सोमवार, 1 मई 2017

😂😂😂😂😝😝😝 बडी दुविधा होती रही थी जब : 1.बायोलॉजी के टीचर ने पढाया : सेल मतलब 'शरीर की कोशिकाएँ'। 2.फिजिक्स के टीचर ने पढाया : सेल मतलब 'बैटरी', 3.इकोनॉमिक्स के टीचर ने पढाया: सेल मतलब 'बिक्री', 4.हिस्ट्री के टीचर ने पढाया : सेल मतलब 'जेल', 5.अंग्रेजी के टीचर ने पढाया: सेल मतलब 'मोबाइल', पढ़ाई ही छोड़ दी भाई साब, यह सोचकर कि जिस स्कूल में पांच शिक्षक एकमत नहीं है उस स्कूल में पढ़ कर क्या होगा ? और *सच्चा ज्ञान मिला जब पत्नी ने बताया सेल मतलब 'डिस्काउंट' !!* 😆😝

हसना पेट पकड के.. 😛😛

दो महिलाओं की मुलाकात स्वर्ग में हुई.

पहली 👸🏼- कहो बहिन, तुम्हारी मौत कैसे हुई ?

दूसरी 👩 - ज्यादा ठण्ड लगने के कारण और
तुम्हारी ?

पहली 👸🏼 - हाई ब्लड प्रेशर के कारण. बात दरअसल यह हुई कि मुझे अपने पति पर शक था. एक दिन मुझे पता चला कि वो घर में किसी दूसरी औरत के साथ हैं. मैं फ़ौरन
घर पहुंची तो
देखा कि मेरे पति आराम से अकेले टीवी देख रहे हैं.

दूसरी 👩 - फिर क्या हुआ ?

पहली 👸🏼 - खबर पक्की थी इसलिए मुझे विश्वास नहीं हुआ. मैंने उस औरत को घर के कोने कोने में, तहखाने में, पर्दों के पीछे, गार्डेन
में यहाँ तक कि अलमारी और संदूक तक में तलाश किया पर वह नहीं मिली. मुझे इतनी टेंशन हुई कि मेरा ब्लड प्रेशर बहुत बढ़ गया और मेरी मौत हो गई.

दूसरी 👩 - काश !!! तुमने फ्रिज खोलकर देख लिया होता तो आज हम दोनों जिन्दा होते...😳😳😳😳😄😄😄😄😄😂😂😂😂

🙋🏻‍♂ प्रभु श्री कृष्ण की प्राप्ति किसे होती है..?

एक सुन्दर कहानी है :--
एक राजा था। वह बहुत न्याय प्रिय तथा प्रजा वत्सल एवं धार्मिक स्वभाव का था। वह नित्य अपने इष्ट देव की बडी श्रद्धा से पूजा-पाठ और याद करता था।
एक बार भगवान श्री कृष्ण ने प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिये तथा कहा -- "राजन् मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हैं। बोलो तुम्हारी कोई इच्छा है..?"

प्रजा को चाहने वाला राजा बोला -- "भगवन् मेरे पास आपका दिया सब कुछ हैं आपकी कृपा से राज्य मे सब प्रकार सुख-शान्ति है। फिर भी मेरी एक ही ईच्छा हैं कि जैसे आपने मुझे दर्शन देकर धन्य किया, वैसे ही मेरी सारी प्रजा को भी कृपा कर दर्शन दीजिये।"
"यह तो सम्भव नहीं है" -- ऐसा कहते हुए भगवान ने राजा को समझाया। परन्तु प्रजा को चाहने वाला राजा भगवान् से जि्द करने लगा।

आखिर भगवान को अपने भक्त के सामने झुकना पडा ओर वे बोले -- "ठीक है, कल अपनी सारी प्रजा को उस पहाड़ी के पास ले आना और मैं पहाड़ी के ऊपर से सभी को दर्शन दूँगा।"

