सोमवार, 18 अक्टूबर 2021

केदारनाथ को क्यों कहते हैं ‘जागृत महादेव’ ?,


*" केदारनाथ को क्यों कहते हैं ‘जागृत महादेव’ ?, दो मिनट की ये कहानी रौंगटे खड़े कर देगी "*
*एक बार एक शिव-भक्त अपने गांव से केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकला। पहले यातायात की सुविधाएँ तो थी नहीं, वह पैदल ही निकल पड़ा। रास्ते में जो भी मिलता केदारनाथ का मार्ग पूछ लेता। मन में भगवान शिव का ध्यान करता रहता। चलते चलते उसको महीनो बीत गए।* *आखिरकार एक दिन वह केदार धाम पहुच ही गया। केदारनाथ में मंदिर के द्वार 6 महीने खुलते है और 6 महीने बंद रहते है। वह उस समय पर पहुचा जब मन्दिर के द्वार बंद हो रहे थे। पंडित जी को उसने बताया वह बहुत दूर से महीनो की यात्रा करके आया है। पंडित जी से प्रार्थना की - कृपा कर के दरवाजे खोलकर प्रभु के दर्शन करवा दीजिये । लेकिन वहां का तो नियम है एक बार बंद तो बंद। नियम तो नियम होता है। वह बहुत रोया। बार-बार भगवन शिव को याद किया कि प्रभु बस एक बार दर्शन करा दो। वह प्रार्थना कर रहा था सभी से, लेकिन किसी ने भी नही सुनी।*
 *पंडित जी बोले अब यहाँ 6 महीने बाद आना, 6 महीने बाद यहा के दरवाजे खुलेंगे। यहाँ 6 महीने बर्फ और ढंड पड़ती है। और सभी जन वहा से चले गये। वह वही पर रोता रहा। रोते-रोते रात होने लगी चारो तरफ अँधेरा हो गया। लेकिन उसे विस्वास था अपने शिव पर कि वो जरुर कृपा करेगे। उसे बहुत भुख और प्यास भी लग रही थी। उसने किसी की आने की आहट सुनी। देखा एक सन्यासी बाबा उसकी ओर आ रहा है। वह सन्यासी बाबा उस के पास आया और पास में बैठ गया। पूछा - बेटा कहाँ से आये हो ?* *उस ने सारा हाल सुना दिया और बोला मेरा आना यहाँ पर व्यर्थ हो गया बाबा जी। बाबा जी ने उसे समझाया और खाना भी दिया। और फिर बहुत देर तक बाबा उससे बाते करते रहे। बाबा जी को उस पर दया आ गयी। वह बोले, बेटा मुझे लगता है, सुबह मन्दिर जरुर खुलेगा। तुम दर्शन जरुर करोगे।*
 *बातों-बातों में इस भक्त को ना जाने कब नींद आ गयी। सूर्य के मद्धिम प्रकाश के साथ भक्त की आँख खुली। उसने इधर उधर बाबा को देखा, किन्तु वह कहीं नहीं थे । इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता उसने देखा पंडित जी आ रहे है अपनी पूरी मंडली के साथ। उस ने पंडित को प्रणाम किया और बोला - कल आप ने तो कहा था मन्दिर 6 महीने बाद खुलेगा ? और इस बीच कोई नहीं आएगा यहाँ, लेकिन आप तो सुबह ही आ गये। पंडित जी ने उसे गौर से देखा, पहचानने की कोशिश की और पुछा - तुम वही हो जो मंदिर का द्वार बंद होने पर आये थे ? जो मुझे मिले थे। 6 महीने होते ही वापस आ गए ! उस आदमी ने आश्चर्य से कहा - नही, मैं कहीं नहीं गया। कल ही तो आप मिले थे, रात में मैं यहीं सो गया था। मैं कहीं नहीं गया। पंडित जी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं था।*
*उन्होंने कहा - लेकिन मैं तो 6 महीने पहले मंदिर बन्द करके गया था और आज 6 महीने बाद आया हूँ। तुम छः महीने तक यहाँ पर जिन्दा कैसे रह सकते हो ? पंडित जी और सारी मंडली हैरान थी। इतनी सर्दी में एक अकेला व्यक्ति कैसे छः महीने तक जिन्दा रह सकता है। तब उस भक्त ने उनको सन्यासी बाबा के मिलने और उसके साथ की गयी सारी बाते बता दी। कि एक सन्यासी आया था - लम्बा था, बढ़ी-बढ़ी जटाये, एक हाथ में त्रिशुल और एक हाथ में डमरू लिए, मृग-शाला पहने हुआ था। पंडित जी और सब लोग उसके चरणों में गिर गये। बोले, हमने तो जिंदगी लगा दी किन्तु प्रभु के दर्शन ना पा सके, सच्चे भक्त तो तुम हो। तुमने तो साक्षात भगवान शिव के दर्शन किये है। उन्होंने ही अपनी योग-माया से तुम्हारे 6 महीने को एक रात में परिवर्तित कर दिया। काल-खंड को छोटा कर दिया। यह सब तुम्हारे पवित्र मन, तुम्हारी श्रद्वा और विश्वास के कारण ही हुआ है।  आपकी भक्ति को प्रणाम

