सोमवार, 16 अप्रैल 2018

.     *🚷आकस्मिक घटना संकेत 🚷*
            *जरूर पढे- और करे भी*

    *"ICE"(In Case of Emergency /आपात स्थिति के समय)*

     *हम सभी अपने मोबाइल की मेमोरी में नाम के साथ नम्बर दर्ज करते हैं किंतु हमारे अलावा कोई नहीं जानता कि इनमें से कौन सा नम्बर हमारे परिवार के सदस्य अथवा नजदीकी रिश्तेदार या मित्र का है।*

    *यदि हम दुर्घटना ग्रस्त हो जाय या अचानक बीमार पड़ जायें तो जो व्यक्ति हमें अस्पताल पहुँचाता है, उसके पास हमारा मोबाइल फोन तो मिल जाता है परंतु वह यह नहीं जानता कि किसे फोन किया जाय ? क्योंकि* *मोबाइल में सैकड़ों नम्बर दर्ज है किंतु आपात स्थिति (Emergency) में किससे सम्पर्क किया जाय?*

     *अतः"ICE"(In Case of Emergency /आपात स्थिति के समय) की परिकल्पना की गई है।*

    *"ICE" की संकल्पना आपात स्थिति (Emergency)में तुरंत सम्पर्क स्थापित करने की विधि है ।जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा मोबाइल फोन रखता है।आपको चाहिए कि आपात स्थिति (Emergency)में जिससे तुरंत सम्पर्क करना चाहिए, उसका फोन नंबर "ICE"(In Case of Emergency) के साथ दर्ज करें।*

    *यह विचार एक पुलिसकर्मी के दिमाग में आया जिसने अनुभव किया कि जब भी वह दुर्घटना स्थल पर पहुंचा, दुर्घटना ग्रस्त अथवा बीमार व्यक्ति के पास मोबाइल फोन तो होता है पर यह पता नहीं चल पाता था कि किससे तुरंत सम्पर्क कर सूचना दी जाय।इस कारण उसने विचार किया कि यदि ऐसी स्थिति हेतु राष्ट्रीय स्तर पर मान्य एक शब्द की संकल्पना की जाय तो आपात कालीन स्थितियों में आपात सेवा देने वाले व्यक्ति या पुलिसकर्मी आपके द्वारा "ICE " के साथ दर्ज किए गए नंबर पर, उचित व्यक्ति से तुरंत सम्पर्क स्थापित करने में सक्षम होंगे।*

    *आज ही अपने मोबाइल फोन में आपात स्थिति में सम्पर्क हेतु "ICE "  के साथ नम्बर दर्ज कर इस विचार धारा को विस्तारित करें।*

*उदाहरणार्थ;*
*नाम : ICE monika*
*नंबर : +91 xxxxx xxxxx*
    *आवश्यक हो तो,  आपात स्थिति हेतु एक से अधिक व्यक्तियों के नाम भी ICE 1, ICE 2, ICE 3 के साथ दर्ज किए जा सकते हैं।*

    *एक उत्तम विचार बहुत बड़ा बदलाव लायेगा।*

    *कृपया इसे अपने प्रियजनों और मित्रों को भेजिए, यह वास्तव में किसी का जीवन बचाने में सहायक सिद्ध होगा।*

    *याद रखिए जब आप बोलने में असमर्थ होंगे," ICE "आपके लिए बोलेगा।*
          

गुरुवार, 12 अप्रैल 2018

*बाबर ने मुश्किल से कोई 4 वर्ष राज किया। हुमायूं को ठोक पीटकर भगा दिया। मुग़ल साम्राज्य की नींव अकबर ने डाली और जहाँगीर, शाहजहाँ से होते हुए औरंगजेब आते आते उखड़ गया।*
*कुल 100 वर्ष (अकबर 1556ई. से औरंगजेब 1658ई. तक) के समय के स्थिर शासन को मुग़ल काल नाम से इतिहास में एक पूरे पार्ट की तरह पढ़ाया जाता है....*
*मानो सृष्टि आरम्भ से आजतक के कालखण्ड में तीन भाग कर बीच के मध्यकाल तक इन्हीं का राज रहा....!*

*अब इस स्थिर (?) शासन की तीन चार पीढ़ी के लिए कई किताबें, पाठ्यक्रम, सामान्य ज्ञान, प्रतियोगिता परीक्षाओं में प्रश्न, विज्ञापनों में गीत, ....इतना हल्ला मचा रखा है, मानो पूरा मध्ययुग इन्हीं 100 वर्षों के इर्द गिर्द ही है।*