ये सुन कर राजा अत्यन्त प्रसन्न हुअा और भगवान को धन्यवाद दिया। अगले दिन सारे नगर मे ढिंढोरा पिटवा दिया कि कल सभी पहाड़ के नीचे मेरे साथ पहुँचे, वहाँ भगवान् आप सबको दर्शन देगें। दूसरे दिन राजा अपने समस्त प्रजा और स्वजनों को साथ लेकर पहाडी की ओर चलने लगा।

चलते-चलते रास्ते मे एक स्थान पर तांबे कि सिक्कों का पहाड़ देखा। प्रजा में से कुछ एक लोग उस ओर भागने लगे। तभी ज्ञानी राजा ने सबको सर्तक किया कि कोई उस ओर ध्यान न दे, क्योंकि तुम सब भगवान से मिलने जा रहे हो, इन तांबे के सिक्कों के पीछे अपने भाग्य को लात मत मारो।

परन्तु लोभ-लालच मे वशीभूत प्रजा के कुछ एक लोग तो तांबे की सिक्कों वाली पहाड़ी की ओर भाग ही गयी और सिक्कों कि गठरी बनाकर अपने घर कि ओर चलने लगे। वे मन ही मन सोच रहे थे, पहले ये सिक्कों को समेट ले, भगवान से तो फिर कभी मिल ही लेगे ।
राजा खिन्न मन से आगे बढ़े। कुछ दूर चलने पर चांदी कि सिक्कों का चमचमाता पहाड़ दिखाई दिया। इस बार भी बचे हुये प्रजा में से कुछ लोग, उस ओर भागने लगे ओर चांदी के सिक्कों को गठरी बनाकर अपनी घर की ओर चलने लगे। उनके मन मे विचार चल रहा था कि ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता है। चांदी के इतने सारे सिक्के फिर मिले न मिले, भगवान तो फिर कभी मिल ही जायेगें। इसी प्रकार कुछ दूर और चलने पर सोने के सिक्कों का पहाड़ नजर आया। अब तो प्रजा जनो में बचे हुये सारे लोग तथा राजा के स्वजन भी उस ओर भागने लगे।

वे भी दूसरों की तरह सिक्कों कि गठरीयां लाद-लाद कर अपने-अपने घरों की ओर चल दिये। अब केवल राजा ओर रानी ही शेष रह गये थे। राजा रानी से कहने लगे - "देखो कितने लोभी ये लोग। भगवान से मिलने का महत्व ही नहीं जानते हैं। भगवान के सामने सारी दुनियां की दौलत क्या चीज हैं..?"

सही बात है -- रानी ने राजा कि बात का समर्थन किया और वह आगे बढ़ने लगे कुछ दुर चलने पर राजा ओर रानी ने देखा कि सप्तरंगि आभा बिखरता हीरों का पहाड़ हैं । अब तो रानी से भी रहा नहीं गया, हीरों के आर्कषण से वह भी दौड़ पड़ी और हीरों कि गठरी बनाने लगी । फिर भी उसका मन नहीं भरा तो साड़ी के पल्लू मेँ भी बांधने लगी । वजन के कारण रानी के वस्त्र देह से अलग हो गये, परंतु हीरों का तृष्णा अभी भी नहीं मिटी। यह देख राजा को अत्यन्त ही ग्लानि ओर विरक्ति हुई । बड़े दुःखद मन से राजा अकेले ही आगे बढ़ते गये ।

वहाँ सचमुच भगवान खड़े उसका इन्तजार कर रहे थे । राजा को देखते ही भगवान मुसकुराये ओर पुछा -- "कहाँ है तुम्हारी प्रजा और तुम्हारे प्रियजन। मैं तो कब से उनसे मिलने के लिये बेकरारी से उनका इन्तजार कर रहा हूँ।" राजा ने शर्म और आत्म-ग्लानि से अपना सर झुका दिया।

तब भगवान ने राजा को समझाया --
"राजन, जो लोग अपने जीवन में भौतिक सांसारिक प्राप्ति को मुझसे अधिक मानते हैं, उन्हें कदाचित मेरी प्राप्ति नहीं होती और वह मेरे स्नेह तथा कृपा से भी वंचित रह जाते हैं..।"

सार..
जो जीव अपनी मन, बुद्धि और आत्मा से भगवान की शरण में जाते हैं, और
सर्व लौकिक सम्बधों को छोड़ के प्रभु को ही अपना मानते हैं वो ही भगवान के प्रिय बनते हैं।

Salt

क्या आप रोज खाने खाये जाने वाले नमक के बारे में जानते है?

