सोमवार, 7 मई 2018

             💖मिठास💖
             〰〰〰〰

        चाय का कप लेकर आप
        खिड़की के पास बैठे हों
    और बाहर के सुंदर नज़ारे का
आनंद लेते हुए चाय की चुस्की लेते हैं
.....अरे चीनी डालना तो भूल ही गये..;

  और तभी फिर से किचन मेँ जाकर
   चीनी डालने का आलस आ गया....
    आज फीकी चाय को जैसे तैसे
      पी गए,कप खाली कर दिया

     तभी आपकी नज़र कप के तल
      में पड़ी बिना घुली चीनी पर
                पडती है..!!
  मुख पर मुस्कुराहट लिए सोच में पड
    गये...चम्मच होता तो मिला लेता

   हमारे जीवन मे भी कुछ ऐसा ही है...
       सुख ही सुख बिखरा पड़ा है
            हमारे आस पास...
                    लेकिन,
     बिन घुली उस चीनी की तरह !!

           थोड़ा सा ध्यान दें-
किसी के साथ हँसते-हँसते उतने ही
   हक से रूठना भी आना चाहिए !
       अपनो की आँख का पानी
     धीरे से पोंछना आना चाहिए !
     रिश्तेदारी और दोस्ती में कैसा
              मान अपमान ?
      बस अपनों के दिल मे रहना
             आना चाहिए...!❤

जितना हो सके....
"सरल" बनने की कोशिश करें...

शनिवार, 5 मई 2018

CLEAN YOUR KIDNEYS IN Rs. 5.00
OR EVEN LESS
Years are passing by and our kidneys are filtering
the blood by removing salt and any unwanted
bacteria entering our body.
With time salt accumulates in our kidney and it
needs to undergo cleaning treatment. How are we
going to do this?
Here is an easy, cheap and simple way to do it.
Take a bunch of coriander (DHANIYA Leaves) and
wash it clean. Cut it in small pieces and put it in a
pot. Pour clean water and boil it for ten minutes
and let it cool down. Next filter it and pour it in a
clean bottle and keep it in refrigerator to cool.
Drink one glass everyday and you will notice all
salt and other accumulated impurities coming out
of your kidney while urination. You will be able to
notice the difference yourself!
DHANIYA/CORIANDER is known as a best cleaning
treatment for kidneys and the best part is it is
natural!
Please share this information with others and keep
your kidneys clean:)

शुक्रवार, 4 मई 2018

🙏 *प्रणाम का महत्व* 🙏
💎💎💎💎💎💎💎💎

       *महाभारत का युद्ध चल रहा था -*
     *एक दिन दुर्योधन के व्यंग्य से आहत होकर "भीष्म पितामह" घोषणा कर देते हैं कि -*

       *"मैं कल पांडवों का वध कर दूँगा"*

        *उनकी घोषणा का पता चलते ही पांडवों के शिविर में बेचैनी बढ़ गई -*

    *भीष्म की क्षमताओं के बारे में सभी को पता था इसलिए सभी किसी अनिष्ट की आशंका से परेशान हो गए|*        *तब -*
  *श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से कहा अभी मेरे साथ चलो -*

   *श्रीकृष्ण द्रौपदी को लेकर सीधे भीष्म पितामह के शिविर में पहुँच गए -*

  *शिविर के बाहर खड़े होकर उन्होंने द्रोपदी से कहा कि - अन्दर जाकर पितामह को प्रणाम करो -*

      *द्रौपदी ने अन्दर जाकर पितामह भीष्म को प्रणाम किया तो उन्होंने* -
    *"अखंड सौभाग्यवती भव" का आशीर्वाद दे दिया , फिर उन्होंने द्रोपदी से पूछा कि !!*

   *"वत्स, तुम इतनी रात में अकेली यहाँ कैसे आई हो, क्या तुमको श्रीकृष्ण यहाँ लेकर आये है" ?*

