गुरुवार, 14 अक्टूबर 2021
वो जिनका कलेजा दिल्ली में 3 दिन के अंदर छह हजार सिक्खों के मारे जाने पर नहीं फटा !!! वो जिनका कलेजा लाखों कश्मीरी पण्डितों के कत्लेआम पर नहीं फटा !! वो जिनका कलेजा अयोध्या में कारसेवकों के कत्लेआम पर भी नहीँ फटा !!!!!वो जिनका कलेजा गोधरा में 59 रामसेवकों के जिन्दा जलाए जाने पर नहीं फटा!!!!!वो जिनका कलेजा सैनिकों, पुलिसकर्मीयों,संतों की हत्या पर नहीं फटा!!!! क्या क्या लिखें...???? मेसेज लम्बा हो जाएगा।। उनका कलेजा चार किसानों की मौत पर क्या फटेगा? ये गिद्ध सिर्फ वोटों की खेती करने निकले हैं सावधान।
ग्रुप_में_पोस्ट_डालने_वालों_के_लिये_महत्वपुर्ण_जानकारीयाँ
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एक बनिये की बाजार में छोटी सी मगर बहुत पुरानी दुकान थी।
💁एक बनिये की बाजार में छोटी सी मगर बहुत पुरानी दुकान थी।
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ऊसकी दुकान के बगल में एक बिल्ली बैठी एक पुराने गंदे कटोरे में दूध पी रही थी।
एक बहुत बड़ा कला पारखी बनिये की दुकान के सामने से गुजरा।
कला पारखी होने के कारण जान गया कि कटोरा एक एंटीक आइटम है और कला के बाजार में बढ़िया कीमत में बिकेगा।
लेकिन वह ये नहीं चाहता था कि बनिये को इस बात का पता लगे कि उनके पास मौजूद वह गंदा सा पुराना कटोरा इतना कीमती है।
उसने दिमाग लगाया और बनिये से बोला,--- 'लाला जी, नमस्ते, आप की बिल्ली बहुत प्यारी है, मुझे पसंद आ गई है।
क्या आप बिल्ली मुझे देंगे? चाहे जो कीमत ले लीजिए।'
बनिये ने पहले तो इनकार किया मगर जब कलापारखी कीमत बढ़ाते-बढ़ाते दस हजार रुपयों तक पहुंच गया तो लाला जी बिल्ली बेचने को राजी हो गए और दाम चुकाकर कला पारखी बिल्ली लेकर जाने लगा।
अचानक वह रुका और पलटकर लाला जी से बोला--- "लाला जी बिल्ली तो आपने बेच दी। अब इस पुराने कटोरे का आप क्या करोगे?
इसे भी मुझे ही दे दीजिए। बिल्ली को दूध पिलाने के काम आएगा।
चाहे तो इसके भी 100-50 रुपए ले लीजिए।'
कहानी में
बनिये ने जवाब दिया, "नहीं साहब, कटोरा तो मैं किसी कीमत पर नहीं बेचूंगा,
क्योंकि इसी #कटोरे की वजह से आज तक मैं 50 बिल्लियां बेच चुका हूं।'
प्लास्टिक की बॉटल में पानी का उपयोग ना करे विशेषकर से गर्म चाय-कॉफी प्लास्टिक कप में ना पिये!*
*एक 36 वर्षीय भाई को केन्सर हुआ था जो लास्ट स्टेज पर था! अपनी अब तक की उम्र में इन्होने ना तो कभी गुटका, ना ही सिगरेट और नही पान व शराब का सेवन किया था, समय पर काम पर जाना, परिवार के साथ खुश रहना, उसका जीवन था, ना कोई बीमारी थी ना ही कोई चिन्ता!*
*सिर्फ 2/3 दिन से पेट में दर्द शुरू होने के कारण डॉ. से सम्पर्क कर इलाज शुरू किया, परन्तु कोई फायदा ना होने के कारण बड़े डॉ. से मिले, वहां के डॉ. ने उनकी सभी रिपोर्ट निकलवाई तो पता चला कि पेट के आंतड़ियों में केन्सर हुआ है!*
*डॉ. द्वारा इलाज की शुरूआत हुई, इलाज दरम्यान पूरी जमा पूंजी के साथ घर -बार बिक गया, परन्तु परिणाम स्वरूप उनकी मौत ही हुई! डॉ. ने परिवार से इनका अग्नि संस्कार ना कर, मानव सेवार्थ बोडी पर रिर्सच करने हेतु हॉस्पीटल में डोनेट करने की सलाह दी, परिवार में आपसी मंथने के बाद बोडी को हॉस्पीटल में रिर्सच करने हेतु, डोनेट करने का निर्णय लेते हुए बोडी को हॉस्पीटल में डोनेट की!*
