शुक्रवार, 16 मार्च 2018

*महादेव जी को एक बार बिना कारण के किसी को प्रणाम करते देखकर पार्वती जी ने पूछा आप किसको प्रणाम करते रहते हैं?*

शिव जी पार्वती जी से कहते हैं कि हे देवी ! जो व्यक्ति एक बार *राम* कहता है उसे मैं तीन बार प्रणाम करता हूँ।

*पार्वती जी ने एक बार शिव जी से पूछा आप श्मशान में क्यूँ जाते हैं और ये चिता की भस्म शरीर पे क्यूँ लगाते हैं?*

उसी समय शिवजी पार्वती जी को श्मशान ले गए। वहाँ एक शव अंतिम संस्कार के लिए लाया गया। लोग *राम नाम सत्य है* कहते हुए शव को ला रहे थे।

शिव जी ने कहा कि देखो पार्वती ! इस श्मशान की ओर जब लोग आते हैं तो *राम* नाम का स्मरण करते हुए आते हैं। और इस शव के निमित्त से कई लोगों के मुख से मेरा अतिप्रिय दिव्य *राम* नाम निकलता है उसी को सुनने मैं श्मशान में आता हूँ, और इतने लोगों के मुख से *राम* नाम का जप करवाने में निमित्त बनने वाले इस शव का मैं सम्मान करता हूँ, प्रणाम करता हूँ, और अग्नि में जलने के बाद उसकी भस्म को अपने शरीर पर लगा लेता हूँ।

*राम* नाम बुलवाने वाले के प्रति मुझे अगाध प्रेम रहता है।

एक बार शिवजी कैलाश पर पहुंचे और पार्वती जी से भोजन माँगा। पार्वती जी विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर रहीं थीं। पार्वती जी ने कहा अभी पाठ पूरा नही हुआ, कृपया थोड़ी देर प्रतीक्षा कीजिए।

शिव जी ने कहा कि इसमें तो समय और श्रम दोनों लगेंगे। संत लोग जिस तरह से सहस्र नाम को छोटा कर लेते हैं और नित्य जपते हैं वैसा उपाय कर लो।

पार्वती जी ने पूछा वो उपाय कैसे करते हैं? मैं सुनना चाहती हूँ।

शिव जी ने बताया, केवल एक बार *राम* कह लो तुम्हें सहस्र नाम, भगवान के एक हज़ार नाम लेने का फल मिल जाएगा।

एक *राम* नाम हज़ार दिव्य नामों के समान है।

पार्वती जी ने वैसा ही किया।

पार्वत्युवाच –
*केनोपायेन लघुना विष्णोर्नाम सहस्रकं?*
*पठ्यते पण्डितैर्नित्यम् श्रोतुमिच्छाम्यहं प्रभो।।*

ईश्वर उवाच-
*श्री राम राम रामेति, रमे रामे मनोरमे।*
*सहस्र नाम तत्तुल्यम राम नाम वरानने।।*

यह *राम* नाम सभी आपदाओं को हरने वाला, सभी सम्पदाओं को देने वाला दाता है, सारे संसार को विश्राम/शान्ति प्रदान करने वाला है। इसीलिए मैं इसे बार बार प्रणाम करता हूँ।

*आपदामपहर्तारम् दातारम् सर्वसंपदाम्।*
*लोकाभिरामम् श्रीरामम् भूयो भूयो नमयहम्।*

भव सागर के सभी समस्याओं और दुःख के बीजों को भूंज के रख देनेवाला/समूल नष्ट कर देने वाला, सुख संपत्तियों को अर्जित करने वाला, यम दूतों को खदेड़ने/भगाने वाला केवल *राम* नाम का गर्जन(जप) है।

*भर्जनम् भव बीजानाम्, अर्जनम् सुख सम्पदाम्।*
*तर्जनम् यम दूतानाम्, राम रामेति गर्जनम्।*

प्रयास पूर्वक स्वयम् भी *राम* नाम जपते रहना चाहिए और दूसरों को भी प्रेरित करके *राम* नाम जपवाना चाहिए। इस से अपना और दूसरों का तुरन्त कल्याण हो जाता है। यही सबसे सुलभ और अचूक उपाय है।

इसीलिए हमारे देश में प्रणाम–
*राम राम* कहकर किया जाता है।

*जय श्री राम*

*ऐसा क्यों (Why) ??? विचार कीजियेगा ????

