मंगलवार, 7 नवंबर 2017

*• गौतम बुद्ध के सुविचार •*

.... जो गुजर गया उसके बारे में मत सोचो और भविष्य के सपने मत देखो
केवल वर्तमान पे ध्यान केंद्रित करो ।
                   *– गौतम बुद्ध*

.... आप पूरे ब्रह्माण्ड में कहीं भी ऐसे व्यक्ति को खोज लें जो आपको आपसे ज्यादा प्यार करता हो, आप पाएंगे कि जितना प्यार आप खुद से कर सकते हैं उतना कोई आपसे नहीं कर सकता।
                   *– गौतम बुद्ध*

.... स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ा धन और विश्वास सबसे अच्छा संबंध।
                  *– गौतम बुद्ध*

.... हमें हमारे अलावा कोई और नहीं बचा सकता, हमें अपने रास्ते पे खुद चलना है।
                    *– गौतम बुद्ध*

.... तीन चीज़ें ज्यादा देर तक नहीं छुपी रह सकतीं – सूर्य, चन्द्रमा और सत्य
                   *– गौतम बुद्ध*

.... आपका मन ही सब कुछ है, आप जैसा सोचेंगे वैसा बन जायेंगे ।
                   *– गौतम बुद्ध*

.... अपने शरीर को स्वस्थ रखना भी एक कर्तव्य है, अन्यथा आप अपनी मन और सोच को अच्छा और साफ़ नहीं रख पाएंगे ।
                   *– गौतम बुद्ध*

.... हम अपनी सोच से ही निर्मित होते हैं, जैसा सोचते हैं वैसे ही बन जाते हैं। जब मन शुद्ध होता है तो खुशियाँ परछाई की तरह आपके साथ चलती हैं ।
                    *– गौतम बुद्ध*

.... किसी परिवार को खुश, सुखी और स्वस्थ रखने के लिए सबसे जरुरी है - अनुशासन और मन पर नियंत्रण।
अगर कोई व्यक्ति अपने मन पर नियंत्रण कर ले तो उसे आत्मज्ञान का रास्ता मिल जाता है
                   *– गौतम बुद्ध*

.... क्रोध करना एक गर्म कोयले को दूसरे पे फैंकने के समान है जो पहले आपका ही हाथ जलाएगा।
                    *– गौतम बुद्ध*

.... जिस तरह एक मोमबत्ती की लौ से हजारों मोमबत्तियों को जलाया जा सकता है फिर भी उसकी रौशनी कम नहीं होती उसी तरह एक दूसरे से खुशियाँ बांटने से कभी खुशियाँ कम नहीं होतीं ।
                   *– गौतम बुद्ध*

.... इंसान के अंदर ही शांति का वास होता है, उसे बाहर ना तलाशें ।
                  *– गौतम बुद्ध*

.... आपको क्रोधित होने के लिए दंड नहीं दिया जायेगा, बल्कि आपका क्रोध खुद आपको दंड देगा ।
                  *– गौतम बुद्ध*

.... हजारों लड़ाइयाँ जितने से बेहतर है कि आप खुद को जीत लें, फिर वो जीत आपकी होगी जिसे कोई आपसे नहीं छीन सकता ना कोई स्वर्गदूत और ना कोई राक्षस ।
                  *– गौतम बुद्ध*

.... जिस तरह एक मोमबत्ती बिना आग के खुद नहीं जल सकती उसी तरह एक इंसान बिना आध्यात्मिक जीवन के जीवित नहीं रह सकता ।
                 *– गौतम बुद्ध*

.... निष्क्रिय होना मृत्यु का एक छोटा रास्ता है, मेहनती होना अच्छे जीवन का रास्ता है, मूर्ख लोग निष्क्रिय होते हैं और बुद्धिमान लोग मेहनती ।
                   *– गौतम बुद्ध*

.... हम जो बोलते हैं अपने शब्दों को देखभाल के चुनना चाहिए कि सुनने वाले पे उसका क्या प्रभाव पड़ेगा,
अच्छा या बुरा ।
                  *– गौतम बुद्ध*