देश की मजबूती के लिए देश के नागरिकों को चाहिए कि घर परिवार में सुई से लेकर बड़ी से बड़ी चीजें जो भी आप स्तेमाल करते हैं, केवल भारत में निर्मित ही खरीदें, जिससे भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत रहे, और भारत को तरक्की करने में आपकी सहायता मिलेजै हिंद 🚩

*एक बच्चा पैदा कर के आप उसे सरकारी नौकर बनाना चाहते हैं* 
*और वो 10 बच्चे पैदा कर* *सरकार ही बनाना चाहते है।*

*कुछ  तो सीखो  !?!?*

आर्यन खान की रेवपार्टी में सभी लडकीयां हिंदू थी ।
मजाल है एक भी मुसलमान लडकी ऐसी हिम्मत/हिमाकत कर सकें !
उन के परीवारों में  ऐसा लाड-प्यार नहीं होता !?!?😢

*आपके घर में करोड़ों की संपत्ति है और उनके घर में 40_वोटर🙄*

*सरकार वोट से बनती है अगर नोट से बनती तो टाटा/बिड़ला/अंबानी PM होते!!*
         
**उन्होंने धर्म पूछकर सीने में गोलियां उतार दी..और फिर वो परिचय पत्र देखकर गो  ली मारते हैं..!** 
*और हम कहते रह गए.. आतंकी का धर्म नहीं होता..* 

*हमने नाम पूछकर सब्जी क्या खरीदी*
*कि शहर भर में भारी कोहराम मच गया*
*उन्होंने धर्म पूछकर गोलियां भी मारीं तो आहट न हुई*
      ⛳‼️ ‼️⛳
*हम आज से  त्योहारों में परिचयपत्र देखकर खरीददारी करेगे, तो गोली से भी ज़्यादा असर होगा.🙏🏻*
          🚩🚩🚩🚩🚩
      🚩 *निर्भय विचार* 🚩
*मुझे आतंकियो का भय नहीं, मुसलमानों का तो बिल्कुल भी नहीं। मुझे केवल उन हिन्दुओं से भय लगता है जो अपने ही धर्म को हानि पहुंचाते हैं और धर्म की रक्षा हेतु खड़े नहीं होते, उल्टे देशद्रोहियों के साथ मिलकर उनकी ही भाषा बोलने लगते हैं।*
    
*⛳हिंदुत्व को अपने व्यवहार में लाइये। धर्म, कर्म,राष्ट्र और आने वाली पीढ़ियों का अस्तित्व, सब सुरक्षित हो जाएगा।_*🚩
🇮🇳सर्वे भवन्तु सुखिनः🇮🇳