  *तब द्रोपदी ने कहा कि -*
     *"हां और वे कक्ष के बाहर खड़े हैं" तब भीष्म भी कक्ष के बाहर आ गए और दोनों ने एक दूसरे से प्रणाम किया -*

*भीष्म ने कहा -*

*"मेरे एक वचन को मेरे ही दूसरे वचन से काट देने का काम श्रीकृष्ण ही कर सकते है"*

   *शिविर से वापस लौटते समय श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से कहा कि -*

     *"तुम्हारे एक बार जाकर पितामह को प्रणाम करने से तुम्हारे पतियों को जीवनदान मिल गया है "* -

      *" अगर तुम प्रतिदिन भीष्म, धृतराष्ट्र, द्रोणाचार्य, आदि को प्रणाम करती होती और दुर्योधन- दुःशासन, आदि की पत्नियां भी पांडवों को प्रणाम करती होंती, तो शायद इस युद्ध की नौबत ही न आती "* -
*......तात्पर्य्......*

       *वर्तमान में हमारे घरों में जो इतनी समस्याए हैं उनका भी मूल कारण यही है कि -*

    *"जाने अनजाने अक्सर घर के बड़ों की उपेक्षा हो जाती है "*

    *" यदि घर के बच्चे और बहुएँ प्रतिदिन घर के सभी बड़ों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लें तो, शायद किसी भी घर में कभी कोई क्लेश न हो "*

     *बड़ों के दिए आशीर्वाद कवच की तरह काम करते हैं उनको कोई "अस्त्र-शस्त्र" नहीं भेद सकता -*

    *"निवेदन 🙏 सभी इस संस्कृति को सुनिश्चित कर नियमबद्ध करें तो घर स्वर्ग बन जाय।"*

              *क्योंकि*:-

        *प्रणाम प्रेम है।*
        *प्रणाम अनुशासन है।*
        *प्रणाम शीतलता है।*                 
        *प्रणाम आदर सिखाता है।*
        *प्रणाम से सुविचार आते है।*
        *प्रणाम झुकना सिखाता है।*
        *प्रणाम क्रोध मिटाता है।*
        *प्रणाम आँसू धो देता है।*
        *प्रणाम अहंकार मिटाता है।*
        *प्रणाम हमारी संस्कृति है।*

        🙏     🙏     🙏
   
🙏  *सबको प्रणाम*  🙏

एक फौजी ने  लिखा है हमें मत छुट्टी दो, मत भत्ता दो,
बस काम यही अब करने दो,
वेतन आधा कर दो,
लेकिन कुत्तों में गोली भरने दो,
हर हर मोदी घर घर मोदी,
यह नारा सिर के पार गया,
इक दो कौड़ी का जेहादी,
सैनिक को थप्पड़ मार गया,
थप्पड़ खाएं गद्दारों के,
हम इतने भी मजबूर नही,
हम भारत माँ के सैनिक हैं कोई बंधुआ मजदूर नहीं,
अब और नही लाचार करो, हम जीते जी मर जायेंगे,
दर्पण में देख न पाएंगे,
निज वर्दी पर शर्मायेंगे,
या तो कश्मीर उन्हें दे दो,
या आर पार का काम करो,
सेना को दो ज़िम्मेदारी,
तुम दिल्ली में आराम करो,
इस राजनीती ने घाटी को सरदर्द बनाकर छोड़ा है,
भारत के वीर जवानों को नामर्द बना कर छोड़ा है,
भारत का आँचल स्वच्छ रहे, हम दागी भी हो सकते है,
दिल्ली गर यूँ ही मौन रही, हम बागी भी हो सकते हैं,                        


(एक माँ कश्मीर मे पिटने वाले फौजी बेटे से)

फोन किया माँ ने बेटे को तूने नाक कटाई है,
तेरी बहना से सब कहते बुजदिल तेरा भाई है!

