सोमवार, 6 नवंबर 2017

God code

: *पाँच तत्व का कोड है भगवान*   
       *जिससे यह ब्रह्माण्ड बना*
        
          *भ + ग + व + आ + न*

    *भूमि (धरती), गगन (आकाश),*
       *वायु (हवा), अग्नि (आग),*
                  *नीर (पानी)*

          *क्या अब भी कोई है*
      *जिसने भगवान को देखा*
          *अथवा जाना नही..?*

*अब अपने अन्दर झांक कर देखिये*
       *भगवान नज़र भी आएंगे*
         *और महसूस भी होंगे*

        *🙏🌹हरि ॐ🌹🙏*
*🙏🌹आपका दिन शुभ हो🌹🙏*

History

बॉलीवुड में भांड भरे है, नीयत सबकी काली है...
इतिहासों को बदल रहे, संजय लीला भंसाली है...

चालीस युद्ध जितने वाले को ना वीर बताया था...
संजय तुमने बाजीराव को बस आशिक़ दर्शाया था...

सहनशीलता की संजय हर बात पुरानी छोड़ चुके...
क्षात्र धर्म की खातिर हम कितनी मस्तानी छोड़ चुके...

अपराध जघन्य है तेरा, दोषी बॉलीवुड सारा है...
इसलिए राजपूतो ने सेट पर जाकर मारा है...

संजय तुमको मर्द मानता, जो अजमेर भी जाते तुम...
दरगाह वाले हाजी का भी नरसंहार दिखाते तुम...

सच्चा कलमकार हूँ संजय, दर्पण तुम्हे दिखाता हूँ...
जौहर पदमा रानी का, तुमको आज बताता हूँ...

सुन्दर रूप देख रानी का बैर लिया था खिलजी ने...
चित्तौड़ दुर्ग का कोना कोना घेर लिया था खिलजी ने...

माँस नोचते गिद्धों से, लड़ते वो शाकाहारी थे...
मुट्ठी भर थे राजपूत, लेकिन मुगलो पर भारी थे...

राजपूतों की देख वीरता, खिलजी उसदिन काँप गया...
लड़कर जीत नहीं सकता वो, ये सच्चाई भांप गया...

राजा रतन सिंह से बोला, राजा इतना काम करो...
हिंसा में नुकसान सभी का अभी युद्ध विराम करो...

पैगाम हमारा जाकर रानी पद्मावती को बतला दो...
चेहरा विश्व सुंदरी का बस दर्पण में ही दिखला दो...

राजा ने रानी से बोला रानी मान गयी थी जी...
चित्तौड़ नहीं ढहने दूंगी ये रानी ठान गयी थी जी...

अगले दिन चित्तौड़ में खिलजी सेनापति के संग आया...
समकक्ष रूप चंद्रमा सा पद्मावती ने दिखलाया...

रूप देखकर रानी का खिलजी घायल सा लगता था...
दुष्ट दरिंदा पापी वो पागल पागल सा लगता था...

रतन सिंह थे भोले राजा उस खिलजी से   छले गए...
कैद किया खिलजी ने उनको जेलखाने में चले गए...

खिलजी ने सन्देश दिया चित्तौड़ की शान बक्श दूंगा...
मेरी रानी बन जाओ, राजा की जान बक्श दूंगा...

रानी ने सन्देश लिखा, मैं तन मन अर्पण करती हूँ...
संग में नौ सौ दासी है और स्वयं समर्पण करती हूँ...

सभी पालकी में रानी ने बस सेना ही बिठाई थी...
सारी पालकी उस दुर्गा ने खिलजी को भिजवाई थी...

सेना भेजकर रानी ने जय क्षात्र बोल  दिया...
अग्नि कुंड तैयार किया था और साका भी खोल दिया...

मिली सुचना सारे सैनिक, मौत के घाट उतार दिए...
और दुष्ट खिलजी ने राजा रतन सिंह भी मार दिए...

मानो अग्नि कुंड की अग्नि उस दिन पानी पानी थी...
सोलह हजार नारियो के संग जलती पदमा रानी थी...

