बुधवार, 14 मार्च 2018

#चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (18 मार्च 2018) से प्रारम्भ हो रहे , भारतीय नववर्ष युगाब्द 5120 तथा विक्रमी सम्वत 2075 की आपको अग्रिम शुभकामनाये ! आइये इसके वैज्ञानिक महत्व को समझते है ।

💐 प्रकृति - 1 जनवरी कोई अंतर नही जैसा दिसम्बर वैसी जनवरी। चैत्र मास में चारो तरफ फूल खिल जाते हैं, पेड़ो पर नए पत्ते आ जाते हैं। चारो तरफ हरियाली मानो प्रकृति नया साल मना रही हो।

💐वस्त्र - दिसम्बर और जनवरी में वही उनी वस्त्र। कंबल रजाई ठिठुरते हाथ पैर चैत्र मास में सर्दी जा रही होती है , गर्मी का आगमन होने जा रहा होता है ।

💐विद्यालयो का नया - दिसंबर जनवरी वही कक्षा कुछ नया नही। जबकि मार्च अप्रैल में स्कूलो का रिजल्ट आता है नई कक्षा नया सत्र यानि विद्यालयों में नया साल।

💐नया वित्तीय वर्ष- दिसम्बर जनबरी में कोई खातो की क्लोजिंग नही होती। जबकि 31 मार्च को बैंको की(audit) कलोसिंग होती है नए वही खाते खोले जाते है। सरकार का भी नया सत्र शुरू होता है।

💐 कलैण्डर-जनवरी में नया कलैण्डर आता है। चैत्र में नया पंचांग आता है उसी से सभी भारतीय पर्व, विवाह और अन्य महूर्त देखे जाते हैं । इसके बिना हिन्दू समाज जीवन की कल्पना भी नही कर सकता इतना महत्व पूर्ण है ये कैलेंडर यानि पंचांग।

💐किसानो का नया साल -  दिसंबर जनवरी में खेतो में वही फसल होती है , जबकि मार्च अप्रैल में फसल कटती है नया अनाज घर में आता है तो किसानो की वार्षिक योजना बनती है।

💐 पर्व मनाने की विधि -  31 दिसम्बर की रात नए साल के स्वागत के लिए लोग जमकर मदिरा पान करते है, हंगामा करते है ,रात को पीकर गाड़ी चलने से दुर्घटना की सम्भावना, रेप जैसी बारदात, पुलिस प्रशासन बेहाल,और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का विनाश 
       जबकि भारतीय नववर्ष व्रत से शुरू होता है पहला नवरात्र होता है घर घर मे माता रानी की पूजा होती है। शुद्ध सात्विक वातावरण बनता है।

💐ऐतिहासिक महत्त्व - 1 जनवरी का कोई ऐतेहासिक महत्व नही है,  जबकि चैत्र प्रतिपदा के दिन महाराज विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत् की शुरुआत 💐 भगवान झूलेलाल का जन्म 💐नवरात्रे प्रारंम्भ, 💐 ब्रहम्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना, इत्यादि का संबंध इस दिन से है।

👍अंग्रेजी कलेंडर की तारीख और अंग्रेज मानसिकता के लोगो के अलावा कुछ नही बदला....

👌अपना नव संवत् ही नया साल है।

👌जब ब्रह्माण्ड से लेकर
सूर्य चाँद की दिशा,मौसम,फसल,कक्षा,
नक्षत्र,पौधों की नई पत्तिया,किसान की नई फसल,विद्यार्थी की नई कक्षा,मनुष्य में नया रक्त संचरण आदि परिवर्तन होते है। जो विज्ञान आधारित है।

👌 तब अपनी मानसिकता को बदले। विज्ञान आधारित भारतीय काल गणना को पहचाने।

👌1 जनवरी को केवल कैलेंडर बदलें। अपनी संस्कृति नही।
💐 आओ जगे जगाये,भारतीय संस्कृति अपनाये , आधुनिक बने ।

मंगलवार, 13 मार्च 2018

अंग्रेजी के प्रोफेसर से

एक स्टूडेंट ने पूछा

कि  सर नटुरे का अर्थ क्या होगा?

प्रोफेसर साहब हैरान!