तो नमक के बारे में ये बातें जान लें।

नमक में दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल देने का गुण होता है

वास्तुशास्त्र में

नमक को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

नमक के अलग-अलग इस्तेमाल से घर से नकारात्मक ऊर्जा निकल जाती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

मानसिक शांति, सेहत, सुख-समृद्धि और पैसे के मामले में नमक की भूमिका अहम है।

वास्तु के अनुसार यदि नमक का सही ढंग से इस्तेमाल किया जाए, तो एक चुटकी नमक ही काफी है दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने के लिए काफी है...।

एक चुटकी नमक का कमाल...

यदि आप आए दिन बीमार रहते हैं।

घर में परिवार के सदस्यों के बीच आए दिन झगड़े होते हैं।

हर तरफ  नकारात्मकता नजर आती है,

तो नमक वाले पानी से पूरे घर में पोंछा लगाएं। बस पोंछे वाले पानी में एक चुटकी काला नमक मिलाएं, फिर देखें इसका कमाल।

कुछ दिनों में इसका असर देखने को मिल जाएगा।

यदि हर दिन संभव न हो, तो मंगलवार को जरूर नमक को पोंछा लगाएं। इस उपाय से न सिर्फ घर की नकारात्मकता दूर होगी, घर में सकारात्मक एनर्जी आएगी।

परविार के सदस्य बीमार भी नहीं पड़ते हैं। सौभाग्य के दरवाजे खुलेंगे।

किसमें रखें नमक...

आप जरा अपने घर में यह देखिए कि जिस बर्तन में नमक रखा जा रहा है, वह किस चीज से बना है।

स्टील यानी लोहे से बने बर्तन में नमक कभी नहीं रखना चाहिए।

वास्तु में ऐसी मान्यता है कि नमक को हमेशा कांच के जार में भरकर रखना चाहिए।

साथ ही इसमें एक लौंग डाल दें, तो फिर सोने पे सुहागा... इससे घर में सुख-समृद्धि तो रहती ही है। पैसों की भी कभी कमी महसूस नहीं होती। धन का फ्लो बना रहता है।

नमक मानसिक शांति भी देता है...

यदि आपका मन हर समय बेचैन रहता है।

न तो घर में मन लगता, न बाहर, ना ही ऑफिस में…

आप लाख कोशिश करते हैं, फिर मानसिक शांति नहीं मिल रही होती है।

ऐसी समस्या से निजात पाने के लिए नमक का उपाय रामबाण का काम करता है।

इस उपाय में भी एक चुटकी नमक कमाल करता है।

जी हां, नहाते समय समय पानी में एक चुटकी नमक मिला लें और उससे स्नान करें।

वास्तु विशेषज्ञों की मानें, तो ऐसा करने से मानसिक बेचैनी कम हो जाती है। तन-मन हमेशा तरोताजा रहता है। आलस्य से छुटकारा मिल जाता है।

डॉक्टर है नमक…

यदि घर में कोई लंबे समय से बीमार चल रहा हो, तो उसके बिस्तर के पास कांच की बोतल में नमक भरकर रखें और हर महीने इसे बदल दें।

वास्तु शास्त्र के मुताबिक, ऐसा करने से बीमार व्यक्ति की सेहत में काफी सुधार आ सकता है। यह उपाय तब तक करते रहें, जब तक वह व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ ने हो जाए।

पहाड़ी नमक का कमाल...