सच्चाई को दिखलाओ, हम सभी सत्य स्वीकारेंगे

     स्वाभिमान व बलिदान को बदनाम किया तो
                रण में उतरने वाले है
🙏आप सभी हिंदुओ और ठाकुरों से अनुरोध है कि यह कविता हर सिंह और सिंहणी के पास पहुंचा दो✊

Women

मैं एक नारी हूँ,मैं सब संभाल लेती हूँ
हर मुश्किल से खुद को उबार लेती हूँ

नहीं मिलता वक्त घर गृहस्थी में
फिर भी अपने लिए वक्त निकाल लेती हूँ

टूटी होती हूँ अन्दर से कई बार मैं
पर सबकी खुशी के लिए मुस्कुरा लेती हूँ

गलत ना होके भी ठहराई जाती हूँ गलत
घर की शांति के लिए मैं चुप्पी साध लेती हूँ

सच्चाई के लिए लड़ती हूँ सदा मैं
अपनों को जिताने के लिए हार मान लेती हूँ

व्यस्त हैं सब प्यार का इजहार नहीं करते
पर मैं फिर भी सबके दिल की बात जान लेती हूँ

कहीं नजर ना लग जाये मेरी अपनी ही
इसलिए पति बच्चों की नजर उतार लेती हूँ

उठती नहीं जिम्मेदारियाँ मुझसे कभी कभी
पर फिर भी बिन उफ किये सब संभाल लेती हूँ

बहुत थक जाती हूँ कभी कभी
पति के कंधें पर सर रख थकन उतार लेती हूँ

नहीं सहा जाता जब दर्द,औंर खुशियाँ
तब अपनी भावनाओं को कागज पर उतार लेती हूँ

कभी कभी खाली लगता हैं भीतर कुछ
तब घर के हर कोने में खुद को तलाश लेती हूँ

खुश हूँ मैं कि मैं किसी को कुछ दे सकती हूँ
जीवनसाथी के संग संग चल सपने संवार लेती हूँ

हाँ मैं एक नारी हूँ,मैं सब संभाल लेती हूँ
अपनों की खुशियों के लिए अपना सबकुछ वार देती हूँ।( For all lovely ladies💐)

I love my wife

    *हर पति-देव इसे ध्यान से पढ़ें ~*

  😤  एक युवक बगीचे में  😤
        बहुत गुस्से में बैठा था !
      पास ही एक बुजुर्ग बैठे थे !
उन्होने उस परेशान युवक से पूछा :-
           *क्या हुआ बेटा ...*
           *क्यूं इतना परेशान हो ?*

युवक ने गुस्से में अपनी पत्नी की
गल्तियों के बारे में बताया !
बुजुर्ग ने मंद-मंद मुस्कराते हुए ...
युवक से पूछा :-

😇 बेटा क्या तुम बता सकते हो ~
       *तुम्हारा धोबी कौन है ?*
🚶🏻 युवक ने हैरानी से पूछा :-
        क्या मतलब ?
🍯 बुजुर्ग ने कहा :-
      *तुम्हारे मैले कपड़े कौन धोता है ?*
🚶🏻 युवक बोला 👉 *मेरी पत्नी*

😇 बुजुर्ग ने पूछा :-
      *तुम्हारा बावर्ची कौन है ?*
🚶🏻 युवक 👉 *मेरी पत्नी*

😂 बुजुर्ग :- तुम्हारे *घर-परिवार* और
      *सामान का ध्यान कौन रखता है ?*
🚶🏻 युवक 👉 *मेरी पत्नी*

😇 बुजुर्ग ने फिर पूछा :-
      कोई *मेहमान* आए तो ...
      *उनका ध्यान कौन रखता है ?*
🚶🏻 युवक 👉 *मेरी पत्नी*

😇 बुजुर्ग :-  *परेशानी और गम में ...*
                     *कौन साथ देता है ?*
🚶🏻 युवक :-  *मेरी पत्नी*

😇 बुजुर्ग :-  अपने माता पिता का घर
                छोड़कर *जिंदगी भर के लिए*
                *तुम्हारे साथ कौन आता है ?*
🚶🏻 युवक :-  *मेरी पत्नी*

😇 बुजुर्ग :-  *बीमारी में* तुम्हारा ध्यान और
                     *सेवा कौन करता है ?*
🚶🏻 युवक :-  *मेरी पत्नी*

😇 बुजुर्ग बोले :- एक बात और बताओ
              *तुम्हारी पत्नी इतना काम और*
              *सबका ध्यान रखती है !*
                  *क्या कभी उसने तुमसे ...*
                  *इस बात के पैसे लिए ?*
🚶🏻 युवक :-  *कभी नहीं...*