.... आपको जो कुछ मिला है उस पर घमंड ना करो और ना ही दूसरों से ईर्ष्या करो, घमंड और ईर्ष्या करनेवाले लोगों को कभी मन की शांति नहीं मिलती ।
                   *– गौतम बुद्ध*

.... अपनी स्वयं की क्षमता से काम करो, दूसरों निर्भर मत रहो ।
                *– गौतम बुद्ध*

..... असल जीवन की सबसे बड़ी विफलता है हमारा असत्यवादी होना ।
                *–  गौतम बुद्ध.*

Thanks Gujarati

जागो GST पे रोने वाँलों
पढ़ो ये दाँस्ता

💥68 साल पहले- एक गुजराती ने देश को"अंग्रेजों"से,"मुक्त"किया था !!

💥अब 68 साल बाद,एक गुजराती ने,देश को"कांग्रेस"से,"मुक्त"किया है !!

💥पहले वाला-गुजराती 'नोटो' पर छा गया !!!

💥अभी वाला-गुजराती 'वोटों' पर छा गया !!

💥 ऐ दोस्त - खिडकिया खोल के देखने दे,मुझे ..?????

💥मेरे वतन की,"नई तस्वीर"बन रही है !!!

🌻आज,भारत- फिरसे"आजाद" हुआ !!

💥➖पहले - "इग्लेड की रानी"से !!!

💥 और आज :--💥

💥➖" इटली की नौकरानी से " !!!

💥➖जो,पढ़ सके न खुद, किताब मांग रहे हैं ???

💥➖खुद, रख न पाए, वो हिसाब मांग रहे हैं ????

💥➖जो, कर सके न साठ साल में- कोई विकास देश का, वो 2 साल में जवाब मांग रहे हैं ????

💥➖आज - गधे गुलाब मांग रहे हैं?? चोर लुटेरे इन्साफ मांग रहे हैं??

💥➖जो Loot te रहे देश को,60 सालों तक ???

   💥सुना है,आज वो- 3.5 साल का हिसाब मांग रहे हैं??

💥 वर्षों बाद - एक नेता को,माँ गंगा की आरती करते देखा है !!

💥वरना - अब तक, एक परिवार की समाधियों पर,"फूल चढ़ते"देखा है।!!

💥वर्षों बाद - एक नेता को,अपनी"मातृभाषा"में बोलते देखा है ।!

💥वरना - अब तक,रटी रटाई "अंग्रेजी"बोलते देखा है।!

💥 ➖अब तक -एक परिवार की मूर्तियां बनते देखा है।!

💥वर्षों बाद-: एक नेता को,"संसद की माटी चूमते"देखा है !!

💥वरना- अब तक,"इटैलियन सैंडिल"चाटते देखा है।!

💥वर्षों बाद - एक नेता को,"देश के लिए रोते"देखा है !!

💥वरना - अब तक,"मेरे पति को मार दिया"कह कर,वोटों की भीख मांगते देखा है।!

💥➖पाकिस्तान को घबराते देखा है !!

💥➖अमेरिका को झुकते देखा है।

💥इतने वर्षों बाद-भारत माँ को, खुलकर"मुस्कुराते"देखा है।

{◆π◆}

                    *Ⓜ कर्म - भोग Ⓜ*

Ⓜ  पूर्व जन्मों के कर्मों से ही हमें इस जन्म में माता - पिता , भाई - बहन , पति - पत्नि , प्रेमी - प्रेमिका , मित्र - शत्रु , सगे - सम्बन्धी इत्यादि संसार के जितने भी रिश्ते नाते हैं , सब मिलते हैं । क्योंकि इन सबको हमें या तो कुछ देना होता है या इनसे कुछ लेना होता है ।

    Ⓜ    *सन्तान के रुप में कौन आता है ?*

Ⓜ  वेसे ही सन्तान के रुप में हमारा कोई पूर्वजन्म का 'सम्बन्धी' ही आकर जन्म लेता है । जिसे शास्त्रों में चार प्रकार से बताया गया है --

