकि समय के लिए प्रेत योनि में व्यतीत करना पडता है| मान लें कि किसी मनुष्य का जीवन ८० वर्षों का बनता था, लेकिन उसने ७०वे साल में आत्म हत्या कर ली, वैसी स्थिति में उसे १० सालों तक प्रेत योनि में व्यतीत करना पड़ेगा|

प्रेत योनि एक सूक्ष्म शरीर होता है| प्रेत योनि में निवास करते समय मनुष्य की सभी इक्षाएं वैसी ही होती है जैसा उसका मनुष्य शरीर में था | यहाँ तक की भोजन आदि की इक्षाए भी वही होती है| प्रेत योनि में वह सभी कुछ करना चाहता है लेकिन कर नहीं पाता क्योंकि उसके पास भौतिक शरीर नहीं होता| इसलिए अगर मनुष्य के रूप में उसकी कई इक्षाएं अपूर्ण रह गई हों तो प्रेत योनि में उस मनुष्य को अपनी इक्षाएं पूरी नहीं होने की पीड़ा झेलनी पड़ती है| जब प्रेत योनि में उसका समय समाप्त हो जाता है जितना कि मनुष्य के रूप में उसे पृथ्वी पर रहना था तब उस आत्मा को नया शरीर प्राप्त होता है|

इसलिए मनुष्यों को कभी आत्म हत्या जैसा कर्म नहीं करना चाहिए|

यह तो आत्म हत्या के सन्दर्भ में था| लेकिन कुछ दूसरे पाप करने वाले भी प्रेत योनि में जाते हैं| उनका प्रेत योनि में रहने का समय उनके पाप के अनुसार होता है,जो ज्यादा पाप करते हैं वह लंबे समय तक प्रेत योनि में रहते हैं जहाँ वे अपनी इक्षाओं को पूरा करने के लिए तडपते हैं|

भगवान के भक्तो का क्या होता है?

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भगवान के भक्तों को मृत्यु के बाद किसी प्रकार की यातना नहीं झेलनी पड़ती| भगवान के भक्त को यमराज के दूत नहीं बल्कि भगवान के अपने दूत लेने आते हैं| भगवान के दूत उस जीवात्मा की घर के बाहर प्रतीक्षा करते हैं और बहुत आदर के साथ भगवान के धाम लेकर जाते हैं| जहाँ वह जन्म और बंधनों से मुक्त अलौकिक जीवन जीता है|

भगवान ने श्रीमद भगवद गीता में यह वचन दिया है

न में भक्त प्रणश्यति

मेरे भक्त का कभी पतन नहीं होता|

मस्त जोक है....।। एक बार एक किसान का घोडा बीमार हो गया। उसने उसके इलाज के लिए डॉक्टर को बुलाया डॉक्टर ने घोड़े का अच्छे से मुआयना किया और बोला... "आपके घोड़े को काफी गंभीर बीमारी है। हम तीन दिन तक इसे दवाई देकर देखते हैं, अगर यह ठीक हो गया तो ठीक नहीं तो हमें इसे मारना होगा। क्योंकि यह बीमारी दूसरे जानवरों में भी फ़ैल सकती है।" यह सब बातें पास में खड़ा एक *बकरा* भी सुन रहा था। *अगले दिन* डॉक्टर आया, उसने घोड़े को दवाई दी चला गया। उसके जाने के बाद बकरा घोड़े केपास गया और बोला, "उठो दोस्त, हिम्मत करो, नहीं तो यह तुम्हें मार देंगे।" *दूसरे दिन*डॉक्टर फिर आया और दवाई देकर चला गया। बकरा फिर घोड़े के पास आया और बोला,"दोस्त तुम्हें उठना ही होगा। हिम्मत करो नहीं तो तुम मारे जाओगे। मैं तुम्हारी मदद करता हूँ। चलो उठो" *तीसरे दिन* जब डॉक्टर आया तो किसान से बोला, "मुझे अफ़सोस है कि हमें इसे मारना पड़ेगा क्योंकि कोई भी सुधार नज़र नहीं आ रहा।" जब वो वहाँ से गए तो बकरा घोड़े के पास फिर आया और बोला, "देखो दोस्त,तुम्हारे लिए अब *करो या मरो* वाली स्थिति बन गयी है। अगर तुम आज भी नहीं उठे तो कल तुम मर जाओगे। इसलिए हिम्मत करो। हाँ, बहुत अच्छे। थोड़ा सा और, तुम कर सकते हो। शाबाश, अब भाग कर देखो, तेज़ और तेज़।" इतने में किसान वापस आया तो उसने देखा कि उसका घोडाभाग रहा है। वो ख़ुशी से झूम उठा और सब घर वालों को इकट्ठा कर के चिल्लाने लगा, *"चमत्कार हो गया,* *मेरा घोडा ठीक हो गया।* *हमें जश्न मनाना चाहिए..* आज बकरे की बिरयानी खायेंगे।" *शिक्षा , ----------> *Management* या *government* को *कभी नही पता होता कि* *कौन employee* *काम कर रहा है।* *जो काम कर रहा होता है उसी का ही काम तमाम हो जाता है।* ..