टालने के लिए कह दिया

कि कल बता दूँगा।

उन्होंने
पूरी डिक्शनरी छान मारी,

किन्तु उन्हें नटुरे शब्द
नहीं मिला।

अगले दिन

स्टूडेंट ने फिर से पूछा

कि सर नटुरे का मतलब क्या होता है?

उस दिन भी उन्होंने बात टाल
दी।

अब तो वह रोज़ पूछने लगा।

प्रोफेसर साहब उससे
इतना घबराने लगे
कि 
I
उस लड़के को
देखते ही रास्ता बदल
देते,

किन्तु वह रोज़ आकर
उनको टेँशन देकर चला जाता।

अंत में

झुँझला कर
उन्होने उस लड़के से कहा कि

मुझे नटुरे
की स्पेलिंग बताओ।

लड़के ने कहा
.
.
.
.NATURE
अब तो प्रोफसर साहब का ख़ून खौल गया।

उन्होंने उस लड़के
को पकड़ के जूतो से पीटा

मुझे बेवकूफ बनाते हो,
नेचर को नटुरे
कह कह
कर तुमने मेरा
जीना मुश्किल कर दिया था।

मैं तुम्हे कॉलेज
  से निकलवा दूँगा।

लड़के ने झट से
प्रोफेसर साहब
के

पैर पकड़ लिये
और रोते रोते कहा कि
 
सर ऐसा अनर्थ
मत कीजिएगा

नहीं तो
मेरा
" फुटुरे "(Future)
  ख़राब
हो जाएगा।....

प्रोफेसरअभी तक होश मै नही आये ।

चिड़िय जब जीवित रहती है
तब वो किड़े-मकोड़ों को खाती है
और चिड़िया जब मर जाती है
तब किड़े-मकोड़े उसको खा जाते है।
👉🏿इसलिए इस बात का ध्यान रखो की समय और स्थिति कभी भी बदल सकते है
👉🏿इसलिए कभी किसी का अपमान मत करो
👉🏿कभी किसी को कम मत आंको।
👉🏿तुम शक्तिशाली हो सकते हो पर समय तुमसे भी शक्तिशाली है।
👉🏿एक पेड़ से लाखो माचिस की तिलियाँ बनाई जा सकती है।
पर एक माचिस की तिली से लाखो पेड़ भी जल सकते है।
👉🏿कोई चाहे कितना भी महान क्यों ना हो जाए, पर कुदरत कभी भी किसी को महान  बनने का मौका नहीं देती।
👉🏿कंठ दिया कोयल को, तो रूप छीन लिया ।
👉🏿रूप दिया मोर को, तो ईच्छा छीन ली ।
👉🏿दी ईच्छा इन्सान को, तो संतोष छीन लिया ।
👉🏿दिया संतोष संत को, तो संसार छीन लिया।
☝🏿मत करना कभी भी ग़ुरूर अपने आप पर 'ऐ इंसान'
भगवान ने तेरे और मेरे जैसे कितनो को मिट्टी से बना कर, मिट्टी में मिला दिए ।
☝🏿 इंसान दुनिया में तीन चीज़ो के लिए मेहनत करता है

1-मेरा नाम ऊँचा हो .
२ -मेरा लिबास अच्छा हो .
3-मेरा मकान खूबसूरत हो ..

☝🏿लेकिन इंसान के मरते ही भगवान उसकी तीनों चीज़े
सबसे पहले बदल देता है

१- नाम = (स्वर्गीय )
२- लिबास = (कफन )
३-मकान = ( श्मशान )

👉🏿जीवन की कड़वी सच्चाई जिसे हम समझना नहीं चाहते 

ये चन्द पंक्तियाँ
जिसने भी लिखी है
खूब लिखी है।

👉🏿एक पत्थर सिर्फ एक बार मंदिर जाता है और भगवान बन जाता है ..
इंसान हर रोज़ मंदिर जाते है फिर भी पत्थर ही रहते है ..!!

👉🏿एक औरत बेटे को जन्म देने के लिये अपनी सुन्दरता त्याग देती है.......
और
वही बेटा एक सुन्दर बीवी के लिए अपनी माँ को त्याग देता है
जीवन में हर जगह
हम "जीत" चाहते हैं...