ऐसी भी क्या मजबुरी थी ऐसी क्या लाचारी थी,
कुछ कुत्तो की टोली कैसे तुम शेरो पर भारी थी!
वीर शिवा के वंशज थे तुम चाट क्यु ऐसे धुल गए,
हाथो मे हथियार तो थे क्यु उन्हें चलाना भूल गये!
गीदड़ बेटा पैदा कर के मैने कोख लजाई है,
तेरी बहना से सब कहते बुजदिल तेरा भाई है!!

      
(लाचार फौजी अपनी माँ से)

इतना भी कमजोर नही था माँ मेरी मजबुरी थी,
उपर से फरमान यही था चुप्पी बहुत जरूरी थी!
सरकारे ही पिटवाती है हम को इन गद्दारो से,
गोली का आदेश नही है दिल्ली के दरबारो से!
गिन-गिनकर मैं बदले लूँगा कसम ये मैंने खाई है,
तू गुड़िया से कह देना ना बुजदिल तेरा भाई है!!👇

गुरुवार, 3 मई 2018

*ये मोबाइल यूँ ही हट्टा कट्टा नहीं बना...*
                     
बहुत कुछ खाया - पीया है इसने 

ये हाथ की घड़ी खा गया,
ये टॉर्च - लाईट खा गया, 
ये चिट्ठी पत्रियाँ खा गया,
ये किताब खा  गया।
      
ये रेडियो खा  गया
ये टेप रिकॉर्डर  खा गया
ये कैमरा खा गया
ये कैल्क्युलेटर खा गया।

ये पड़ोस की दोस्ती खा गया, 
ये मेल  - मिलाप खा गया,
ये हमारा वक्त खा गया,
ये हमारा सुकून खा गया।

ये पैसे खा गया,
ये रिश्ते खा गया,
ये यादास्त खा गया,
ये तंदुरूस्ती खा गया।

कमबख्त इतना कुछ खाकर ही स्मार्ट बना,
बदलती दुनिया का ऐसा असर होने लगा,
आदमी पागल और फोन स्मार्ट होने लगा।

जब तक फोन वायर से बंधा था,
इंसान आजाद था।
जब से फोन आजाद हुआ है,
इंसान फोन से बंध गया है।
  
ऊँगलिया ही निभा रही रिश्ते आजकल,
जुबान से निभाने का वक्त कहाँ है?
सब टच में बिजी है,
पर टच में कोई नहीं है।

*_अगर रेल यात्रा में आपका सामान चोरी हो जाए, तो ... ?_* (ध्यान से पढें)!

*R.T.I. 🚊उपयोगी जानकारी 🚊*

लखनऊ से जबलपुर लौटते वक्त ए.सी. कोच में जबलपुर की एक महिला प्रोफेसर का पर्स चोरी हो गया, जिसमें लाखों के जेवर और रुपए थे। अब तक उस सामान का पता नहीं लग सका है। चोरी गए सामान की कीमत अब रेलवे को देना होगी।

सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश ने रेल यात्रियों को यह सुविधा दिला दी है।इसके लिए पीड़ित यात्री को उपभोक्ता फोरम में रेलवे की सेवा में कमी का मामला दायर करना होगा।

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के मुताबिक रिजर्व कोच में अनाधिकृत व्यक्ति का प्रवेश रोकना टी.टी.ई. की जिम्मेदारी है, और अगर वह इसमें नाकाम रहता है, तो रेलवे सेवा में खामी मानी जाएगी।

कैसे मिला अधिकार: फरवरी 2014 में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ट्रेन से चोरी गए महिला डॉक्टर के सामान की राशि का भुगतान रेलवे को करने का आदेश दिया। रेलवे ने इस पर दलील दी की "ये मामला रेलवे क्लेम टिब्यूनल में ही सुना जा सकता है।" जबकि यात्री के वकील के मुताबिक टिब्यूनल में सिर्फ रेलवे में बुक पार्सल के मामलों को ही सुना जाता है।
न्यायमूर्ति सी.के. प्रसाद और पिनाकी चंद्र घोष की पीठ ने 17 साल पुराने इस मामले में रेलवे की दलील को खारिज कर दिया और राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के फैसले में दखल देने से इंकार कर दिया।