कौन व्यक्ति नहीं चाहेगा कि उसके घर में हमेशा सुख-शांति बनी रहे, लेकिन हम देखते हैं कि व्यक्ति हर तरह से सम्पन्न होता है, लेकिन बावजूद इसके उसके घर में सुख आ अभाव रहता है।

शांति भंग हो जाती है। असल में वास्तुदोष होने से घर में नकारात्मकता का प्रवेश होता है और व्यक्ति परेशान रहता है।

इससे छुटकारा पाने के लिए या वास्तुदोष खत्म करने के लिए इसमें एक नमक का उपाय बहुत कारगर साबित हो सकता है।

बाजार में पहाड़ी सैंधा नमक भी मिलता है। इसे लाकर अपने घर के एक कोने में रख दें।

आप कुछ ही दिनों में महसूस करेंगे कि घर की सारी नकारात्मकत एनर्जी दूर हो जाएगी। परिवार के लोग खुश रहने लगेंगे। घर में सुख-शांति फैल जाएगी।

नमक को लेकर ये दो सावधानियां...

नमक के बारे मे प्राचीन मान्यता है कि यदि आप नमक सीधे किसी के हथेली में रखकर देते हैं, तो इससे उस व्यक्ति के साथ अवश्य ही आपका झगड़ा हो सकता है।

इसलिए इस बात को हमेशा ध्यान रखें कि नमक कभी किसी को हाथ में न दें, बल्कि चम्मच से बर्तन के जरिए दें।

इसके अलावा नमक को कभी जमीन में न गिरने दें।

नमक को कभी बेकार भी मत होने दें। वास्तु के अनुसार, यदि नमक जमीन पर सीधे गिरता है, तो यह माने लें कि आप सीधे अपने दुर्भाग्य को दावत दे रहे हैं।

*सेंधा नमक : भारत से कैसे गायब कर दिया गया*।।।

सेंधा नमक वात, पित्त और कफ को दूर करता है सेंधा नमक

आप सोच रहे होंगे की ये सेंधा नमक बनता कैसे है ??

आइये आज हम आपको बताते हैं कि नमक मुख्य कितने प्रकार होते हैं !!

एक होता है समुद्री नमक दूसरा होता है सेंधा नमक (rock slat) !!

सेंधा नमक बनता नहीं है पहले से ही बना बनाया है !!

पूरे उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में खनिज पत्थर के नमक को ‘सेंधा नमक’ या ‘सैन्धव नमक’, लाहोरी नमक आदि आदि नाम से जाना जाता है !

जिसका मतलब है ‘सिंध या सिन्धु के इलाक़े से आया हुआ’। वहाँ नमक के बड़े बड़े पहाड़ है सुरंगे है !! वहाँ से ये नमक आता है !

मोटे मोटे टुकड़ो मे होता है आजकल पीसा हुआ भी आने लगा है

सैंधा नमक ह्रदय के लिये उत्तम, दीपन और पाचन मे मददरूप, त्रिदोष शामक, शीतवीर्य अर्थात ठंडी तासीर वाला, पचने मे हल्का है । इसके सेवन से शरीर मे स्थित पाचक रस बढ़्ते हैं। तों अंत आप ये समुद्री नमक के चक्कर से बाहर निकले ! काला नमक ,सेंधा नमक प्रयोग करे !!_ क्यूंकि ये प्रकर्ति का बनाया है और फायदेमंद है।

आयोडीन युक्त नमक के नाम पर हम जो नमक खाते हैं उसमें कोर्इ तत्व नहीं होता।

फैक्ट्री में समुद्री नमक को आयोडीन युक्त और फ्रीफ्लो नमक बनाते समय नमक से सारे तत्व निकाल लिए जाते हैं और उनकी बिक्री अलग से करके बाजार में सिर्फ सोडियम वाला नमक ही उपलब्ध होता है जो आयोडीन की कमी के नाम पर पूरे देश में बेचा जाता है, जबकि आयोडीन की कमी सिर्फ पर्वतीय क्षेत्रों में ही पार्इ जाती है इसलिए आयोडीन युक्त नमक केवल उन्ही क्षेत्रों के लिए जरुरी है।