*जबकि उक्त समय में मेवाड़ इनके पास नहीं था। दक्षिण और पूर्व भी एक सपना ही था।*
*अब जरा विचार करें..... क्या भारत में अन्य तीन चार पीढ़ी और शताधिक वर्ष पर्यन्त राज्य करने वाले वंशों को इतना महत्त्व या स्थान मिला है ?*
*अकेला विजयनगर साम्राज्य ही 300 वर्ष तक टिका रहा। हीरे माणिक्य की हम्पी नगर में मण्डियां लगती थीं।महाभारत युद्ध के बाद 1006 वर्ष तक जरासन्ध वंश के 22 राजाओं ने । 5 प्रद्योत वंश के राजाओं ने 138 वर्ष , 10 शैशुनागों ने 360 वर्षों तक , 9 नन्दों ने 100 वर्षों तक , 12 मौर्यों ने 316 वर्ष तक , 10 शुंगों ने 300 वर्ष तक , 4 कण्वों ने 85 वर्षों तक , 33 आंध्रों ने 506 वर्ष तक , 7 गुप्तों ने 245 वर्ष तक राज्य किया ।*
*फिर विक्रमादित्य ने 100 वर्षों तक राज्य किया था । इतने महान् सम्राट होने पर भी भारत के इतिहास में गुमनाम कर दिए गए ।*

*उनका वर्णन करते समय इतिहासकारों को मुँह का कैंसर हो जाता है। सामान्य ज्ञान की किताबों में पन्ने कम पड़ जाते है। पाठ्यक्रम के पृष्ठ सिकुड़ जाते है। कोचिंग वालों की नानी मर जाती है। प्रतियोगी परीक्षकों के हृदय पर हल चल जाते हैं।*
*वामपंथी इतिहासकारों ने नेहरूवाद का मल भक्षण कर, जो उल्टियाँ की उसे ज्ञान समझ चाटने वाले चाटुकारों...!*
*तुम्हे धिक्कार है !!!*

*यह सब कैसे और किस उद्देश्य से किया गया ये अभी तक हम ठीक से समझ नहीं पाए हैं और ना हम समझने का प्रयास कर रहे हैं।*

नोट बदलकर देख लिये,
शहरों के नाम बदलकर देख लिये,
योजनाओं के नाम बदलकर देख लिये,
नेताओं की पोजीशन बदलकर भी देख लिया,
प्रधानमंत्री,राष्ट्रपति भी बदलकर देख लिया,
तो भी विकास वहीं का वहीं रहेगा

एक बार
आरक्षण समाप्त कर के देख लो
विकास की गंगा बह निकलेगी

सरकारे कहती है
बेटी मारोगे तो बहु कहा से लाओगे।
सही बात है
लेकिन सरकारे ये क्यों नहीं सोचती  कि
प्रतिभा मारोगे तो  प्रगति कहाँ से लाओगे..???

बुधवार, 4 अप्रैल 2018

*केवट का राम प्रेम भी काली सूची में अंकित कर डाला!*
*शबरी के झूठे बेरों को कैसे आज कलंकित कर डाला!*
*निषाद राज ने ये पीड़ा कहो किससे जाकर कही होगी!*
*वाल्मीकि की आंखों से आज फिर अश्रु धार बही होगी!*
*पीपा देव जी शंकर देव जी किससे दुख बटा रहे होंगे!*
*बाबा साहब आज निश्चित पीड़ा से छटपटा रहे होंगे!*
*कबीर दास के दोहे कोने में हो शर्मसार बैठे होंगे!*
*हनुमत के अपमान पर रैदास भी हो तार तार बैठे होंगे!*
*मीठे बेर चुनने वालों ने कैसे सब हाला कर डाला!*
*हनुमत का कर अपमान भक्ति का पन्ना काला कर डाला!*
*तुम शोषित नही हो पुराणों में सम्मान तुम्हारा भी है!*
*केवल आरक्षण पर लड़ बैठे ये हिंदुस्तान तुम्हारा भी है!*

बुधवार, 28 मार्च 2018

*मैं ना होता तो क्या होता पर एक प्रसंग।*                        

एक बार हनुमानजी ने प्रभु श्रीराम से कहा कि अशोक वाटिका में जिस समय रावण क्रोध में भरकर तलवार लेकर सीता माँ को मारने के लिए दौड़ा, तब मुझे लगा कि इसकी तलवार छीन कर इसका सिर काट लेना चाहिये, किन्तु अगले ही क्षण मैंने देखा कि मंदोदरी ने रावण का हाथ पकड़ लिया, यह देखकर मैं गदगद् हो गया !
ओह प्रभु!
आपने कैसी शिक्षा दी, यदि मैं कूद पड़ता तो मुझे भ्रम हो जाता कि यदि मै न होता तो क्या होता ?
 