यह अधिकार यात्रियों के लिए जितना सुविधाजनक है, उतना ही रेलवे और पुलिस के लिए मुश्किल भरा। इसका दूसरा पक्ष यह भी है कि इसकी जानकारी यात्रियों को नहीं है, और न ही इस जानकारी को उन तक पहुंचाने के लिए कोई कारगर कदम उठाए गए हैं।

ट्रेन में चोरी होने के बाद रिपोर्ट दर्ज कराते वक्त पीड़ित को इस बारे में पुलिस द्वारा जानकारी नहीं दी जाती।

हालांकि जबलपुर जी.आर.पी. का कहना है कि 1 अप्रैल, 2014 के बाद यह आदेश जारी हुआ और 6 माह बाद यानि सितम्बर से अब तक एक भी मामले नहीं आए।

6 माह करना होगा इंतजार चोरी गए सामान को तलाशने के लिए जी.आर.पी. के पास 6 माह का वक्त होगा। इस दरमियान यदि पुलिस पीड़ित का सामान नहीं तलाश पाती तो वह उपभोक्ता फोरम जा सकता है|

इसके लिए एफ.आई.आर. दर्ज कराते समय पुलिस को पीड़ित से उपभोक्ता फोरम फार्म भरवाना होगा।

ओरिजनल कॉपी पीड़ित के पास होगी, और पुलिस कार्बन कॉपी अपने पास रखेगी। एफ.आई.आर. और फार्म ही यात्री का मूल दस्तावेज होगा, जिसके आधार वह केस दर्ज कराएगा।

ये हैं आपके अधिकार यह सुविधा सिर्फ स्लीपर या ए.सी. कोच में रिजर्वेशन कराने वाले यात्रियों के लिए है।

उपभोक्ता फोरम के जानकार एडवोकेट  बताते हैं कि रिजर्वेशन के दौरान यात्री से 2 रुपए सुरक्षा शुल्क लिया जाता है। इधर ट्रेन में स्लीपर कोच यात्री को दिया जाता है, जिसके बाद यह तय होता है कि आपने उसे ट्रेन में सोने का अधिकार दिया है और इस दौरान जो भी घटना होती है, उसका जिम्मेदार रेलवे ही होगा। ट्रेन के स्लीपर या एसी कोच में यात्रा करते समय यात्री का सामान चोरी होता है तो शिकायत दर्ज करते वक्त उससे उपभोक्ता फोरम का फार्म भरवाया जाता है। यदि 6 माह तक पुलिस उसका सामान नहीं तलाश पाती तो वह फार्म की कॉपी ले जाकर उपभोक्ता फोरम में मामला दर्ज कर सकता है, जहां पर रेलवे को पीड़ित का हर्जाना देना होगा।

💥 इसे पढ़ कर सिर्फ अपने तक सीमित मत रखिए, बल्कि इसे आगे बढ़ाइए ...💥 Centralised numbers released by Indian Railways for citizen convinience
"

9760534983 : टीटीई, आरक्षण और भोजन
9760500000 : साफ-सफाई
9760534057 : कोच में समस्या
9760534060 : बिजली से जुड़ी समस्या
9920142151 : इंक्वायरी की समस्या
9760534063 : आरपीएफ एवं सुरक्षा
9760534069 : पेयजल व्यवस्था
9760534073 : चिकित्सा

मंगलवार, 1 मई 2018

🙏🌿खुशवंत सिंह के लिखे ज़िंदगी के दस सूत्र 🙏
इन दसों सूत्रों को पढ़ने के बाद पता चला कि सचमुच खुशहाल ज़िंदगी और शानदार मौत के लिए ये सूत्र बहुत ज़रूरी हैं।

1. *अच्छा स्वास्थ्य* - अगर आप पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं, तो आप कभी खुश नहीं रह सकते। बीमारी छोटी हो या बड़ी, ये आपकी खुशियां छीन लेती हैं।