👉🏿सिर्फ फूलवाले की दूकान ऐसी है
जहाँ हम कहते हैं कि हमें
"हार" चाहिए

सोमवार, 12 मार्च 2018

एक आदमी ❄बर्फ बनाने वाली कम्पनी में काम करता था___

एक दिन कारखाना बन्द होने से पहले अकेला फ्रिज करने वाले कमरे का चक्कर लगाने गया तो गलती से दरवाजा बंद हो गया
और वह अंदर बर्फ वाले हिस्से में फंस गया..

छुट्टी का वक़्त था और सब काम करने वाले लोग घर जा रहे थे
किसी ने भी अधिक ध्यान नहीं दिया की कोई अंदर फंस गया है।

वह समझ गया की दो-तीन घंटे बाद उसका शरीर बर्फ बन जाएगा अब जब मौत सामने नजर आने लगी तो
भगवान को सच्चे मन से याद करने लगा।

अपने कर्मों की क्षमा मांगने लगा और भगवान से कहा कि प्रह्लाद को तुमने अग्नि से बचाया, अहिल्या को पत्थर से नारि बनाया, शबरी के जुठे बेर खाकर उसे स्वर्ग में स्थान दिया।
प्रभु अगर मैंने जिंदगी में कोई एक काम भी मानवता व धर्म का किया है तो तूम मुझे यहाँ से बाहर निकालो।
मेरे बीवी बच्चे मेरा इंतज़ार कर रहे होंगे। उनका पेट पालने वाला इस दुनिया में सिर्फ मैं ही हूँ।

मैं पुरे जीवन आपके इस उपकार को याद रखूंगा और इतना कहते कहते उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे।

एक घंटे ही गुजरे थे कि अचानक फ़्रीजर रूम में खट खट की आवाज हुई।

दरवाजा खुला चौकीदार भागता हुआ आया।

उस आदमी को उठाकर बाहर निकाला और  🔥 गर्म हीटर के पास ले गया।

उसकी हालत कुछ देर बाद ठीक हुई तो उसने चौकीदार से पूछा,   आप अंदर कैसे आए ?

चौकीदार बोला कि साहब मैं 20 साल से यहां काम कर रहा हूं। इस कारखाने में काम करते हुए हर रोज सैकड़ों मजदूर और ऑफिसर कारखाने में आते जाते हैं।

मैं देखता हूं लेकिन आप उन कुछ लोगों में से हो, जो जब भी कारखाने में आते हो तो मुझसे हंस कर
*राम राम* करते हो
और हालचाल पूछते हो और निकलते हुए आपका
*राम राम काका*
कहना मेरी सारे दिन की थकावट दूर कर देता है।

जबकि अक्सर लोग मेरे पास से यूं गुजर जाते हैं कि जैसे मैं हूं ही नहीं।

आज हर दिनों की तरह मैंने आपका आते हुए अभिवादन तो सुना लेकिन
*राम राम काका*
सुनने के लिए इंतज़ार
करता रहा।

जब ज्यादा देर हो गई तो मैं आपको तलाश करने चल पड़ा कि कहीं आप किसी मुश्किल में ना फंसे हो।

वह आदमी हैरान हो गया कि किसी को हंसकर
*राम राम* कहने जैसे छोटे काम की वजह से आज उसकी जान बच गई।

*राम कहने से तर जाओगे*
मीठे बोल बोलो,
संवर जाओगे,

सब की अपनी जिंदगी है
यहाँ कोई किसी का नही खाता है।

जो दोगे औरों को,
वही वापस लौट कर आता है।  

Positive attitude

एक घर के पास काफी दिन से एक बड़ी इमारत का काम चल रहा था।
वहां रोज मजदूरों के छोटे-छोटे बच्चे एक दूसरे की शर्ट पकडकर रेल-रेल का खेल खेलते थे।

*रोज कोई बच्चा इंजिन बनता और बाकी बच्चे डिब्बे बनते थे...*

*इंजिन और डिब्बे वाले बच्चे रोज बदल  जाते,*
पर...

केवल चङ्ङी पहना एक छोटा बच्चा हाथ में रखा कपड़ा घुमाते हुए रोज गार्ड बनता था।

*एक दिन मैंने देखा कि* ...

उन बच्चों को खेलते हुए रोज़ देखने वाले एक व्यक्ति ने कौतुहल से गार्ड बनने वाले बच्चे को पास बुलाकर पूछा....