गुरुवार, 8 जून 2017

👌 *धन की परिभाषा* 👌

👌जब कोई बेटा या बेटी ये कहे कि मेरे माँ बाप ही मेरे भगवान् है….
*ये है “धन”*👍

👌जब कोई माँ बाप अपने बच्चों के लिए ये कहे कि ये हमारे कलेजे की कोर हैं….
*ये है “धन”* 👍

👌शादी के 20 साल बाद भी अगर पति पत्नी एक दूसरे से कहें ।
I Love you…
*ये है “धन”* 👍

👌कोई सास अपनी बहु के लिए कहे कि ये मेरी बहु नहीं बेटी है और कोई बहु अपनी सास के लिए कहे कि ये मेरी सास नहीं मेरी माँ है……
*ये है “धन”*👍

👌जिस घर में बड़ो को मान और छोटो को प्यार भरी नज़रो से देखा जाता है……
*ये है “धन”* 👍

👌जब कोई अतिथि कुछ दिन आपके घर रहने के पशचात् जाते समय दिल से कहे  की आपका घर …घर नहीं मंदिर है….
*ये है “धन”*👍

ऐसी दुआ हैं मेरी कि आपको ऐसे
*”परम धन”* की प्राप्ति हो।
         😄”खुश रहिये ……..
         सदा मुस्कराते रहो 
     आपका हर लम्हा मंगलदायक हो

🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹

शुक्रवार, 2 जून 2017

एक कथा लक्ष्मण जी की !! एक अनजाने सत्य से परिचय--- हनुमानजी की रामभक्ति की गाथा संसार में भर में गाई जाती है। लक्ष्मणजी की भक्ति भी अद्भुत थी. लक्ष्मणजी की कथा के बिना श्री रामकथा पूर्ण नहीं है । अगस्त्य मुनि अयोध्या आए और लंका युद्ध का प्रसंग छिड़ गया --- भगवान श्रीराम ने बताया कि उन्होंने कैसे रावण और कुंभकर्ण जैसे प्रचंड वीरों का वध किया और लक्ष्मण ने भी इंद्रजीत और अतिकाय जैसे शक्तिशाली असुरों को मारा । अगस्त्य मुनि बोले--- श्रीराम, बेशक रावण और कुंभकर्ण प्रचंड वीर थे, लेकिन सबसे बड़ा वीर तो मेघनाध ही था । उसने अंतरिक्ष में स्थित होकर इंद्र से युद्ध किया था और बांधकर लंका ले आया था । ब्रह्मा ने इंद्रजीत से दान के रूप में इंद्र को मांगा तब इंद्र मुक्त हुए थे । और लक्ष्मण ने उसका वध किया इसलिए वे सबसे बड़े योद्धा हुए । श्रीराम को आश्चर्य हुआ लेकिन भाई की वीरता की प्रशंसा से वह खुश थे, फिर भी उनके मन में जिज्ञासा पैदा हुई कि आखिर अगस्त्य मुनि ऐसा क्यों कह रहे हैं कि इंद्रजीत का वध रावण से ज्यादा मुश्किल था । अगस्त्य मुनि ने कहा--- प्रभु, इंद्रजीत को वरदान था कि उसका वध वही कर सकता था जो चौदह वर्षों तक न सोया हो, जिसने चौदह साल तक किसी स्त्री का मुख न देखा हो और चौदह साल तक भोजन न किया हो । श्रीराम बोले--- परंतु मैं बनवास काल में चौदह वर्षों तक नियमित रूप से लक्ष्मण के हिस्से का फल-फूल देता रहा । मैं सीता के साथ एक कुटी में रहता था, बगल की कुटी में लक्ष्मण थे, फिर सीता का मुख भी न देखा हो, और चौदह वर्षों तक सोए न हों, ऐसा कैसे संभव है । अगस्त्य मुनि सारी बात समझकर मुस्कुराए... प्रभु से कुछ छुपा है भला ! दरअसल, सभी लोग सिर्फ श्रीराम का गुणगान करते थे लेकिन प्रभु चाहते थे कि लक्ष्मण के तप और वीरता की चर्चा भी अयोध्या के घर-घर में हो । अगस्त्य मुनि ने कहा --- क्यों न लक्ष्मणजी से पूछा जाए ? लक्ष्मणजी आए , प्रभु ने कहा कि आपसे जो पूछा जाए उसे सच सच कहिएगा । प्रभु ने पूछा--- हम तीनों चौदह वर्षों तक साथ रहे फिर तुमने सीता का मुख कैसे नहीं देखा ? फल दिए गए फिर भी अनाहारी कैसे रहे ? और 14 साल तक सोए नहीं ? यह कैसे हुआ ? लक्ष्मणजी ने बताया--- भैया, जब हम भाभी को तलाशते ऋष्यमूक पर्वत गए तो सुग्रीव ने हमें उनके आभूषण दिखाकर पहचानने को कहा ॥ आपको स्मरण होगा मैं तो सिवाए उनके पैरों के नुपूर के कोई आभूषण नहीं पहचान पाया था क्योंकि मैंने कभी भी उनके चरणों के ऊपर देखा ही नहीं । चौदह वर्ष नहीं सोने के बारे में सुनिए - आप औऱ माता एक कुटिया में सोते थे. मैं रातभर बाहर धनुष पर बाण चढ़ाए पहरेदारी में खड़ा रहता था. निद्रा ने मेरी आंखों पर कब्जा करने की कोशिश की तो मैंने निद्रा को अपने बाणों से बेध दिया था । निद्रा ने हारकर स्वीकार किया कि वह चौदह साल तक मुझे स्पर्श नहीं करेगी लेकिन जब श्रीराम का अयोध्या में राज्याभिषेक हो रहा होगा और मैं उनके पीछे सेवक की तरह छत्र लिए खड़ा रहूंगा तब वह मुझे घेरेगी । आपको याद होगा, राज्याभिषेक के समय मेरे हाथ से छत्र गिर गया था । अब मैं 14 साल तक अनाहारी कैसे रहा ? मैं जो फल-फूल लाता था आप उसके तीन भाग करते थे. एक भाग देकर आप मुझसे कहते थे लक्ष्मण फल रख लो॥ आपने कभी फल खाने को नहीं कहा- फिर बिना आपकी आज्ञा के मैं उसे खाता कैसे? मैंने उन्हें संभाल कर रख दिया सभी फल उसी कुटिया में अभी भी रखे होंगे । प्रभु के आदेश पर लक्ष्मणजी चित्रकूट की कुटिया में से वे सारे फलों की टोकरी लेकर आए और दरबार में रख दिया फलों की गिनती हुई, सात दिन के हिस्से के फल नहीं थे । प्रभु ने कहा--- इसका अर्थ है कि तुमने सात दिन तो आहार लिया था ? लक्ष्मणजी ने सात फल कम होने के बारे बताया- उन सात दिनों में फल आए ही नहीं, 1. जिस दिन हमें पिताश्री के स्वर्गवासी होने की सूचना मिली, हम निराहारी रहे । 2. जिस दिन रावण ने माता का हरण किया उस दिन फल लाने कौन जाता । 3. जिस दिन समुद्र की साधना कर आप उससे राह मांग रहे थे, 4. जिस दिन आप इंद्रजीत के नागपाश में बंधकर दिनभर अचेत रहे, 5. जिस दिन इंद्रजीत ने मायावी सीता को काटा था और हम शोक में रहे, 6. जिस दिन रावण ने मुझे शक्ति मारी , 7. और जिस दिन आपने रावण-वध किया , इन दिनों में हमें भोजन की सुध कहां थी ! विश्वामित्र मुनि से मैंने एक अतिरिक्त विद्या का ज्ञान लिया था- बिना आहार किए जीने की विद्या. उसके प्रयोग से मैं चौदह साल तक अपनी भूख को नियंत्रित कर सका जिससे इंद्रजीत मारा गया । भगवान श्रीराम ने लक्ष्मणजी की तपस्या के बारे में सुनकर उन्हें ह्रदय से लगा लिया । जय रामजी की ।