भारत मे 1930 से पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था।

विदेशी कंपनीया भारत मे नमक के व्यापार मे आज़ादी के पहले से उतरी हुई है , उनके कहने पर ही भारत के अँग्रेजी प्रशासन द्वारा भारत की भोली भली जनता को आयोडिन मिलाकर समुद्री नमक खिलाया जा रहा है।

हुआ ये कि जब ग्लोबलाईसेशन के बाद बहुत सी विदेशी कंपनियो (अनपूर्णा, कैपटन कुक ) ने इस प्रकार का नमक बेचना शुरू किया तब ये सारा खेल शुरू हुआ !

अब समझिए खेल क्या था ??

खेल ये था कि विदेशी कंपनियो को नमक बेचना है और बहुत मोटा लाभ कमाना है और लूट मचानी है तो पूरे भारत मे एक नई बात फैलाई गई कि आओडीन युक्त नामक खाओ , आओडीन युक्त नमक खाओ ! आप सबको आओडीन की कमी हो गई है !

ये आयोडीन युक्त नमक सेहत और दिमाग के लिए बहुत अच्छा है आदि आदि बातें पूरे देश मे प्रायोजित ढंग से फैलाई गई !!

और जो नमक किसी जमाने मे 1 से 2 रूपये किलो मे बिकता था ! उसकी जगह आओडीन नमक के नाम पर सीधा भाव पहुँच गया 8 रूपये प्रति किलो ! और आज तो 20 रूपये को भी पार कर गया है !

यह जान लें कि दुनिया के अमेरिका, जर्मनी और फ्रांस आदि जैसे 56 देशों ने अतिरिक्त आओडीन युक्त नमक 40 50 साल पहले ही ban कर दिया।

उनकी सरकार ने कहा हमने अपने लोगों को आयोडीन युक्त नमक खिलाया !(1940 से 1956 तक ) जिसके फलस्वरूप हमारे यहां के अधिकांश लोग नपुंसक हो गए !

जनसंख्या इतनी कम हो गई कि देश के खत्म होने का खतरा हो गया !

उनके वैज्ञानिको ने कहा कि आओडीन युक्त नमक बंद करवाओ तो उन्होने बैन लगाया !

और शुरू के दिनो मे जब हमारे देश मे ये आओडीन का खेल शुरू हुआ इस देश के बेशर्म नेताओ ने कानून बना दिया कि बिना आओडीन युक्त नमक बिक नहीं सकता भारत मे !! वो कुछ समय पूर्व किसी ने कोर्ट मे मुकदमा दाखिल किया और ये बैन हटाया गया।

आज से कुछ वर्ष पहले हमारे देश मे कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था सब सेंधा नमक ही खाते थे !

सेंधा नमक के उपयोग से रक्तचाप और बहुत ही गंभीर बीमारियों पर नियन्त्रण रहता है ।!

क्योंकि सैंधा नमक अम्लीय नहीं ये क्षारीय है (alkaline ) !! क्षारीय चीज जब अमल मे मिलती है तो वो न्यूटल हो जाता है ! और रक्त अमलता खत्म होते ही शरीर के 48 रोग ठीक हो जाते हैं !

सैंधा नमक शरीर मे पूरी तरह से घुलनशील है !