*"बच्चे, तुम रोज़ गार्ड बनते हो। तुम्हें कभी इंजिन, कभी डिब्बा बनने की इच्छा नहीं होती?"*

इस पर वो बच्चा बोला...
*"बाबूजी, मेरे पास पहनने के लिए कोई शर्ट नहीं है। तो मेरे पीछे वाले बच्चे मुझे कैसे पकड़ेंगे... और मेरे पीछे कौन खड़ा रहेगा....?*
*इसीलिए मैं रोज गार्ड बनकर ही खेल में हिस्सा लेता हूँ।*

*"ये बोलते समय मुझे उसकी आँखों में पानी दिखाई दिया।*

*आज वो बच्चा मुझे जीवन का एक बड़ा पाठ पढ़ा गया...*

*अपना जीवन कभी भी परिपूर्ण नहीं होता। उसमें कोई न कोई कमी जरुर रहेगी....*

वो बच्चा माँ-बाप से ग़ुस्सा होकर रोते हुए बैठ सकता था। परन्तु ऐसा न करते हुए उसने परिस्थितियों का समाधान ढूंढा।

*हम कितना रोते हैं?*
कभी अपने *साँवले रंग* के लिए, कभी *छोटे क़द* के लिए,
कभी पड़ौसी की *बडी कार,*
कभी पड़ोसन के *गले का हार,* कभी अपने *कम मार्क्स,*
कभी *अंग्रेज़ी,*
कभी *पर्सनालिटी,*
कभी *नौकरी की मार* तो
कभी *धंदे में मार*...
हमें इससे बाहर आना पड़ता है....
*ये जीवन है... इसे ऐसे ही जीना पड़ता है।*
*चील की ऊँची उड़ान देखकर चिड़िया कभी डिप्रेशन में नहीं आती,*
*वो अपने आस्तित्व में मस्त रहती है,*
*मगर इंसान, इंसान की ऊँची उड़ान देखकर बहुत जल्दी चिंता में आ जाते हैं।*
*तुलना से बचें और खुश रहें ।*
*ना किसी से ईर्ष्या, ना किसी से कोई होड़..!!!*
*मेरी अपनी हैं मंजिलें, मेरी अपनी दौड़..!!!*
           
            स्नेह वंदन  
 
*"परिस्थितियां कभी समस्या नहीं बनती,*
*समस्या इस लिए बनती है, क्योंकि हमें उन परिस्थितियों  से लड़ना नहीं आता।"*
                ¸.•*""*•.¸
                    🌹

रविवार, 11 मार्च 2018

✳कदम रुक गए जब पहुंचे
      हम रिश्तों के बाज़ार में...

✳बिक रहे थे रिश्ते
       खुले आम व्यापार में..

✳कांपते होठों से मैंने पूँछा,
      "क्या भाव है भाई
       इन रिश्तों का..?"

✳ दुकानदार बोला:

✳ "कौन सा लोगे..?

✳ बेटे का ..या बाप का..?

✳ बहिन का..या भाई का..?

✳ बोलो कौन सा चाहिए..?

✳ इंसानियत का..या प्रेम का..?

✳ माँ का..या विश्वास का..?

✳बाबूजी कुछ तो बोलो
      कौन सा चाहिए

✳चुपचाप खड़े हो
       कुछ बोलो तो सही...

✳मैंने डर कर पूँछ लिया
      "दोस्त का.."

✳दुकानदार नम आँखों से बोला:

✳"संसार इसी रिश्ते
      पर ही तो टिका है..."

✳माफ़ करना बाबूजी
      ये रिश्ता बिकाऊ नहीं है..

✳इसका कोई मोल
       नहीं लगा पाओगे,

✳और जिस दिन
       ये बिक जायेगा...

✳उस दिन ये संसार उजड़ जायेगा

    *सभी मित्रों को समर्पित*

ब्राह्मण -- मै जन्म से श्रेष्ठ हूँ

बुद्ध --  कैसे  ?

ब्राह्मण -- क्योंकि मै ब्राह्मण हूँ ।

बुद्ध -- ठीक है, अच्छा एक बात बताइए ,.......आपके घर की महिलाए गर्भवती होती है ?

ब्राह्मण -- हां होती है ।

बुद्ध -- वैसे ही होती है जैसे अन्य महिलाए होती ......या फिर ....?

ब्राह्मण -- हां वैसे ही होती है ।

बुद्ध -- आपकी महिलाओ की गर्भावस्था उतने ही समय की होती है जितने समय की अन्य महिलाओ की होती है ?