*रिर्सच के बाद पता चला कि प्लास्टिक में गरम खाना प्लास्टिक की बॉटल में पानी पीने से, उसमें से निकलने वाले केमिकल के कारण इन्हें केन्सर हुआ था, तब डॉ. द्वारा परिवार व साथियों से सम्पर्क कर उनके खान-पान के बारे में जांच की तो इस जांच से पता चला कि उन्हें चाय पीने की आदत थी! वे दिन में पाँच से छ: कप चाय पीते थे ! तब यह भी पता चला कि जहाँ से चाय पीते थे वहाँ प्लास्टिक की थैली मे चाय आती थी और प्लास्टिक के कप में चाय दी जाती है !*
*अक्सर देखा गया है लोग प्लास्टिक की थैलियो मे दुकान से गरम चाय गरम सब्जी या अन्य समान मंगवाने है वो ही खा लेते है या पी लेते है वो ही धीरे धीरे आपके शरीर मे केन्सर बनाता है*
*तब डॉ. द्वारा उनके साथ काम करने वाले साथियों का भी मेडिकल टेस्ट कराया तो पता चला कि उसके कई साथियों को केन्सर का असर है, तब डॉ. ने उन्हें केन्सर के इलाज की सलाह दी गई !*
*हम सोचते है कि सरकार इतनी खराब, जो स्वास्थ्य के साथ ही साथ, पर्यावरण के लिए भी खतरनाक ही नही घातक है, उसके निर्माण करने की इजाजत कैसे दे देती है!*
*जहर बनाने की इजाजत के साथ, सरकार प्लास्टिक का उपयोग ना करने के प्रचार पर भी करोडों रू. खर्च कर हमें समझाती है, परन्तु हम भी कहाँ समझते है, हम स्वंय भी तो अपना व अपने चाहने वालों को मौत की ओर ढकेलना का कार्य निर्भीक होकर कर रहे है, ना अपनी और ना ही परिवार की हमें चिन्ता है, बस मौत के गले लगाने के लिए फैशन की अंधी दौड में भाग रहे है !*
*अत: आप सभी से पुन: नम्र निवेदन करता हूँ कि प्लास्टिक का उपयोग कम से कम करें, जहाँ तक हो सके वहाँ तक प्लास्टिक बर्तन में गरम खाना ना खायें, प्लास्टिक की बॉटल में पानी का उपयोग ना करे विशेषकर से गर्म चाय-कॉफी प्लास्टिक कप में ना पिये!*
*
महिमा भारी तिलक की
*महिमा भारी तिलक की, को कर सके बखान ।*
*आप तिलक को मानिये, श्री विष्णू भगवान ॥*
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जिसके माथे पर तिलक की होती है छाप ।
भूत प्रेत ही दूर से, भग जाते चुपचाप ॥
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माथे की शोभा तिलक, तिलक हमारी शान ।
बिना तिलक माथा लगे, बिल्कुल ही सुनसान ॥
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तिलक करे परिवार को, शक्ति शांति प्रदान ।
आप लगाकर देखिये, हो जाये कल्याण ॥
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तन मन को शीतल करे, ये चंदन की छाप ।
कट जाते है लगाते, जन्म जन्म के पाप ॥
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तिलक लगाने से मिले, बुद्धि ज्ञान सम्मान ।
तिलक हमारे धर्म की, होती है पहचान ॥
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वैष्णव जन के तिलक में, विष्णु लक्ष्मी निवास ।
इसीलिये इस तिलक की, महिमा सबसे खास ॥
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बिना तिलक होता नहीं, कोई पूजा पाठ ।
तिलक लगायें आप सब, सदा रहेंगा ठाठ ॥
मंगलवार, 12 अक्टूबर 2021
*मैं न होता, तो क्या होता
*सुंदरकांड में एक प्रसंग अवश्य पढ़ें !*
*“मैं न होता, तो क्या होता?”*
“अशोक वाटिका" में *जिस समय रावण क्रोध में भरकर, तलवार लेकर, सीता माँ को मारने के लिए दौड़ पड़ा* तब हनुमान जी को लगा, कि इसकी तलवार छीन कर, इसका सर काट लेना चाहिये !
किन्तु अगले ही क्षण, उन्होंने देखा कि
*"मंदोदरी" ने रावण का हाथ पकड़ लिया !* यह देखकर वे गदगद हो गये ! वे सोचने लगे, यदि मैं आगे बड़ता तो मुझे भ्रम हो जाता कि *यदि मैं न होता, तो सीता जी को कौन बचाता ?*
बहुधा हमें भी ऐसा ही भ्रम हो जाता है, मैं न होता, तो क्या होता ?