Ⓜ  *ऋणानुबन्ध  :-* पूर्व जन्म का कोई ऐसा जीव जिससे आपने ऋण लिया हो या उसका किसी भी प्रकार से धन नष्ट किया हो , वह आपके घर में सन्तान बनकर जन्म लेगा और आपका धन बीमारी में या व्यर्थ के कार्यों में तब तक नष्ट करेगा , जब तक उसका हिसाब पूरा ना हो जाये ।

Ⓜ  *शत्रु पुत्र  :-* पूर्व जन्म का कोई दुश्मन आपसे बदला लेने के लिये आपके घर में सन्तान बनकर आयेगा और बड़ा होने पर माता - पिता से मारपीट , झगड़ा या उन्हें सारी जिन्दगी किसी भी प्रकार से सताता ही रहेगा । हमेशा कड़वा बोलकर उनकी बेइज्जती करेगा व उन्हें दुःखी रखकर खुश होगा ।

Ⓜ  *उदासीन पुत्र  :-* इस प्रकार की सन्तान ना तो माता - पिता की सेवा करती है और ना ही कोई सुख देती है । बस , उनको उनके हाल पर मरने के लिए छोड़ देती है । विवाह होने पर यह माता - पिता से अलग हो जाते हैं ।

Ⓜ  *सेवक पुत्र  :-* पूर्व जन्म में यदि आपने किसी की खूब सेवा की है तो वह अपनी की हुई सेवा का ऋण उतारने के लिए आपका पुत्र या पुत्री बनकर आता है और आपकी सेवा करता है । जो  बोया है , वही तो काटोगे । अपने माँ - बाप की सेवा की है तो ही आपकी औलाद बुढ़ापे में आपकी सेवा करेगी , वर्ना कोई पानी पिलाने वाला भी पास नहीं होगा ।

Ⓜ  आप यह ना समझें कि यह सब बातें केवल मनुष्य पर ही लागू होती हैं । इन चार प्रकार में कोई सा भी जीव आ सकता है । जैसे आपने किसी गाय कि निःस्वार्थ भाव से सेवा की है तो वह भी पुत्र या पुत्री बनकर आ सकती है । यदि आपने गाय को स्वार्थ वश पालकर उसको दूध देना बन्द करने के पश्चात घर से निकाल दिया तो वह ऋणानुबन्ध पुत्र या पुत्री बनकर जन्म लेगी । यदि आपने किसी निरपराध जीव को सताया है तो वह आपके जीवन में शत्रु बनकर आयेगा और आपसे बदला लेगा ।

Ⓜ  इसलिये जीवन में कभी किसी का बुरा ना करें । क्योंकि प्रकृति का नियम है कि आप जो भी करोगे , उसे वह आपको इस जन्म में या अगले जन्म में सौ गुना वापिस करके देगी । यदि आपने किसी को एक रुपया दिया है तो समझो आपके खाते में सौ रुपये जमा हो गये हैं । यदि आपने किसी का एक रुपया छीना है तो समझो आपकी जमा राशि से सौ रुपये निकल गये ।

Ⓜ  ज़रा सोचिये , "आप कौन सा धन साथ लेकर आये थे और कितना साथ लेकर जाओगे ? जो चले गये , वो कितना सोना - चाँदी साथ ले गये ? मरने पर जो सोना - चाँदी , धन - दौलत बैंक में पड़ा रह गया , समझो वो व्यर्थ ही कमाया । औलाद अगर अच्छी और लायक है तो उसके लिए कुछ भी छोड़कर जाने की जरुरत नहीं है , खुद ही खा - कमा लेगी और औलाद अगर बिगड़ी या नालायक है तो उसके लिए जितना मर्ज़ी धन छोड़कर जाओ , वह चंद दिनों में सब बरबाद करके ही चैन लेगी ।"

Ⓜ  मैं , मेरा , तेरा और सारा धन यहीं का यहीं धरा रह जायेगा , कुछ भी साथ नहीं जायेगा । साथ यदि कुछ जायेगा भी तो सिर्फ *नेकियाँ* ही साथ जायेंगी । इसलिए जितना हो सके *नेकी* करो *सतकर्म* करो ।