रविवार, 17 अक्टूबर 2021

रसोई में नल से पानी रिस रहा था, तो मैंने एक प्लंबर को बुला लिया।  मैं उसको काम करते देख रहा था।*.  
उसने अपने थैले से एक रिंच निकाली। रिंच की डंडी टूटी हुई थी। मैं चुपचाप देखता रहा कि वह इस रिंच से कैसे काम करेगा?  
  *उसने पाइप से नल को अलग किया। पाइप का जो हिस्सा गल गया था, उसे काटना था।  उसने फिर थैले में हाथ डाला और एक पतली-सी आरी उसने निकाली। आरी भी आधी टूटी हुई थी।*.  
मैं मन ही मन सोच रहा था कि पता नहीं किसे बुला लिया हूं?   इसके औजार ही ठीक नहीं तो फिर इससे क्या काम होगा?  
*वह धीरे-धीरे अपनी मुठ्टी में आरी पकड़ कर पाइप पर चला रहा था। उसके हाथ सधे हुए थे। कुछ मिनट तक आरी आगे-पीछे किया और पाइप के दो टुकड़े हो गए। उसने गले हिस्से को बाहर निकाला और बाकी हिस्से में नल को फिट कर दिया।*
इस पूरे काम में उसे दस मिनट का समय लगा।  
*मैंने उसे 100 रूपये दिए तो उसने कहा कि इतने पैसे नहीं बनते साहब। आप आधे दीजिए।*     
उसकी बात पर मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ। मैने उससे पूछा। “क्यों भाई? पैसे भी कोई छोड़ता है क्या?” लेकिन उसके उत्तर ने मुझे सच का ऐसा साक्षात्कार कराया की मैं हैरान हो गया।   
 *उसने कहा कि  “सर, हर काम के तय पैसे होते हैं। आप आज अधिक पैसे देंगे, मुझे अच्छा भी लगेगा, लेकिन मुझे हर जगह इतने पैसे नहीं मिलेंगे तो फिर तकलीफ होगी।*.  
  हर चीज़ का रेट तय है। आप उतने ही पैसे दें जितना बनता है।“. 
  *मैंने धीरे से प्लंबर से कहा कि तुम नई आरी खरीद लेना, रिंच भी खरीद लेना। काम में आसानी होगी।*
अब प्लंबर हंसा।.  
 *“अरे नहीं सर, औजार तो काम में टूट ही जाते हैं। पर इससे काम नहीं रुकता।“*
मैंने हैरानी के साथ उससे कहा कि अगर रिंच सही हो, आरी ठीक हो तो काम आसान नहीं हो जाएगा?
*हो सकता है हो जाए। लेकिन सर, आप जिस ऑफिस में काम करते हैं वहां आप किस पेन से लिख रहे हैं उससे क्या फर्क पड़ता है? लिखना आना चाहिए। लिखना आएगा तो किसी भी पेन से आप लिख लेंगे। नहीं लिखना आएगा तो चाहे जैसी भी कलम हो, आप नहीं लिख पाएंगे।*. 
 हुनर हाथ में है मशीन में नहीं। सर इसे तो टूल कहते हैं। इससे अधिक कुछ नहीं। जैसे आपके लिए कलम है, वैसे ही मेरे लिए ये टूल। ये थोड़े टूट गए हैं, लेकिन काम आ रहे हैं। नया लूंगा फिर यही हिस्सा टूटेगा।    
*जब से ये टूटा है इसमें टूटने को कुछ बचा ही नहीं*। अब काम आराम से चल रहा है।  मैं चुप था। दिन-भर की मेहनत से ईमानदारी से कमाने वाले के चेहरे पर संतोष की जो लकीर मैं देख रहा था, वह सचमुच हैरान करने वाला था।.  
 *मुझे लग रहा था कि हम सारा दिन पैसों के पीछे भागते हैं। पर जब मेहनत और ईमानदारी का टूल हमारे पास हो तो असल में बहुत पैसों की ज़रूरत ही नहीं रह जाती।*.  
हमें बहुत से लोगों से सीखना है। ये लोग स्कूल में नहीं पढ़ते/पढ़ाते।   
*ये ज़िंदगी की यात्रा में कहीं भी किसी भी समय मिल जाते हैं।  ज़रूरत तो है ऐसे लोगों को पहचानने की; इनसे सीखने की। झुक कर इनकी सोच को सम्मान करने की।*
*मैंने कुछ कहा नहीं। प्लंबर से पूछा कि चाय तो पियोगे? उसने कहा, नहीं सर। बहुत काम है।*  
*कई घरों में पानी रिस रहा है। उन्हें ठीक करना है*।    
 *सर, पानी बर्बाद न हो, इसका  तो हम सबको ही ध्यान रखना है।।* 
*वह तो चला गया। मैं बहुत देर तक सोचता रहा। काश! हम सब ऐसे ही प्लंबर होते!*

विधि का विधान



*विधि का विधान*

*श्री राम का विवाह और राज्याभिषेक, दोनों शुभ मुहूर्त देख कर किए गए थे; फिर भी न वैवाहिक जीवन सफल हुआ, न ही राज्याभिषेक!* 

*और जब मुनि वशिष्ठ से इसका उत्तर मांगा गया, तो उन्होंने साफ कह दिया* 

*"सुनहु भरत भावी प्रबल,*
*बिलखि कहेहूं मुनिनाथ।*
*हानि लाभ, जीवन मरण,*
*यश अपयश विधि हाथ।।"*