2. *ठीक ठाक बैंक बैलेंस* - अच्छी ज़िंदगी जीने के लिए बहुत अमीर होना ज़रूरी नहीं। पर इतना पैसा बैंक में हो कि आप आप जब चाहे बाहर खाना खा पाएं, सिनेमा देख पाएं, समंदर और पहाड़ घूमने जा पाएं, तो आप खुश रह सकते हैं। उधारी में जीना आदमी को खुद की निगाहों में गिरा देता है।

3. *अपना मकान* - मकान चाहे छोटा हो या बड़ा, वो आपका अपना होना चाहिए। अगर उसमें छोटा सा बगीचा हो तो आपकी ज़िंदगी बेहद खुशहाल हो सकती है।

4. *समझदार जीवन साथी* - जिनकी ज़िंदगी में समझदार जीवन साथी होते हैं, जो एक-दूसरे को ठीक से समझते हैं, उनकी ज़िंदगी बेहद खुशहाल होती है, वर्ना ज़िंदगी में सबकुछ धरा का धरा रह जाता है, सारी खुशियां काफूर हो जाती हैं। हर वक्त कुढ़ते रहने से बेहतर है अपना अलग रास्ता चुन लेना।

5. *दूसरों की उपलब्धियों से न जलना*  - कोई आपसे आगे निकल जाए, किसी के पास आपसे ज़्यादा पैसा हो जाए, तो उससे जले नहीं। दूसरों से खुद की तुलना करने से आपकी खुशियां खत्म होने लगती हैं।

6. *गप से बचना* - लोगों को गपशप के ज़रिए अपने पर हावी मत होने दीजिए। जब तक आप उनसे छुटकारा पाएंगे, आप बहुत थक चुके होंगे और दूसरों की चुगली-निंदा से आपके दिमाग में कहीं न कहीं ज़हर भर चुका होगा।

7. *अच्छी आदत* - कोई न कोई ऐसी हॉबी विकसित करें, जिसे करने में आपको मज़ा आता हो, मसलन गार्डेनिंग, पढ़ना, लिखना। फालतू बातों में समय बर्बाद करना ज़िंदगी के साथ किया जाने वाला सबसे बड़ा अपराध है। कुछ न कुछ ऐसा करना चाहिए, जिससे आपको खुशी मिले और उसे आप अपनी आदत में शुमार करके नियमित रूप से करें।

8. *ध्यान* - रोज सुबह कम से कम दस मिनट ध्यान करना चाहिए। ये दस मिनट आपको अपने ऊपर खर्च करने चाहिए। इसी तरह शाम को भी कुछ वक्त अपने साथ गुजारें। इस तरह आप खुद को जान पाएंगे।

9. *क्रोध से बचना* - कभी अपना गुस्सा ज़ाहिर न करें। जब कभी आपको लगे कि आपका दोस्त आपके साथ तल्ख हो रहा है, तो आप उस वक्त उससे दूर हो जाएं, बजाय इसके कि वहीं उसका हिसाब-किताब करने पर आमदा हो जाएं।

10. *अंतिम समय* - जब यमराज दस्तक दें, तो बिना किसी दुख, शोक या अफसोस के साथ उनके साथ निकल पड़ना चाहिए अंतिम यात्रा पर, खुशी-खुशी। शोक, मोह के बंधन से मुक्त हो कर जो यहां से निकलता है, उसी का जीवन सफल होता है।

*मुझे नहीं पता कि खुशवंत सिंह ने पीएचडी की थी या नहीं। पर इन्हें पढ़ने के बाद मुझे लगने लगा है कि ज़िंदगी के डॉक्टर भी होते हैं। ऐसे डॉक्टर ज़िंदगी बेहतर बनाने का फॉर्मूला देते हैं । ये ज़िंदगी के डॉक्टर की ओर से ज़िंदगी जीने के लिए दिए गए नुस्खे है।*
🙏