इस बात पर बुजुर्ग बोले कि ~
*पत्नी की एक कमी तुम्हें नजर आ गई*
*मगर , उसकी इतनी सारी खूबियाँ*
*तुम्हें कभी नजर नहीं आईं ?*

  ☄☄☄☄☄☄☄☄

👰🏻 *चूंकि पत्नी ईश्वर का दिया …*
  *एक स्पेशल उपहार है* इसलिए
    *उसकी उपयोगिता जानो…*
      *और उसकी देखभाल करो।*

🎈〰〰❣❣〰

               💚  😇😇 💚

Ek Bacche

*एक बच्चे को आम का पेड़ बहुत पसंद था।*

*जब भी फुर्सत मिलती वो आम के पेड के पास पहुच जाता।*

*पेड के उपर चढ़ता,आम खाता,खेलता और थक जाने पर उसी की छाया मे सो जाता।*

*उस बच्चे और आम के पेड के बीच एक अनोखा रिश्ता बन गया।*

*बच्चा जैसे-जैसे बडा होता गया वैसे-वैसे उसने पेड के पास आना कम कर दिया।*

*कुछ समय बाद तो बिल्कुल ही बंद हो गया।*

*आम का पेड उस बालक को याद करके अकेला रोता।*

*एक दिन अचानक पेड ने उस बच्चे को अपनी तरफ आते देखा और पास आने पर कहा,*

*"तू कहां चला गया था? मै रोज तुम्हे याद किया करता था। चलो आज फिर से दोनो खेलते है।"*

*बच्चे ने आम के पेड से कहा,*
*"अब मेरी खेलने की उम्र नही है*

*मुझे पढना है,लेकिन मेरे पास फीस भरने के पैसे नही है।"*

*पेड ने कहा,*
*"तू मेरे आम लेकर बाजार मे बेच दे,*
*इससे जो पैसे मिले अपनी फीस भर देना।"*

*उस बच्चे ने आम के पेड से सारे आम तोड़ लिए और उन सब आमो को लेकर वहा से चला गया।*

*उसके बाद फिर कभी दिखाई नही दिया।*

*आम का पेड उसकी राह देखता रहता।*

*एक दिन वो फिर आया और कहने लगा,*
*"अब मुझे नौकरी मिल गई है,*
*मेरी शादी हो चुकी है,*

*मुझे मेरा अपना घर बनाना है,इसके लिए मेरे पास अब पैसे नही है।"*
*आम के पेड ने कहा,*

*"तू मेरी सभी डाली को काट कर ले जा,उससे अपना घर बना ले।"*
*उस जवान ने पेड की सभी डाली काट ली और ले के चला गया।*

*आम के पेड के पास अब कुछ नहीं था वो अब बिल्कुल बंजर हो गया था।*

*कोई उसे देखता भी नहीं था।*
*पेड ने भी अब वो बालक/जवान उसके पास फिर आयेगा यह उम्मीद छोड दी थी।*

*फिर एक दिन अचानक वहाँ एक बुढा आदमी आया। उसने आम के पेड से कहा,*

*"शायद आपने मुझे नही पहचाना,*
*मैं वही बालक हूं जो बार-बार आपके पास आता और आप हमेशा अपने टुकड़े काटकर भी मेरी मदद करते थे।"*

*आम के पेड ने दु:ख के साथ कहा,*

*"पर बेटा मेरे पास अब ऐसा कुछ भी नही जो मै तुम्हे दे सकु।"*

*वृद्ध ने आंखो मे आंसु लिए कहा,*

*"आज मै आपसे कुछ लेने नही आया हूं बल्कि आज तो मुझे आपके साथ जी भरके खेलना है,*

*आपकी गोद मे सर रखकर सो जाना है।"*

*इतना कहकर वो आम के पेड से लिपट गया और आम के पेड की सुखी हुई डाली फिर से अंकुरित हो उठी।*

*वो आम का पेड़ कोई और नही हमारे माता-पिता हैं दोस्तों ।*

*जब छोटे थे उनके साथ खेलना अच्छा लगता था।*

*जैसे-जैसे बडे होते चले गये उनसे दुर होते गये।*
*पास भी तब आये जब कोई जरूरत पडी,*
*कोई समस्या खडी हुई।*