*अर्थात - जो विधि ने निर्धारित किया है, वही होकर रहेगा!*

*न राम के जीवन को बदला जा सका, न कृष्ण के!*

*न ही महादेव शिव जी सती की मृत्यु को टाल सके, जबकि महामृत्युंजय मंत्र उन्हीं का आवाहन करता है!*

*न गुरु अर्जुन देव जी, और न ही गुरु तेग बहादुर साहब जी, और दश्मेश पिता गुरु गोविन्द सिंह जी, अपने साथ होने वाले विधि के विधान को टाल ना सके, जबकि आप सब समर्थ थे!*

*रामकृष्ण परमहंस भी अपने कैंसर को न टाल सके!*

*न रावण अपने जीवन को बदल पाया, न ही कंस, जबकि दोनों के पास समस्त शक्तियाँ थी!*

*मानव अपने जन्म के साथ ही जीवन, मरण, यश, अपयश, लाभ, हानि, स्वास्थ्य, बीमारी, देह, रंग, परिवार, समाज, देश-स्थान सब पहले से ही निर्धारित करके आता है!*

*इसलिए सरल रहें, सहज, मन, वचन और कर्म से सद्कर्म में लीन रहें!*

*मुहूर्त न जन्म लेने का है, न मृत्यु का, फिर शेष अर्थहीन है!*

*सदैव प्रभुमय रहें, आनन्दित रहें!*

शनिवार, 16 अक्टूबर 2021

करवा चौथ आने वाला हैं त्यौहार शुरू होने वाले हैं

करवा चौथ आने वाला हैं त्यौहार शुरू होने वाले हैं
आजकल.. एक बड़ा खतरनाक प्रचलन चला है हिन्दुओं में..,
वह यह कि.. जैसे ही कोई हिन्दू त्यौहार आने वाला होता है, हम हिन्दू खुद ही.. उस त्यौहार को ऐसे पेश करते हैं जैसे वो.. उनके ऊपर बोझ है उनका भद्दा मजाक.. फेसबुक और व्हाट्सएप पर बनाते हैं , और अपने ही त्यौहारों की..
पवित्रता गम्भीरता.. खत्म कर देते हैं !!

देखिए क्या लिखा है,, ~

आदरणीय पति देव !
आपको सूचित किया जाता है कि आपके लम्बी आयु की वैलिडिटी खत्म होने वाली है और रिचार्ज की तिथि आ गयी है..!

24 October 2021 को.. स्पेशल करवाचौथ रिचार्ज करवाकर.. लंबी उम्र पाएं। 

पत्नी के त्याग का मजाक बनाकर.. पत्नी को लालची और.. रिशवतखोर बताने लगते हैं ! 

हिन्दू धर्म की विडंबना देखिए :-

जन्माष्टमी आयी तो श्री कृष्ण को टपोरी तडीपार और ना जाने क्या-क्या कहा!

गणेश जी आये तो उनका भी मज़ाक़ बनाया!

नवरात्रि आयी तो ये चुटकुला आया "नौ दिन दुर्गा-दुर्गा फिर मुर्गा-मुर्गा..."

विजयादशमी पर श्री राम-माता सीता और रावण पर चुटकुले चले!

अब दिवाली पर भी कुछ ना कुछ.. आ जायेगा!

कभी सोचा है कि वास्तव में कौन है जो.. ये सब पोस्ट कर रहा है??? 
ये कभी किसी ने भी जानने की कोशिश नहीं की..! बस अपने मोबाइल पर आया तो बिना सोचे समझे फॉरवर्ड करने की वही.. भेड़ चाल चालू..!!

एक हमारा मीडिया.. पहले ही हिन्दू त्यौहारों के पीछे पड़ा है-

होली पर पानी बर्बाद होता है लेकिन.. ईद पर जानवरों की क़ुरबानी धर्म है!

दिवाली पर पटाके छोड़ना प्रदूषण है पर ईसाई नव वर्ष पर आतिशबाजी जश्न है!

नवरात्री पर 10 बजे के बाद गरबा ध्वनि प्रदूषण हो जाती है, वहीं मोहरम की रात ढोल ताशे कूटना और नववर्ष की रात जानवरों की तरह 12 बजे तक बाजे बजाना धर्म है!!!

करवा चौथ और नाग पंचमी पाखंड है वहीं ईसा का मरकर पुनः लौटना गुड फ्राइडे वैज्ञानिक है!!

हिन्दुओं को यह लगता है कि अपने पर्व का मज़ाक़ बनाना सही है तो.. इससे बड़ी लानत क्या होगी??