                     *📙 श्रीमद्भभगवतगीता।*

मैं भारत का नागरिक हूँ,*
*_मुझे लड्डू दोनों हाथ चाहिये।*
*-बिजली मैं बचाऊँगा नहीं,*
*_बिल मुझे माफ़ चाहिये ।*
*-पेड़ मैं लगाऊँगा नहीं,*
*_मौसम मुझको साफ़ चाहिये।*
*-शिकायत मैं करूँगा नहीं,*
*_कार्रवाई तुरंत चाहिये ।*
*-बिना लिए कुछ काम न करूँ,*
*_पर भ्रष्टाचार का अंत चाहिये ।*
*-घर-बाहर कूड़ा फेकूं,*
*_शहर मुझे साफ चाहिये ।*
*-काम करूँ न धेले भर का,*
*_वेतन लल्लनटाॅप चाहिये ।*
*-एक नेता कुछ बोल गया सो*
*_मुफ्त में पंद्रह लाख चाहिये।*
*-लाचारों वाले लाभ उठायें,*
*_फिर भी ऊँची साख चाहिये।*
*-लोन मिले बिल्कुल सस्ता,*
*_बचत पर ब्याज बढ़ा चाहिये।*
*-धर्म के नाम रेवडियां खाएँ,*
*_पर देश धर्मनिरपेक्ष चाहिये।*
*-जाती के नाम पर वोट दे,*
*_अपराध मुक्त राज्य चाहिए।*
*-टैक्स न मैं दूं धेलेभर का,*
*-विकास मे पूरी रफ्तार चाहिए ।*
*-मैं भारत का नागरिक हूँ ,*
*_मुझे लड्डू दोनों हाथ चाहिए।*

Mahatma Buddhist

एक आदमी ने भगवान बुद्ध  से पुछा : जीवन का मूल्य क्या है?

बुद्ध  ने उसे एक पत्थर दिया
और कहा : जा और इस पत्थर का
मूल्य पता करके आ , लेकिन ध्यान
रखना पत्थर को बेचना नही है I

वह आदमी पत्थर को बाजार मे एक संतरे वाले के पास लेकर गया और बोला : इसकी कीमत क्या है?

संतरे वाला चमकीले  पत्थर को देख
कर बोला, "12 संतरे लेजा और इसे
मुझे दे जा"

आगे एक सब्जी वाले ने उस चमकीले पत्थर को देखा और कहा
"एक बोरी आलू ले जा और
इस पत्थर को मेरे पास छोड़ जा"

आगे एक सोना बेचने वाले के
पास गया उसे  पत्थर दिखाया सुनार
उस चमकीले पत्थर को देखकर बोला,  "50 लाख मे बेच दे" l

उसने मना कर दिया तो सुनार बोला "2 करोड़ मे दे दे या बता इसकी कीमत जो माँगेगा वह दूँगा तुझे..

उस आदमी ने सुनार से कहा मेरे गुरू
ने इसे बेचने से मना किया है l

आगे हीरे बेचने वाले एक जौहरी के पास गया उसे पत्थर दिखाया l

जौहरी ने जब उस बेशकीमती रुबी को देखा , तो पहले उसने रुबी के पास एक लाल कपडा बिछाया फिर उस बेशकीमती रुबी की परिक्रमा लगाई माथा टेका l

फिर जौहरी बोला , "कहा से लाया है ये बेशकीमती रुबी? सारी कायनात , सारी दुनिया को बेचकर भी इसकी कीमत नही लगाई जा सकती
ये तो बेसकीमती है l"

वह आदमी हैरान परेशान होकर सीधे बुद्ध  के पास आया l

अपनी आप बिती बताई और बोला
"अब बताओ भगवान ,
मानवीय जीवन का मूल्य क्या है?