सेंधा नमक शरीर मे 97 पोषक तत्वो की कमी को पूरा करता है ! इन पोषक तत्वो की कमी ना पूरी होने के कारण ही लकवे (paralysis ) का अटैक आने का सबसे बढ़ा जोखिम होता है।

सेंधा नमक के बारे में आयुर्वेद में बोला गया है कि यह आपको इसलिये खाना चाहिए क्योंकि सेंधा नमक वात, पित्त और कफ को दूर करता है।

सैंधा नमक पाचन में सहायक होता है और साथ ही इसमें पोटैशियम और मैग्नीशियम पाया जाता है जो हृदय के लिए लाभकारी होता है।

यही नहीं आयुर्वेदिक औषधियों आदि में भी प्रयोग किया जाता है।

वर्तमान समय मे आम तौर से उपयोग मे लाये जाने वाले आयोडीन युक्त समुद्री नमक से उच्च रक्तचाप (high BP ) , डाइबिटीज़, आदि गंभीर बीमारियो का भी कारण बनता है ।

इसका एक कारण ये है कि ये नमक अम्लीय (acidic) होता है ! जिससे रक्त अम्लता बढ़ती है और रक्त की अमलता बढ्ने से ये सब 48 रोग आते है !

ये आयोडीन युक्त नमक पानी में कभी भी पूरी तरह नहीं घुलता हीरे (diamond ) की तरह चमकता रहता है इसी प्रकार शरीर के अंदर जाकर भी नहीं घुलता और अंत इसी प्रकार किडनी से भी नहीं निकल पाता और पथरी का भी कारण बनता है !

और ये आयोडीन युक्त समुद्री नमक नपुंसकता और लकवा (paralysis ) का बहुत बड़ा कारण है समुद्री नमक से सिर्फ शरीर को 4 पोषक तत्व मिलते है ! और बीमारिया जरूर साथ मे मिल जाती है !

समुद्री नमक में 98% सोडियम क्लोराइड ही है शरीर इसे विजातीय पदार्थ के रुप में रखता है। यह शरीर में घुलता नही है।

समुद्री नमक में आयोडीन को बनाये रखने के लिए Tricalcium Phosphate, Magnesium Carbonate, Sodium Alumino Silicate जैसे रसायन मिलाये जाते हैं जो सीमेंट बनाने में भी इस्तेमाल होते है।

विज्ञान के अनुसार यह रसायन शरीर में रक्त वाहिनियों को कड़ा बनाते हैं जिससे रक्त वाहनियों में ब्लाक्स बनने की संभावना और आक्सीजन जाने मे परेशानी होती है जोड़ो का दर्द और गढिया, प्रोस्टेट आदि होती है।

आयोडीन नमक से पानी की जरुरत ज्यादा होती है। 1 ग्राम नमक अपने से 23 गुना अधिक पानी खींचता है।

यह आयोडीन नमक कोशिकाओ में स्थित पानी को कम करता है। इसी कारण हमें प्यास ज्यादा लगती है।

पांच हजार साल पुरानी आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में भी भोजन में सेंधा नमक के ही इस्तेमाल की सलाह दी गई है।

सिर्फ आयोडीन के चक्कर में समुद्री नमक खाना समझदारी नहीं है।

सेंधा नमक मे प्राकृतिक के द्वारा भगवान द्वारा बनाया आओडीन होता और जो हम समुन्दी नमक खाते है उससे शरीर मे कमजोरी, हड्डी कमजोर हो जाती है । तो आइए प्रकृति द्वारा जारी नमक खाये ।