जिसकी आँखों में नींद है …. उसके पास अच्छा बिस्तर नहीं …जिसके पास अच्छा बिस्तर है …….उसकी आँखों में नींद नहीं ….

जिसके मन में दया है ….उसके पास खर्च करने के लिए धन नहीं ….जिसके पास खर्च करने के लिए धन है ….उसके मन में दया नहीं ….

जिन्हे कद्र है रिश्तों की … उन से कोई रिश्ता नहीं रखना चाहता.... जिनसे रिश्ता रखना चाहते हैं ….उन्हें कद्र नहीं है रिश्तों की ….

जिसको भूख है ………उसके पास खाने के लिए भोजन नहीं….जिसके पास खाने के लिए भोजन है ………उसको भूख नहीं…

कोई अपनों के लिए…. रोटी छोड़ देता है…कोई रोटी के लिए….. अपनों को छोड़ देता है….

ये दुनिया भी कितनी निराली है, कभी वक्त मिले तो सोचना..

                            

गुरुवार, 15 मार्च 2018

*दही में नमक डाल कर न खाऐं*

कभी भी आप दही को नमक के साथ मत खाईये। दही को अगर खाना ही है, तो हमेशा दही को मीठी चीज़ों के साथ खाना चाहिए, जैसे कि गुड के साथ, बूरे के साथ आदि।

इस क्रिया को और बेहतर से समझने के लिए आपको बाज़ार जाकर किसी भी साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट की दूकान पर जाना है, और वहां से आपको एक लेंस खरीदना है, अब अगर आप दही में इस लेंस से देखेंगे तो आपको छोटे-छोटे हजारों बैक्टीरिया नज़र आएंगे।

ये बैक्टीरिया जीवित अवस्था में आपको इधर-उधर चलते फिरते नजर आएंगे. ये बैक्टीरिया जीवित अवस्था में ही हमारे शरीर में जाने चाहिए, क्योंकि जब हम दही खाते हैं तो हमारे अंदर एंजाइम प्रोसेस अच्छे से चलता है।

*हम दही केवल बैक्टीरिया के लिए खाते हैं।*

दही को आयुर्वेद की भाषा में जीवाणुओं का घर माना जाता है, अगर एक कप दही में आप जीवाणुओं की गिनती करेंगे तो करोड़ों जीवाणु नजर आएंगे।

अगर आप मीठा दही खायेंगे तो ये बैक्टीरिया आपके लिए काफ़ी फायदेमंद साबित होंगे।

*वहीं अगर आप दही में एक चुटकी नमक भी मिला लें तो एक मिनट में सारे बैक्टीरिया मर जायेंगे* और उनकी लाश ही हमारे अंदर जाएगी जो कि किसी काम नहीं आएगी।

अगर आप 100 किलो दही में एक चुटकी नामक डालेंगे तो दही के सारे बैक्टीरियल गुण खत्म हो जायेंगे क्योंकि नमक में जो केमिकल्स है वह जीवाणुओं के दुश्मन है।

आयुर्वेद में कहा गया है कि दही में ऐसी चीज़ मिलाएं, जो कि जीवाणुओं को बढाये ना कि उन्हें मारे या खत्म करे।

दही को गुड़ के साथ खाईये, गुड़ डालते ही जीवाणुओं की संख्या मल्टीप्लाई हो जाती है और वह एक करोड़ से दो करोड़ हो जाते हैं थोड़ी देर गुड मिला कर रख दीजिए।

बूरा डालकर भी दही में जीवाणुओं की ग्रोथ कई गुना ज्यादा हो जाती है।

मिश्री को अगर दही में डाला जाये तो ये सोने पर सुहागे का काम करेगी।

सुना है कि भगवान कृष्ण भी दही को मिश्री के साथ ही खाते थे।

पुराने जमाने में लोग अक्सर दही में गुड़ या मिश्री डाल कर दिया करते थे।

*बहुत सुंदर कथा ..*

*एक औरत अपने परिवार के सदस्यों के लिए रोज़ाना भोजन पकाती थी और एक रोटी वह वहाँ से गुजरने वाले किसी भी भूखे के लिए पकाती थी..।*