बुद्ध  बोले :

संतरे वाले को दिखाया उसने इसकी कीमत "12 संतरे" की बताई l

सब्जी वाले के पास गया उसने
इसकी कीमत "1 बोरी आलू" बताई l

आगे सुनार ने "2 करोड़" बताई l
और
जौहरी ने इसे "बेशकीमती" बताया l

अब ऐसा ही मानवीय मूल्य का भी है l

तू बेशक हीरा है..!!
लेकिन,
सामने वाला तेरी कीमत,
अपनी औकात - अपनी जानकारी -  अपनी हैसियत से लगाएगा।

घबराओ मत दुनिया में..
तुझे पहचानने वाले भी मिल जायेगे।

Hearts

*⭕  हृदय परिवर्तन  ⭕*
🕉🌺🕉🌺🕉🌺🕉🌺
♦ एक राजा को राज भोगते हुए काफी समय हो गया था । बाल भी सफ़ेद होने लगे थे । एक दिन उसने अपने दरबार में एक उत्सव रखा और अपने गुरुदेव एवं मित्र देश के राजाओं को भी सादर आमन्त्रित किया । उत्सव को रोचक बनाने के लिए राज्य की सुप्रसिद्ध नर्तकी को भी बुलाया गया ।
♦ राजा ने कुछ स्वर्ण मुद्रायें अपने गुरु जी को भी दीं, ताकि यदि वे चाहें तो नर्तकी के अच्छे गीत व नृत्य पर वे उसे पुरस्कृत कर सकें । सारी रात नृत्य चलता रहा । ब्रह्म मुहूर्त की बेला आयी । नर्तकी ने देखा कि मेरा तबले वाला ऊँघ रहा है, उसको जगाने के लिए नर्तकी ने एक दोहा पढ़ा -
*"बहुत बीती, थोड़ी रही, पल पल गयी बिताय।*
*एक पल के कारने, क्यों कलंक लग जाय ।"*
♦ अब इस दोहे का अलग-अलग व्यक्तियों ने अपने अनुरुप अलग-अलग अर्थ निकाला । तबले वाला सतर्क होकर बजाने लगा ।
♦ जब यह बात गुरु जी ने सुनी तो  उन्होंने सारी मोहरें उस नर्तकी के सामने फैंक दीं ।
♦ वही दोहा नर्तकी ने फिर पढ़ा तो राजा की लड़की ने अपना नवलखा हार नर्तकी को भेंट कर दिया ।
♦ उसने फिर वही दोहा दोहराया तो राजा के पुत्र युवराज ने अपना मुकट उतारकर नर्तकी को समर्पित कर दिया ।
♦ नर्तकी फिर वही दोहा दोहराने लगी तो राजा ने कहा - "बस कर, एक दोहे से तुमने वैश्या होकर भी सबको लूट लिया है ।"
♦ जब यह बात राजा के गुरु ने सुनी तो गुरु के नेत्रों में आँसू आ गए और गुरु जी कहने लगे - "राजा ! इसको तू वैश्या मत कह, ये तो अब मेरी गुरु बन गयी है । इसने मेरी आँखें खोल दी हैं । यह कह रही है कि मैं सारी उम्र संयमपूर्वक भक्ति करता रहा और आखिरी समय में नर्तकी का मुज़रा देखकर अपनी साधना नष्ट करने यहाँ चला आया हूँ, भाई ! मैं तो चला ।" यह कहकर गुरु जी तो अपना कमण्डल उठाकर जंगल की ओर चल पड़े ।
♦ राजा की लड़की ने कहा - "पिता जी ! मैं जवान हो गयी हूँ । आप आँखें बन्द किए बैठे हैं, मेरी शादी नहीं कर रहे थे और आज रात मैंने आपके महावत के साथ भागकर अपना जीवन बर्बाद कर लेना था । लेकिन इस नर्तकी ने मुझे सुमति दी है कि जल्दबाजी मत कर कभी तो तेरी शादी होगी ही । क्यों अपने पिता को कलंकित करने पर तुली है ?"
♦ युवराज ने कहा - "पिता जी ! आप वृद्ध हो चले हैं, फिर भी मुझे राज नहीं दे रहे थे । मैंने आज रात ही आपके सिपाहियों से मिलकर आपका कत्ल करवा देना था । लेकिन इस नर्तकी ने समझाया कि पगले ! आज नहीं तो कल आखिर राज तो तुम्हें ही मिलना है, क्यों अपने पिता के खून का कलंक अपने सिर पर लेता है । धैर्य रख ।"
♦ जब ये सब बातें राजा ने सुनी तो राजा को भी आत्म ज्ञान हो गया । राजा के मन में वैराग्य आ गया । राजा ने तुरन्त फैसला लिया - "क्यों न मैं अभी युवराज का राजतिलक कर दूँ ।" फिर क्या था, उसी समय राजा ने युवराज का राजतिलक किया और अपनी पुत्री को कहा - "पुत्री ! दरबार में एक से एक राजकुमार आये हुए हैं । तुम अपनी इच्छा से किसी भी राजकुमार के गले में वरमाला डालकर पति रुप में चुन सकती हो ।" राजकुमारी ने ऐसा ही किया और राजा सब त्याग कर जंगल में गुरु की शरण में चला गया ।
♦ यह सब देखकर नर्तकी ने सोचा - "मेरे एक दोहे से इतने लोग सुधर गए, लेकिन मैं क्यूँ नहीं सुधर पायी ?" उसी समय नर्तकी में भी वैराग्य आ गया । उसने उसी समय निर्णय लिया कि आज से मैं अपना बुरा धंधा बन्द करती हूँ और कहा कि "हे प्रभु ! मेरे पापों से मुझे क्षमा करना । बस, आज से मैं सिर्फ तेरा नाम सुमिरन करुँगी ।"
♦ समझ आने की बात है, दुनिया बदलते देर नहीं लगती । एक दोहे की दो लाईनों से भी हृदय परिवर्तन हो सकता है । बस, केवल थोड़ा धैर्य रखकर चिन्तन करने की आवश्यकता है
♦ प्रशंसा से पिघलना नहीं चाहिए, आलोचना से उबलना नहीं चाहिए । नि:स्वार्थ भाव से कर्म करते रहें । क्योंकि इस धरा का, इस धरा पर, सब धरा रह जायेगा।
🙏 *ऊँ नमः शिवाय*🌞☁
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Sawdan