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इस तरह के मैसेज बनाने वाले.. हिन्दू विरोधी तत्व.. जानते हैं कि.. हम हिन्दू.. अपने धर्म को लेके सजग नहीं हैं और.. एडवांस्ड दिखने के चक्कर में.. कुछ भी फॉरवर्ड कर देंगे.. तभी ये ऐसे मैसेज बनाकर सर्कुलेट करते हैं!!

किसी और.. धर्म के लोगों को.. उनके धर्म के जोक्स पढ़ते या फॉरवर्ड करते देखा है क्या ? उनको तो छोड़ो, आप भी उनके धर्म के जोक्स फॉरवर्ड करने से पहले 10 बार सोचते हो कि.. ये मैसेज आगे भेजूँ या नहीं?? तो हिन्दू धर्म का मज़ाक़ उड़ाते शर्म नहीं आती..??

मेरा करबद्ध निवेदन है 🙏 कि.. *अपने हाथों से अपने धर्म का अपमान ना करें..!!*

कृपया अपने सभी मित्रो को.. अपने ही धर्म का.. मज़ाक ना उडाने की सलाह दें || 🙏

प्रभु श्री कृष्ण नें कहा था ~  "यदि आप धर्म की रक्षा करोगे तो.. धर्म भी आपकी रक्षा करेगा ||

एक युवक पुलिस की नौकरी के लिए इंटरव्यू देने गया।।

एक युवक पुलिस की नौकरी के लिए इंटरव्यू देने गया।।
🙄
पुलिस अफसर ने उससे पूछा कि 
अगर सेब का दाम 150 रुपये किलो हैं तो 100 ग्राम सेब कितने के आएंगे।
😉
युवक की गणित कमज़ोर थी, मगर चतुराई भरपूर थी, बोला....,साहब अगर 100 ग्राम सेव के मुझें पैसे देने पड़े तो फ़िर पुलिस के सिपाही की नौकरी किस काम की...??
🙄
अफसर..... चलो मान लेते हैं, लेकिन अगर तुम्हारी पत्नी बाज़ार जाए तो 150 रुपए प्रति किलो के रेट से 100 ग्राम सेब उसे कितने का पड़ेगा ...
🙄
युवक बोला....अरे साहब, उसकी क्या बात करते हैं। अपनी पत्नी को मैं आपसे ज्यादा जानता हूं, 100ग्राम लेना है तो वो 100 ग्राम सेब का ही रेट पूँछेगी, पक्का...
😉
अफसर.... अच्छा चल ये भी माना मगर, अगर तेरा भाई यही लेने बाज़ार जाए तो…...
🙄
युवक.....उसकी बात मत करो साहब... वो किसी काम का नही, एक नम्बर का कामचोर है।  
सारा दिन खाकर पड़ा रहता है।
😉
अफसर ने हार नहीं मानी, बोला....अगर तुम्हारा बाप सेब लेने जाए तो इस रेट के हिसाब से 100 ग्राम सेब का दाम क्या होगा..
🙄
अरे साहब, मेरे पिता के तो मुंह में दाँत ही नही बचे हैं,
मेरा बापू केला खाता हैं,
फ़िर न वो सेव खरीदेंगे औऱ न ही रेट पूछेंगे ।
😉
अफ़सर भी ढीठ था, फिर पूछ बैठा.....
अगर मजबूरी में घर पर कोई न हो औऱ तुम्हारी बहन सेव खरीदने बाजार जाए तो...
🙄
युवक....सर मैने उसकी शादी पांच साल पहले ही कर दी है,
अब वो जाने और बहनोई जाने.....
उनकी इच्छा..सेव ख़रीदे, लीची ख़रीदे, संतरा ख़रीदे, आम ख़रीदे.... मुझें उससे क्या......
और वैसे भी साहब, नौकरी मैं करूँगा या पूरा मेरा खानदान करेगा ....
😉
अफसर के सब्र का बांध अब टूटने लगा था..... 
बहुत गुस्से में बोला....
🙄
भाई अगर कोई बिलकुल आम आदमी सेब लेने जाए तो 100 ग्राम सेब कितने का हुआ,
अब बताओ......
😉
युवक.....साहब आम आदमी को सेब खाने लायक सरकार औऱ हमारे सिस्टम ने छोड़ा ही कहाँ है, वो तो बेचारा नमक रोटी में परेशान है......
आम आदमी तो बस सेव का ठेला लगाता है और खास आदमी ही ख़रीद कर सेव खाता है......... 😁😁😁🙄