*वह उस रोटी को खिड़की के सहारे रख दिया करती थी, जिसे कोई भी ले सकता था..।*

*एक कुबड़ा व्यक्ति रोज़ उस रोटी को ले जाता और बजाय धन्यवाद देने के अपने रस्ते पर चलता हुआ वह कुछ इस तरह बड़बड़ाता- "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा..।"*

*दिन गुजरते गए और ये सिलसिला चलता रहा..*

*वो कुबड़ा रोज रोटी लेके जाता रहा और इन्ही शब्दों को बड़बड़ाता - "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा.।"*

*वह औरत उसकी इस हरकत से तंग आ गयी और मन ही मन खुद से कहने लगी की-"कितना अजीब व्यक्ति है,एक शब्द धन्यवाद का तो देता नहीं है, और न जाने क्या-क्या बड़बड़ाता रहता है, मतलब क्या है इसका.।"*

*एक दिन क्रोधित होकर उसने एक निर्णय लिया और बोली-"मैं इस कुबड़े से निजात पाकर रहूंगी।"*

*और उसने क्या किया कि उसने उस रोटी में ज़हर मिला दिया जो वो रोज़ उसके लिए बनाती थी, और जैसे ही उसने रोटी को को खिड़की पर रखने कि कोशिश की, कि अचानक उसके हाथ कांपने लगे और रुक गये और वह बोली- "हे भगवन, मैं ये क्या करने जा रही थी.?" और उसने तुरंत उस रोटी को चूल्हे कि आँच में जला दिया..। एक ताज़ा रोटी बनायीं और खिड़की के सहारे रख दी..।*

*हर रोज़ कि तरह वह कुबड़ा आया और रोटी ले के: "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा, और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा" बड़बड़ाता हुआ चला गया..।*

*इस बात से बिलकुल बेख़बर कि उस महिला के दिमाग में क्या चल रहा है..।*

*हर रोज़ जब वह महिला खिड़की पर रोटी रखती थी तो वह भगवान से अपने पुत्र कि सलामती और अच्छी सेहत और घर वापसी के लिए प्रार्थना करती थी, जो कि अपने सुन्दर भविष्य के निर्माण के लिए कहीं बाहर गया हुआ था..। महीनों से उसकी कोई ख़बर नहीं थी..।*

*ठीक उसी शाम को उसके दरवाज़े पर एक दस्तक होती है.. वह दरवाजा खोलती है और भोंचक्की रह जाती है.. अपने बेटे को अपने सामने खड़ा देखती है..।*

*वह पतला और दुबला हो गया था.. उसके कपडे फटे हुए थे और वह भूखा भी था, भूख से वह कमज़ोर हो गया था..।*

*जैसे ही उसने अपनी माँ को देखा, उसने कहा- "माँ, यह एक चमत्कार है कि मैं यहाँ हूँ.. आज जब मैं घर से एक मील दूर था, मैं इतना भूखा था कि मैं गिर गया.. मैं मर गया होता..।*

*लेकिन तभी एक कुबड़ा वहां से गुज़र रहा था.. उसकी नज़र मुझ पर पड़ी और उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया.. भूख के मरे मेरे प्राण निकल रहे थे.. मैंने उससे खाने को कुछ माँगा.. उसने नि:संकोच अपनी रोटी मुझे यह कह कर दे दी कि- "मैं हर रोज़ यही खाता हूँ, लेकिन आज मुझसे ज़्यादा जरुरत इसकी तुम्हें है.. सो ये लो और अपनी भूख को तृप्त करो.।"*

*जैसे ही माँ ने उसकी बात सुनी, माँ का चेहरा पीला पड़ गया और अपने आप को सँभालने के लिए उसने दरवाज़े का सहारा लीया..।*

*उसके मस्तिष्क में वह बात घुमने लगी कि कैसे उसने सुबह रोटी में जहर मिलाया था, अगर उसने वह रोटी आग में जला के नष्ट नहीं की होती तो उसका बेटा उस रोटी को खा लेता और अंजाम होता उसकी मौत..?*

*और इसके बाद उसे उन शब्दों का मतलब बिलकुल स्पष्ट हो चूका था-*
*जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा,और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा।।*

              *" निष्कर्ष "*
           ==========
*हमेशा अच्छा करो और अच्छा करने से अपने आप को कभी मत रोको, फिर चाहे उसके लिए उस समय आपकी सराहना या प्रशंसा हो या ना हो..।*
          