सावधान÷ शादी-विवाह का सीजन शुरू होने वाला है जिन लोगों के यहाँ शादी आने वाली है ये उन लोगों के लिए चेतावनी है आप शादी किसी भी स्थान चाहे वो होटल हो लॉज हो या वाटिका हो अथवा धर्मशाला हो आपको सबसे पहले वहाँ देखना चाहिए की cctv कैमरे की व्यवस्था है की नही यदि है तो कैमरे चालू है की नही क्योंकि कुछ असामाजिक तत्व शादी समारोह मे चोरी करने की नियत से घुस जाते है खासकर जब बारात दरवाजे पर आ रही होती है उस समय स्वागत करने हेतु अफरा-तफरी का माहौल बन जाता है उसी समय कुछ जेबकतरे मौके का फायदा उठाकर मोबाइल,पर्स,चेन,गहने इत्यादि पार करने की फिराक मे रहते है आप नाच/गाने मे इतने मगरूर होते है की आप कुछ समय के लिए मस्ती मे डूब जाते है ये लोग खासकर सुरा प्रेमीयों को अपना शिकार आसानी से बना लेते है बदमाश मौके को ताड़ते रहते है मौका मिलते ही ये बदमाश अपने हाथ की सफाई दिखाकर घटना स्थल से गायब हो जाते है और आप इन्हें ढूंढते रह जाते है इसलिए जिस वक्त बारात दरवाजे पर खड़ी हो उस समय आपको बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि महिलाएं जेवर से लदी रहती है और डांस करने मे व्यस्त रहती है ये जेबकट निगाह गड़ा कर तफ़्तीश करते रहते है कभी-कभी रास्ते मे भी डांस करते समय ज्वेलरी गिरने का डर रहता है इसलिए शादी मे एन्जॉय करिये पूरे होश के साथ.... इसके अलावा कई बार छोटे बच्चे चढाये के जेवर और नगदी का बैग किसके हाथ मे है उस पर भी निगाह रखते है आपके कपड़ो पर कुछ ऐसा डाल देते है जिससे आपको बैग इधर/उधर रखकर कपड़े साफ करना पड़ जाये और ये आपका बेग ही उड़ाकर चम्पत हो जाते है इस तरह की घटना पूर्व मे कई लोगोँ के साथ घटित हो चुकी है इसलिए आपको पहले से ही आगाह किया जाना हमने उचित समझा है। #सावधानी हटी-दुर्घटना घटी#