बहुधा हमको ऐसा ही भ्रम हो जाता है, मुझे भी लगता कि यदि मै न होता तो सीताजी को कौन बचाता ?
परन्तु आज आपने उन्हें बचाया ही नहीं बल्कि बचाने का काम रावण की पत्नी को ही सौंप दिया।
तब मै समझ गया कि आप जिससे जो कार्य लेना चाहते हैं, वह उसी से लेते हैं, किसी का कोई महत्व नहीं है !
आगे चलकर जब त्रिजटा ने कहा कि लंका में बंदर आया हुआ है और वह लंका जलायेगा तो मै बड़ी चिंता मे पड़ गया कि प्रभु ने तो लंका जलाने के लिए कहा ही नही है और त्रिजटा कह रही है तो मै क्या करुं ?
पर जब रावण के सैनिक तलवार लेकर मुझे मारने के लिये दौड़े तो मैंने अपने को बचाने की तनिक भी चेष्टा नहीं की, और जब विभीषण ने आकर कहा कि दूत को मारना अनीति है, तो मै समझ गया कि मुझे बचाने के लिये प्रभु ने यह उपाय कर दिया !

आश्चर्य की पराकाष्ठा तो तब हुई, जब रावण ने कहा कि बंदर को मारा नही जायेगा पर पूंछ मे कपड़ा लपेट कर घी डालकर आग लगाई जाये तो मैं गदगद् हो गया कि उस लंका वाली संत त्रिजटा की ही बात सच थी, वरना लंका को जलाने के लिए मै कहां से घी, तेल, कपड़ा लाता और कहां आग ढूंढता, पर वह प्रबन्ध भी आपने रावण से करा दिया, जब आप रावण से भी अपना काम करा लेते हैं तो मुझसे करा लेने में आश्चर्य की क्या बात है !

इसलिये हमेशा याद रखें कि संसार में जो कुछ भी हो रहा है वह सब ईश्वरीय विधान है, हम और आप तो केवल निमित्त मात्र हैं, इसीलिये कभी भी ये भ्रम न पालें कि........
*मै न होता तो क्या होता?*

मंगलवार, 27 मार्च 2018


" अब आप HIV रोग से संक्रमित हैं "

हाल ही में पेरिस फ्रांस के रोग नियंत्रक केंद्र द्वारा वहां भी ऐसी कई घटनाएं फ्रांस के अलग अलग शहरों में होने के प्रमाण दिए हैं। और जितनी भी सुई मिली है वे सभी HIV वायरस से संक्रमित थी।

केंद्र ने यहां तक कहा है कि सुइयाँ बैंक्स के नकदी निकालने वाली मशीनों के खाँचो में भी मिली है। हम आप सभी से मात्र इतना चाहते है कि आप ऐसी क्रियाएं करने से पूर्व सावधानी बरतें
सभी सार्वजनिक बैठने के स्थानों पर बैठने से पूर्व एक बार तीक्ष्ण नजर से स्थान को देख कर ही बैठे और हम ये भी चाहते हैं कि आप ये संदेश अपने परिचितों तक अवश्य पहुंचाएं और उनसे भी कहें कि वे अपने परिचितों तक पहुंचाएं

हाल ही में दिल्ली के एक चिकित्सक के पास ऐसी ही एक  घटना दिल्ली प्रिया सिनेमा हॉल में देखने को मिली एक युवा कन्या जिसका विवाह तय हो चुका था और आने वाले महीने में विवाह संपन्न होना था उसके संग यह घटना घटित हुई और जो सुई उसे चुभी उसपर कागज में लिखा था

" HIV संक्रमित लोगों के परिवार में आपका स्वागत है "

चिकित्सक ने उस कन्या के परिवारीजनों को बताया कि संक्रमण को प्रभाव में आने के लिए कम से कम 6 महीने का समय लगेगा जिससे आपकी बेटी 4 या 5 वर्ष जीवित रह सकेगी किन्तु वह कन्या 4 महीने के भीतर ही देह त्याग गयी निसंदेह यह अचंभित कर देने वाली खबर है।

फालतू के संदेश भेजने से अच्छा है आप इस संदेश को लोगो तक पहुंचाएं क्या पता आपके संदेश से किसी का जीवन बच जाए धन्यवाद