बुधवार, 14 मार्च 2018

#चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (18 मार्च 2018) से प्रारम्भ हो रहे , भारतीय नववर्ष युगाब्द 5120 तथा विक्रमी सम्वत 2075 की आपको अग्रिम शुभकामनाये ! आइये इसके वैज्ञानिक महत्व को समझते है ।

💐 प्रकृति - 1 जनवरी कोई अंतर नही जैसा दिसम्बर वैसी जनवरी। चैत्र मास में चारो तरफ फूल खिल जाते हैं, पेड़ो पर नए पत्ते आ जाते हैं। चारो तरफ हरियाली मानो प्रकृति नया साल मना रही हो।

💐वस्त्र - दिसम्बर और जनवरी में वही उनी वस्त्र। कंबल रजाई ठिठुरते हाथ पैर चैत्र मास में सर्दी जा रही होती है , गर्मी का आगमन होने जा रहा होता है ।

💐विद्यालयो का नया - दिसंबर जनवरी वही कक्षा कुछ नया नही। जबकि मार्च अप्रैल में स्कूलो का रिजल्ट आता है नई कक्षा नया सत्र यानि विद्यालयों में नया साल।

💐नया वित्तीय वर्ष- दिसम्बर जनबरी में कोई खातो की क्लोजिंग नही होती। जबकि 31 मार्च को बैंको की(audit) कलोसिंग होती है नए वही खाते खोले जाते है। सरकार का भी नया सत्र शुरू होता है।

💐 कलैण्डर-जनवरी में नया कलैण्डर आता है। चैत्र में नया पंचांग आता है उसी से सभी भारतीय पर्व, विवाह और अन्य महूर्त देखे जाते हैं । इसके बिना हिन्दू समाज जीवन की कल्पना भी नही कर सकता इतना महत्व पूर्ण है ये कैलेंडर यानि पंचांग।

💐किसानो का नया साल -  दिसंबर जनवरी में खेतो में वही फसल होती है , जबकि मार्च अप्रैल में फसल कटती है नया अनाज घर में आता है तो किसानो की वार्षिक योजना बनती है।

💐 पर्व मनाने की विधि -  31 दिसम्बर की रात नए साल के स्वागत के लिए लोग जमकर मदिरा पान करते है, हंगामा करते है ,रात को पीकर गाड़ी चलने से दुर्घटना की सम्भावना, रेप जैसी बारदात, पुलिस प्रशासन बेहाल,और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का विनाश 
       जबकि भारतीय नववर्ष व्रत से शुरू होता है पहला नवरात्र होता है घर घर मे माता रानी की पूजा होती है। शुद्ध सात्विक वातावरण बनता है।

💐ऐतिहासिक महत्त्व - 1 जनवरी का कोई ऐतेहासिक महत्व नही है,  जबकि चैत्र प्रतिपदा के दिन महाराज विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत् की शुरुआत 💐 भगवान झूलेलाल का जन्म 💐नवरात्रे प्रारंम्भ, 💐 ब्रहम्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना, इत्यादि का संबंध इस दिन से है।

👍अंग्रेजी कलेंडर की तारीख और अंग्रेज मानसिकता के लोगो के अलावा कुछ नही बदला....

👌अपना नव संवत् ही नया साल है।

👌जब ब्रह्माण्ड से लेकर
सूर्य चाँद की दिशा,मौसम,फसल,कक्षा,
नक्षत्र,पौधों की नई पत्तिया,किसान की नई फसल,विद्यार्थी की नई कक्षा,मनुष्य में नया रक्त संचरण आदि परिवर्तन होते है। जो विज्ञान आधारित है।

👌 तब अपनी मानसिकता को बदले। विज्ञान आधारित भारतीय काल गणना को पहचाने।

👌1 जनवरी को केवल कैलेंडर बदलें। अपनी संस्कृति नही।
💐 आओ जगे जगाये,भारतीय संस्कृति अपनाये , आधुनिक बने ।

मंगलवार, 13 मार्च 2018

अंग्रेजी के प्रोफेसर से

एक स्टूडेंट ने पूछा

कि  सर नटुरे का अर्थ क्या होगा?

प्रोफेसर साहब हैरान!