पूजा के समय - पत्नी ने पति से पूछा :- सुनो जी आपको आरती याद है न? . पति :- हाँ ... वो पतली सी, काली आँखों वाली सुन्दर सी, 402 में रहती है, वही न? 😜😜 . फिर पहले पति की "पूजा" हुई । सत्यनारायण भगवान बाद में पूजे गए! 😂 *मंदिर में* संता: हे भगवान..मेरी सरकारी नौकरी लगवा दो🙏🏼 भगवान : नारियल, केला और सेब नही लाए?? संता: भगवान..आप कर्म करो, फल की चिंता मत करे..!!😬😝😂 किसी ने बड़े प्यार से शादिशुदा आदमी से पूछा~ रात को ऑनलाइन कब आते हो....? दर्द की दीवारें हिल गयी जब उसनें कहा:- '" बर्तन धोने के बाद"" 😂😂😂😂 : आज का मजाकिया ज्ञान 😜 शराबी और साँप जितने मर्जी टेढे़ मेढ़े चलें, अपने घर में वो सीधे ही घुसते हैं। 😆😆😆😆😆😆😆😆 : लड़के ने लड़की का हाथ पकड़कर कहा – “यू आर सो हॉट, बेबी !” 😂 😂 . लड़की ने खींचकर उसे एक थप्पड़ मारा और कहा – “हरामजादे….. . . मुझे 103 डिग्री बुखार है और तुझे आशिकी सूझ रही है … ? 😜 😜 😂 😂 ‬: 😜 ';';शादी क्या है';'; 😱 बिजली के दो तार सही जुड़े तो प्रकाश ही प्रकाश गलत जुड़े तो धमाके ही धमाके 😂😂😂😝😜 😜 बिजली विभाग।। "एक औरत तेज चल रही ट्रेन मे दौड लगाकर चढी तो सभी लोगों ने कहा : . ""कमाल की औरत है, कमाल की औरत है..!"" . तो उस औरत ने कहा : ""कमाल तो मेरा देवर है,.. मै तो जमाल की औरत हूँ ।।।"" 😜😜😜😜😜😜😜"

Hello friends "शादी विवाह में अगर हम किसी को आर्थिक मदद के लिए लिफाफा देते हैं तो बीमार को देखने जाते समय क्यों नहीँ देते जबकि बीमारी में मदद की आवश्यकता अधिक होती है! कृपया चिन्तन अवश्य करें,....शादी में तो गैर जरूरी दिखावे के खर्च बचाये जा सकते है पर बीमारी में जरूरी दवाइयाँ और इलाज तो जरूरी है नया विचार नई उपज

दिल ❤ लगाने से अच्छा है पौधे 🌴 लगाएं। ये घाव नहीं ... छाँव देंगे ..🚶 🙏🏽🙏🏽🙏🏽🙏🏽