शनिवार, 11 जून 2016


"परी हो तुम गुजरात की, रूप तेरा मद्रासी !🌿💕🌿सुन्दरता कश्मीर की तुम में, सिक्किम जैसा शर्माती !!. 🌿💕🌿खान-पान पंजाबी जैसा, बंगाली जैसी बोली !🌿💕🌿केरल जैसी आंख तुम्हारी, है दिल तो तुम्हारा दिल्ली !!🌿💕🌿महाराष्ट्र तुम्हारा फ़ैशन है, तो गोवा नया जमाना !🌿💕🌿खुशबू हो तुम कर्नाटक की, बल तो तेरा हरियाणा !!🌿💕🌿सीधी-सादी उड़ीसा जैसी, एम.पी. जैसा मुस्काना !🌿💕🌿दुल्हन तुम राजस्थानी जैसी, त्रिपुरा जैसा इठलाना !!🌿💕🌿झारखंड तुम्हारा आभूषण, तो मेघालय तुम्हारी बिन्दीया है !🌿💕🌿सीना तुम्हारा यू.पी है तो, हिमाचल तुम्हारी निन्दिया है !!🌿💕🌿कानों का कुंडल छत्तीसगढ़, तो मिज़ोरम तुम्हारी पायल है🌿💕🌿बिहार गले का हार तुम्हारा, तो आसाम तुम्हारा आंचल है !!🌿💕🌿नागालैंड- आन्ध्र दो हाथ तुम्हारे, तो ज़ुल्फ़ तुम्हारा अरुणाचल है !🌿💕🌿नाम तुम्हारा भारत माता, तो पवित्र तुम्हारा उत्तरांचल है !!🌿💕🌿सागर है परिधान तुम्हारा, तिल जैसे है दमन-द्वीव !🌿💕🌿मोहित हो जाता है सारा जग, रहती हो तुम कितनी सजीव !!🌿💕🌿अंडमान और निकोबार द्वीप, पुष्पों का गुच्छ तेरे बालों में !🌿💕🌿झिल-मिल, झिल-मिल से लक्षद्वीप, जो चमक रहे तेरे गालों में !!🌿💕🌿ताज तुम्हारा हिमालय है, तो गंगा पखारती चरण तेरे !🌿💕🌿कोटि-कोटि हम भारत वासियों का, 🌿💕🌿स्वीकारो तुम नमन मेरे !! जय हो।🌿💕🌿भारत माता की जय।🌿💕🌿💕🌿💕🌿💕🌹
पतिदेव के लिए आ रही हैं ये दवाइयाँ😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀फीमेल वैज्ञानिकों द्वारा नई ईजाद की गयी दवाईयां सिर्फ पतियों के लिए जिन्हें  सरकार की अप्रूवल का इंतज़ार है.........⚡ANIVERSIA:यह दवा birthday व anniversary की याद दिलाने में कारगर होगी⚡SLIMOXIL:आँखों के कोर्निया को छोटा करके पत्नियों को पतला व सुन्दर दिखाने में कारगर...⚡SPORTOBLIND-X: आपटिक नर्व से रियेक्ट करती है इससे पति टीवी में sports शब्द नहीं पढ़ सकेगा ...⚡WORKOCETAMOL: घरेलु कार्य जैसे खाना बनाना बर्तन मांजना झाड़ू लगाना आदि की अति तीव्र इच्छा जागृत करती है...⚡SHOPHOFOBEX: पति को इस हद तक दीवाना करदे की पत्नी को रोज शॉपिंग पर लेकर जाए व शॉपिंग पर पत्नी को ले जाने के लिए पागल हो जाए...⚡FLIRTONATE-N: सुन्दर पर-स्त्री के पास से गुजरने पर आँखों की रोशनी तुरंत कम करती है VERYTASTYMYCIN : इस दवा से पति हमेशा पत्नी के खाना बनाने पर उसकी पाक कला की तारीफ़ करेगा।
Child एक बच्चा जला देने वाली गर्मी में नंगे पैरगुलदस्ते बेच रहाथा.लोग उसमे भी मोलभाव कर रहे थे।.एक सज्जन को उसके पैर देखकर बहुत दुःख हुआ, सज्जनने बाज़ार से नया जूता ख़रीदा और उसे देते हुए कहा"बेटालो, ये जूता पहन लो".लड़के ने फ़ौरन जूते निकाले और पहन लिए.उसका चेहरा ख़ुशी से दमक उठा था.वो उस सज्जन की तरफ़ पल्टाऔर हाथ थाम कर पूछा, "आप भगवान हैं?."उसने घबरा कर हाथ छुड़ाया और कानों को हाथ लगा करकहा, "नहीं बेटा, नहीं, मैं भगवाननहीं".लड़का फिर मुस्कराया और कहा,"तो फिर ज़रूर भगवान के दोस्त होंगे,.क्योंकि मैंने कल रात भगवान से कहा थाकि मुझे नऐ जूते देदें"..वो सज्जन मुस्कुरा दिया और उसके माथे को प्यार सेचूमकर अपने घर की तरफ़ चल पड़ा..अब वो सज्जन भी जान चुके थे कि भगवान का दोस्तहोनाकोई मुश्किल काम नहीं...खुशियाँ बाटने से मिलती है ..