(((((((((( नियम का महत्व ))))))))))
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एक संत थे। एक दिन वे एक जाट के घर गए। जाट ने उनकी बड़ी सेवा की। सन्त ने उसे कहा कि रोजाना नाम -जप करने का कुछ नियम ले लो।
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जाट ने कहा बाबा, हमारे को वक्त नहीं मिलता। सन्त ने कहा कि अच्छा, रोजाना ठाकुर जी की मूर्ति के दर्शन कर आया करो।
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जाट ने कहा मैं तो खेत में रहता हूं और ठाकुर जी की मूर्ति गांव के मंदिर में है, कैसे करूँ ?
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संत ने उसे कई साधन बताये, कि वह कुछ -न-कुछ नियम ले लें। पर वह यही कहता रहा कि मेरे से यह बनेगा नहीं, मैं खेत में काम करू या माला लेकर जप करूँ। इतना समय मेरे पास कहाँ है ?
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बाल -बच्चों का पालन पोषण करना है। आपके जैसे बाबा जी थोड़े ही हूँ। कि बैठकर भजन करूँ।
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संत ने कहा कि अच्छा तू क्या कर सकता है ? जाट बोला कि पड़ोस में एक कुम्हार रहता है। उसके साथ मेरी मित्रता है। उसके और मेरे खेत भी पास -पास है।
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और घर भी पास -पास है। रोजाना एक बार उसको देख लिया करूगाँ। सन्त ने कहा कि ठीक है। उसको देखे बिना भोजन मत करना।
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जाट ने स्वीकार कर लिया। जब उसकी पत्नी कहती कि भोजन कर लो। तो वह चट बाड़ पर चढ़कर कुम्हार को देख लेता। और भोजन कर लेता।
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इस नियम में वह पक्का रहा। एक दिन जाट को खेत में जल्दी जाना था। इसलिए भोजन जल्दी तैयार कर लिया।
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उसने बाड पर चढ़कर देखा तो कुम्हार दीखा नहीं। पूछने पर पता लगा कि वह तो मिट्टी खोदने बाहर गया है। जाट बोला कि कहां मर गया, कम से कम देख तो लेता।
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अब जाट उसको देखने के लिए तेजी से भागा। उधर कुम्हार को मिट्टी खोदते -खोदते एक हाँडी मिल गई। जिसमें तरह -तरह के रत्न, अशर्फियाँ भरी हुई थी।
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उसके मन में आया कि कोई देख लेगा तो मुश्किल हो जायेगी। अतः वह देखने के लिए ऊपर चढा तो सामने वह जाट आ गया।
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कुम्हार को देखते ही जाट वापस भागा। तो कुम्हार ने समझा कि उसने वह हाँडी देख ली। और अब वह आफत पैदा करेगा।
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कुम्हार ने उसे रूकने के लिए आवाज लगाई। जाट बोला कि बस देख लिया, देख लिया।
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कुम्हार बोला कि अच्छा, देख लिया तो आधा तेरा आधा मेरा, पर किसी से कहना मत। जाट वापस आया तो उसको धन मिल गया।
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उसके मन में विचार आया कि संत से अपना मनचाहा नियम लेने में इतनी बात है। अगर सदा उनकी आज्ञा का पालन करू तो कितना लाभ है।
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ऐसा विचार करके वह जाट और उसका मित्र कुम्हार दोनों ही भगवान् के भक्त बन गए।
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तात्पर्य यह है कि हम दृढता से अपना एक उद्देश्य बना ले, नियम ले ले l
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मेरे रामा...
मुझे मेरे  करमो पर भरोसा नहीं
          पर तेरी रहमतो पर भरोसा है
मेरे करमों में कमी रह सकती है
          लेकिन तेरी रहमतों में नही..
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  (((((((((( जय जय श्री राम )))))))))
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1. National Sister - Mamta Banerjee

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3. National Tension - Salman Khan's Marriage
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4. National Bachelor - Rahul Gandhi
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5. National food - Kasam
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6. National Struggler - Abhishek Bachchan
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7. National Mom - Jaya Lalita
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8. National Jamaai - Robert Vadra
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9. National Book - Face Book

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11. National Bank - Swiss Bank
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12. National God - Sachin Tendulkar
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13. National Show - Comedy Nights with Kapil
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14. National Tiger - Narendra Modi
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15. National Time Pass -
      Whatsapp
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Amul - The taste of India

Babool - The paste of India

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Sonia - The guest of India

Modi - The best of India
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दाम्पत्य गुदगुदी-

शादी की 10वीं सालगिरह पर पत्नी पुलकित होकर बोली:

"आप बिलकुल भी नहीं बदले। वैसे के वैसे ही भोले-भाले, वैसे ही शांत, एकदम पहले जैसे ही हैं।"

पति भी भावुक होकर बोल उठा:-

"जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।
चन्दन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग।।"

(पति का इलाज़ चल रहा है।)
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