टालने के लिए कह दिया

कि कल बता दूँगा।

उन्होंने
पूरी डिक्शनरी छान मारी,

किन्तु उन्हें नटुरे शब्द
नहीं मिला।

अगले दिन

स्टूडेंट ने फिर से पूछा

कि सर नटुरे का मतलब क्या होता है?

उस दिन भी उन्होंने बात टाल
दी।

अब तो वह रोज़ पूछने लगा।

प्रोफेसर साहब उससे
इतना घबराने लगे
कि 
I
उस लड़के को
देखते ही रास्ता बदल
देते,

किन्तु वह रोज़ आकर
उनको टेँशन देकर चला जाता।

अंत में

झुँझला कर
उन्होने उस लड़के से कहा कि

मुझे नटुरे
की स्पेलिंग बताओ।

लड़के ने कहा
.
.
.
.NATURE
अब तो प्रोफसर साहब का ख़ून खौल गया।

उन्होंने उस लड़के
को पकड़ के जूतो से पीटा

मुझे बेवकूफ बनाते हो,
नेचर को नटुरे
कह कह
कर तुमने मेरा
जीना मुश्किल कर दिया था।

मैं तुम्हे कॉलेज
  से निकलवा दूँगा।

लड़के ने झट से
प्रोफेसर साहब
के

पैर पकड़ लिये
और रोते रोते कहा कि
 
सर ऐसा अनर्थ
मत कीजिएगा

नहीं तो
मेरा
" फुटुरे "(Future)
  ख़राब
हो जाएगा।....

प्रोफेसरअभी तक होश मै नही आये ।

चिड़िय जब जीवित रहती है
तब वो किड़े-मकोड़ों को खाती है
और चिड़िया जब मर जाती है
तब किड़े-मकोड़े उसको खा जाते है।
👉🏿इसलिए इस बात का ध्यान रखो की समय और स्थिति कभी भी बदल सकते है
👉🏿इसलिए कभी किसी का अपमान मत करो
👉🏿कभी किसी को कम मत आंको।
👉🏿तुम शक्तिशाली हो सकते हो पर समय तुमसे भी शक्तिशाली है।
👉🏿एक पेड़ से लाखो माचिस की तिलियाँ बनाई जा सकती है।
पर एक माचिस की तिली से लाखो पेड़ भी जल सकते है।
👉🏿कोई चाहे कितना भी महान क्यों ना हो जाए, पर कुदरत कभी भी किसी को महान  बनने का मौका नहीं देती।
👉🏿कंठ दिया कोयल को, तो रूप छीन लिया ।
👉🏿रूप दिया मोर को, तो ईच्छा छीन ली ।
👉🏿दी ईच्छा इन्सान को, तो संतोष छीन लिया ।
👉🏿दिया संतोष संत को, तो संसार छीन लिया।
☝🏿मत करना कभी भी ग़ुरूर अपने आप पर 'ऐ इंसान'
भगवान ने तेरे और मेरे जैसे कितनो को मिट्टी से बना कर, मिट्टी में मिला दिए ।
☝🏿 इंसान दुनिया में तीन चीज़ो के लिए मेहनत करता है

1-मेरा नाम ऊँचा हो .
२ -मेरा लिबास अच्छा हो .
3-मेरा मकान खूबसूरत हो ..

☝🏿लेकिन इंसान के मरते ही भगवान उसकी तीनों चीज़े
सबसे पहले बदल देता है

१- नाम = (स्वर्गीय )
२- लिबास = (कफन )
३-मकान = ( श्मशान )

👉🏿जीवन की कड़वी सच्चाई जिसे हम समझना नहीं चाहते 

ये चन्द पंक्तियाँ
जिसने भी लिखी है
खूब लिखी है।

👉🏿एक पत्थर सिर्फ एक बार मंदिर जाता है और भगवान बन जाता है ..
इंसान हर रोज़ मंदिर जाते है फिर भी पत्थर ही रहते है ..!!

👉🏿एक औरत बेटे को जन्म देने के लिये अपनी सुन्दरता त्याग देती है.......
और
वही बेटा एक सुन्दर बीवी के लिए अपनी माँ को त्याग देता है
जीवन में हर जगह
हम "जीत" चाहते हैं...

👉🏿सिर्फ फूलवाले की दूकान ऐसी है
जहाँ हम कहते हैं कि हमें
"हार" चाहिए