*आज कई माँ बाप उस बंजर पेड की तरह अपने बच्चों की राह देख रहे है।*

*जाकर उनसे लिपटे,*
*उनके गले लग जाये*

*फिर देखना वृद्धावस्था में उनका जीवन फिर से अंकुरित हो उठेगा।*

शनिवार, 7 अक्टूबर 2017

एक पिता का करवाचौथ पर बेटी को पत्र ---

प्रिय पुत्री
तू ससुराल में ख़ुश होगी । सारा समाज करवाचौथ का त्यौहार मनाने जा रहा है और सभी सुहागन स्त्रीयाँ आपने पति की लम्बी आयू के लिए व्रत रखेंगी।  तेरी शादी के बाद यह पहला करवाचौथ है और शायद तू भी अन्य औरतों की तरह व्रत रखे।  मेरे मन में इस विष्य पर कुछ विचार आये सो तुम्हें पत्र लिख रहा हूँ ।
                      बेटी अगर तू भी ऐसा समझती है कि व्रत रखने से पति की उम्र लम्बी होगी तो तेरी सोच भी अन्य स्त्रियों की तरह ग़लत है । 
अगर तुम सच में अपने पति की लम्बी उम्र की कामना करती हो तो ईश्वर से इसकी प्रार्थना  करना तथा अपने लिए ईश्वर से माँगना  कि ईशवर तुम्हारी बुद्धि को हमेशा नेक,सत्य,धर्म व पवित्रता के मार्ग पर चलाए, तेरा मन कभी चंचलता में भटक न जाए । अपने पति से हृदय से प्रीति करना । अगर उसकी लम्बी उम्र चाहती हो तो उसके मन को शांत रखना । परिवार में सब से मिल कर चलना अपने साँस ससुर की अलोचनाओं से पति के मन में कटुता मत भरना । पति के मन अनुसार व जो उसे प्रिय हो ऐसा अपना आचरण और स्वभाव रखना । उससे छिपा कर कोई ग़लत काम न करना ,लोगों में पति की बुराई न करना तथा निरादर न करना , अगर कही मन मुटाव हो तो उसे आपस में ही सुलझा लेना,पति से छिप कर कोई भोग पदार्थ न लेना , परिवार में कोई समस्या आये तो मिल जुल कर हल करना ।
वरणा आपस में अविश्वास पैदा होगा और झगड़ा होगा तथा तुम दोनों का जीवन सुखमय नहीं रहेगा और तुम दोनों का स्वस्थ भी ठीक नही रहेगा तथा लम्बी उम्र पाने की सोच व्यर्थ होगी। 
बेटी अपने स्वभाव को हमेशा शान्त रखना तुम अपने शातँ भाव से बड़ी से बड़ी मुश्किल घड़ी को सरलता से सुलझा लेगी । कभी भी अपना धैर्य मत खोना । तेरी दृष्टि, तेरी वाणी ,तेरा आचरण पति के अनुकूल और उसे प्रिय होना चाहिए । पति को ही अपना स्वामी पालन करने हारा मानना उसके अलावा किसी अन्य से प्रिति भाव न रखना । मेरी इन शिक्षाओं पर निश्चय से चलना ही असली व्रत है।
                          अगर तू मेरी इन बातों को मन में रख कर व्यवहार में लाएगी तो तेरा पति तेरे से हमेशा प्रसन्न चित रहेगा तथा उसके प्रसन्न रहने से उसका स्वस्थ अच्छा होगा व आयु भी लम्बी होगी । पति के प्रसन्न रहने से घर में धन लक्ष्मी व समृद्धि आयेगी और ऐश्वरय, सौभाग्य ,सुसन्तान की वृद्धि होगी । इस तरह तुम अपने पति के साथ वृद्धा अवस्था तक प्रसन्न चित ,स्वस्थ जीवन का भोग करेगी ।
व्रत स्वस्थ्य के लिय अच्छा है लेकिन अगर कोई सोचे की इससे पति की उम्र लम्बी होगी यह बिलकुल ग़लत सोच है । पति की उम्र तो जैसे मैंने ऊपर लिखा है उसी अनुसार आचरण करने से होगी । मुझे आशा है तू मेरी बातों पर अमल करेगी और भूखे रहने (वरत) के भेड़ चाल के पाखण्ड से बचेगी ।
सदैव ख़ुश रहो

तुम्हारा पिता ।                                 -------                              
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