परन्तु ये क्या हुआ ? सीताजी को बचाने का कार्य प्रभु ने रावण की पत्नी को ही सौंप दिया ! तब हनुमान जी समझ गये, *कि प्रभु जिससे जो कार्य लेना चाहते हैं, वह उसी से लेते हैं !*
आगे चलकर जब "त्रिजटा" ने कहा कि "लंका में बंदर आया हुआ है, और वह लंका जलायेगा !" तो हनुमान जी बड़ी चिंता मे पड़ गये, कि प्रभु ने तो लंका जलाने के लिए कहा ही नहीं है I *और त्रिजटा कह रही है कि उन्होंने स्वप्न में देखा है, एक वानर ने लंका जलाई है ! अब उन्हें क्या करना चाहिए ? जो प्रभु इच्छा !*
जब रावण के सैनिक तलवार लेकर हनुमान जी को मारने के लिये दौड़े, तो हनुमान जी ने अपने को बचाने की तनिक भी चेष्टा नहीं की, और जब "विभीषण" ने आकर कहा कि दूत को मारना अनीति है, तो *हनुमान जी समझ गये कि मुझे बचाने के लिये प्रभु ने यह उपाय कर दिया है !*
आश्चर्य की पराकाष्ठा तो तब हुई, जब रावण ने कहा कि बंदर को मारा नहीं जायेगा, पर पूंछ में कपड़ा लपेट कर, घी डालकर, आग लगाई जाये, तो हनुमान जी सोचने लगे कि लंका वाली त्रिजटा की बात सच थी, वरना लंका को जलाने के लिए मैं कहां से घी, तेल, कपड़ा लाता, और कहां आग ढूंढता ? पर वह प्रबन्ध भी आपने रावण से करा दिया ! जब आप रावण से भी अपना काम करा लेते हैं, तो *मुझसे करा लेने में आश्चर्य की क्या बात है !*
इसलिये *सदैव याद रखें,* कि *संसार में जो हो रहा है, वह सब ईश्वरीय विधान है ! * हम और आप तो केवल निमित्त मात्र हैं ! इसीलिये *कभी भी ये भ्रम न पालें* कि...
*मैं न होता, तो क्या होता ?*
*ना मैं श्रेष्ठ हूँ,*
*ना ही मैं ख़ास हूँ,*
*मैं तो बस एक छोटा सा भगवान का दास हूँ ॥*
कलियुगी रात्रि कहांनी* युधिष्ठर को पूर्ण आभास था कि कलयुग में क्या होगा ?पूरा अवश्य पढें।अच्छा लगेगा यह तय
♦️♦️♦️ *कलियुगी रात्रि कहांनी*♦️♦️♦️
युधिष्ठर को पूर्ण आभास था
कि कलयुग में क्या होगा ?
पूरा अवश्य पढें।
अच्छा लगेगा यह तय🏵️
पाण्डवों का अज्ञातवाश समाप्त होने में कुछ समय शेष रह गया था।
पाँचो पाण्डव एवं द्रोपदी जंगल मे छुपने का स्थान
ढूंढ रहे थे।
उधर शनिदेव की आकाश मंडल से पाण्डवों पर नजर पड़ी शनिदेव के मन विचार आया कि इन 5 में बुद्धिमान कौन है परीक्षा ली जाय।
शनिदेव ने एक माया का महल बनाया कई योजन दूरी में उस महल के चार कोने थे, पूरब, पश्चिम, उतर, दक्षिण।
अचानक भीम की नजर महल पर पड़ी
और वो आकर्षित हो गया ,
भीम, यधिष्ठिर से बोला- भैया मुझे महल देखना है भाई ने कहा जाओ ।
भीम महल के द्वार पर पहुंचा वहाँ शनिदेव दरबान के रूप में खड़े थे,
भीम बोला- मुझे महल देखना है!
शनिदेव ने कहा- महल की कुछ शर्त है ।
1- शर्त महल में चार कोने हैं आप एक ही कोना देख सकते हैं।
2-शर्त महल में जो देखोगे उसकी सार सहित व्याख्या करोगे।
3-शर्त अगर व्याख्या नहीं कर सके तो कैद कर लिए जाओगे।
भीम ने कहा- मैं स्वीकार करता हूँ ऐसा ही होगा ।
और वह महल के पूर्व छोर की ओर गया ।
वहां जाकर उसने अद्भूत पशु पक्षी और फूलों एवं फलों से लदे वृक्षों का नजारा देखा,
आगे जाकर देखता है कि तीन कुंए है अगल-बगल में छोटे कुंए और बीच में एक बडा कुआ।
बीच वाला बड़े कुंए में पानी का उफान आता है और दोनों छोटे खाली कुओं को पानी से भर देता है। फिर कुछ देर बाद दोनों छोटे कुओं में उफान आता है तो खाली पड़े बड़े कुंए का पानी आधा रह जाता है इस क्रिया को भीम कई बार देखता है पर समझ नहीं पाता और लौटकर दरबान के पास आता है।
दरबान - क्या देखा आपने ?