ब्राह्मण -- हां उतने ही समय की होती है ।

बुद्ध -- बच्चा पैदा अर्थात प्रसूति भी वैसे ही होती है जैसे अन्य महिलाओ के जरिए होती है ?

ब्राह्मण -- हां वैसे ही होती है ।

बुद्ध -- जब गर्भवती होने का तरीका, गर्भावस्था का समय और बच्चा प्रसूति का भी तरीका ....ये सभी प्रक्रियाएं एक ही समान है तो आप ब्राह्मण अपने आप को किस आधार पर कहते है कि हम ब्राह्मण पैदा होते ही अर्थात जन्म से ही श्रेष्ठ है ......?? ?

बुद्ध के इस प्रश्न का उत्तर ब्राह्मण के पास नही था .....

बुद्ध --  मतलब यह है कि मानव अपने कर्म से श्रेष्ठ है अपने कर्म से ही महान है ना कि जन्म से .....
ब्राह्मण का राज उनके ज्ञान पर नहीं तुम्हारे अज्ञान पर टिका है।
ब्राह्मण तुमसे पेड़ पुजवा सकता है,
पत्थर पुजवा सकता है, धरती, आकाश, जल, अग्नि, वायु, देहरी (चौखट), तस्वीर, लोहा, ईंट, पशु, पक्षी या जो कुछ भी उसे दिखाई दिया। उसने तुमसे खुले आम पुजवा दिया।

और ये सब एक अनपढ़ ब्राह्मण ने हमारे समाज के पढ़े लिखे IAS, IPS, वक़ील, मजिस्ट्रेट, इंजीनियर, डॉक्टर से करवाता है।

फिर आप कैसे कहते हैं के आप ब्राह्मण के ग़ुलाम नही हैं??
                                                        ब्राह्मणों की कहानी

जब भूकम्प आने वाला हो तो उनको पता नहीं होता ,

जब हुदहुद तूफान आने वाला हो तो पता नहीं होता

जब ट्रेन पलटने वाली या लड़ने  वाली हो तो पता नहीं होता,

जब नोट बदलने वाला हो तो पता नहीं होता,

जब अपने देश पर हमला होने वाला हो तो पता नहीं होता,

जब देश मे बंम बिस्फोट होने वाला हो तो पता नहीं होता

जब केदार नाथ बाढ़ मे बह जाने वाला हो तो पता नहीं होता,

जब भारत की राजधानी में किसी बस में लड़की का रेप होने वाला हो तो पता नहीं होता ,

जब देश मे आतंकवादी घूम रहे होते तो पता नहीं होता,

जब सीमा के सैनिकों का गला कटने वाला हो तो पता नही होता,

जब चारो धाम जाते समय यात्री बस खाई मे गिरने वाला हो तो पता नहीं होता,

जब कोई प्लेन लुप्त होने वाली हो तो पता नहीं होता,

जब बारिस होने पर बिजली कड़कने वाली हो और किसी के ऊपर बिजली गिरने वाली हो तो इन्हें पता नहीं होता।

इनको केवल वह पता होता जो सम्भव नहीं।

जैसे
किसी पर ग्रह नक्षत्र

-दोष ,पिछले जन्म का पाप,

मरने के बाद स्वर्ग दिलाना,

मूर्ति के प्राण प्रतिष्ठत करना ( जान डालना )

माता-पिता को मरने के बाद बैठाना,

बच्चे को सत्तईसा में पड़ना

साढ़े साती, शनि, ढैय्या चढ़ना और उतारना

धरती के अन्दर पानी देखना

आदि सभी अन्ध विश्वास
मनगढंत बातें।

जिनको पिछले जन्म की
और स्वर्ग की जानकारी हो; वे ये सब क्यों नहीं जानते ?

ब्राह्मण मूर्ति मे प्राण प्रतिष्ठित कर सकता है

लेकिन अपने मरे हुये बच्चे 5 मिनट के लिए जीवित नही कर सकता

इसलिए नहीं जानते क्योंकि ये सब देखे जा सकते हैं,
हक़ीकत जाना जा सकता है।

पाखण्ड और अन्धविश्वास मे न पड़ कर अपना दीपक स्वयं बने । *आत्म दीपो भव*