भीम- महाशय मैंने पेड़ पौधे पशु पक्षी देखा वो मैंने पहले कभी नहीं देखा था जो अजीब थे। एक बात समझ में नहीं आई छोटे कुंए पानी से भर जाते हैं बड़ा क्यों नहीं भर पाता ये समझ में नहीं आया।
दरबान बोला आप शर्त के अनुसार बंदी हो गये हैं और बंदी घर में बैठा दिया।
अर्जुन आया बोला- मुझे महल देखना है, दरबान ने शर्त बता दी और अर्जुन पश्चिम वाले छोर की तरफ चला गया।
आगे जाकर अर्जुन क्या देखता है। एक खेत में दो फसल उग रही थी एक तरफ बाजरे की फसल दूसरी तरफ मक्का की फसल ।
बाजरे के पौधे से मक्का निकल रही तथा
मक्का के पौधे से बाजरी निकल रही । अजीब लगा कुछ समझ नहीं आया वापिस द्वार पर आ गया।
दरबान ने पूछा क्या देखा,
अर्जुन बोला महाशय सब कुछ देखा पर बाजरा और मक्का की बात समझ में नहीं आई।
शनिदेव ने कहा शर्त के अनुसार आप बंदी हैं ।
नकुल आया बोला
मुझे महल देखना है ।
फिर वह उत्तर दिशा की और गया वहाँ उसने देखा कि बहुत सारी सफेद गायें जब उनको भूख लगती है तो अपनी छोटी बछियों का दूध पीती है उसे कुछ समझ नहीं आया द्वार पर आया ।
शनिदेव ने पूछा क्या देखा ?
नकुल बोला महाशय गाय बछियों का दूध पीती है यह समझ नहीं आया तब उसे भी बंदी बना लिया।
सहदेव आया बोला मुझे महल देखना है और वह दक्षिण दिशा की और गया अंतिम कोना देखने के लिए क्या देखता है वहां पर एक सोने की बड़ी शिला एक चांदी के सिक्के पर टिकी हुई डगमग डोले पर गिरे नहीं छूने पर भी वैसे ही रहती है समझ नहीं आया वह वापिस द्वार पर आ गया और बोला सोने की शिला की बात समझ में नहीं आई तब वह भी बंदी हो गया।
चारों भाई बहुत देर से नहीं आये तब युधिष्ठिर को चिंता हुई वह भी द्रोपदी सहित महल में गये।
भाइयों के लिए पूछा तब दरबान ने बताया वो शर्त अनुसार बंदी है।
युधिष्ठिर बोला भीम तुमने क्या देखा ?
भीम ने कुंऐ के बारे में बताया
तब युधिष्ठिर ने कहा- यह कलियुग में होने वाला है एक बाप दो बेटों का पेट तो भर देगा परन्तु दो बेटे मिलकर एक बाप का पेट नहीं भर पायेंगे।
भीम को छोड़ दिया।
अर्जुन से पुछा तुमने क्या देखा ??
उसने फसल के
बारे में बताया
युधिष्ठिर ने कहा- यह भी कलियुग में होने वाला है।
वंश परिवर्तन अर्थात ब्राह्मण के घर शूद्र की लड़की और शूद्र के घर बनिए की लड़की ब्याही जायेंगी।
अर्जुन भी छूट गया।
नकुल से पूछा तुमने क्या देखा तब उसने गाय का वृतान्त बताया ।
तब युधिष्ठिर ने कहा- कलियुग में माताऐं अपनी बेटियों के घर में पलेंगी बेटी का दाना खायेंगी और बेटे सेवा नहीं करेंगे ।
तब नकुल भी छूट गया।
सहदेव से पूछा तुमने क्या देखा, उसने सोने की शिला का वृतांत बताया,
तब युधिष्ठिर बोले- कलियुग में पाप धर्म को दबाता रहेगा परन्तु धर्म फिर भी जिंदा रहेगा खत्म नहीं होगा।। आज के कलयुग में यह
सारी बातें सच
साबित हो रही है ।।
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