शुक्रवार, 10 जून 2016

Sweet memory *कभी हमारे जहाज भी चला करते थे।*हवा में भी।पानी में भी।*दो दुर्घटनाएं हुई।**सब कुछ ख़त्म गया।*एक बार क्लास में हवाई जहाज उड़ाया।टीचर के सिर से टकराया।स्कूल से निकलने की नौबत आ गई।बहुत फजीहत हुई।कसम दिलाई गई।औऱ जहाज उडाना छूट गया।वारिश के मौसम में,मां ने अठन्नी दी।चाय के लिए दूध लाना था।कोई मेहमान आया था।हमने गली की नाली में तैरते अपने जहाज में बिठा दी।तैरते जहाज के साथ हम चल रहे थे।ठसक के साथ।खुशी खुशी।अचानक तेज बहाब आया।जहाज डूब गया।साथ में अठन्नी भी डूब गई।ढूंढे से ना मिली।मेहमान बिना चाय पीये चला गया।फिर जमकर ठुकाई हुई।घंटे भर मुर्गा बनाया गया।औऱ हमारा पानी में जहाज तैराना भी बंद हो गया।आज प्लेन औऱ क्रूज के सफर की बातें उन दिनों की याद दिलाती हैं।बच्चे ने दस हजार का मोबाइल गुमाया तो मां बोली, कोईबात नहीं, पापा दूसरा दिला देंगे।हमें अठन्नी पर मिली सजा याद आ गई।फिर भी आलम यह है कि आज भी हमारे सर मां-बाप के चरणों में श्रद्धा से झुकते हैं।औऱ हमारे बच्चे 'यार पापा,यार मम्मी' कहकर बात करते हैं।हम प्रगतिशील से प्रगतिवान हो गये हैं।कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन।।
लोग पत्नी का मजाक उड़ाते है। बीवी केनाम पर कई msg भेजते है उन सभी के लीये--------------Please Read This....A Lady's Simple Questions & Surely It WillTouch A Man's heart...------------------------देह मेरी ,हल्दी तुम्हारे नाम की ।हथेली मेरी ,मेहंदी तुम्हारे नाम की ।सिर मेरा ,चुनरी तुम्हारे नाम की ।मांग मेरी ,सिन्दूर तुम्हारे नाम का ।माथा मेरा ,बिंदिया तुम्हारे नाम की ।नाक मेरी ,नथनी तुम्हारे नाम की ।गला मेरा ,मंगलसूत्र तुम्हारे नाम का ।कलाई मेरी ,चूड़ियाँ तुम्हारे नाम की ।पाँव मेरे ,महावर तुम्हारे नाम की ।उंगलियाँ मेरी ,बिछुए तुम्हारे नाम के ।बड़ों की चरण-वंदनामै करूँ ,और 'सदा-सुहागन' का आशीषतुम्हारे नाम का ।और तो और -करवाचौथ/बड़मावस के व्रत भीतुम्हारे नाम के ।यहाँ तक किकोख मेरी/ खून मेरा/ दूध मेरा,और बच्चा ?बच्चा तुम्हारे नाम का ।घर के दरवाज़े पर लगी'नेम-प्लेट' तुम्हारे नाम की ।और तो और -मेरे अपने नाम के सम्मुखलिखा गोत्र भी मेरा नहीं,तुम्हारे नाम का ।सब कुछ तोतुम्हारे नाम का...Namrata se puchti hu?आखिर तुम्हारे पास...क्या है मेरे नाम का?एक लड़की ससुराल चली गई।कल की लड़की आज बहु बन गई.कल तक मौज करती लड़की,अब ससुराल की सेवा करना सीख गई.कल तक तो टीशर्ट और जीन्स पहनती लड़की,आज साड़ी पहनना सीख गई.पिहर में जैसे बहती नदी,आज ससुराल की नीर बन गई.रोज मजे से पैसे खर्च करती लड़की,आज साग-सब्जी का भाव करना सीख गई.कल तक FULL SPEED स्कुटी चलाती लड़की,आज BIKE के पीछे बैठना सीख गई.कल तक तो तीन वक्त पूरा खाना खाती लड़की,आज ससुराल में तीन वक्तका खाना बनाना सीख गई.हमेशा जिद करती लड़की,आज पति को पूछना सीख गई.कल तक तो मम्मी से काम करवाती लड़की,आज सासुमां के काम करना सीख गई.कल तक भाई-बहन के साथझगड़ा करती लड़की,आज ननद का मान करना सीख गई.कल तक तो भाभी के साथ मजाक करती लड़की,आज जेठानी का आदर करना सीख गई.पिता की आँख का पानी,ससुर के ग्लास का पानी बन गई.फिर लोग कहते हैं कि बेटी ससुराल जाना सीखगई.(यह बलिदान केवल लड़की ही करसकती है,इसिलिए हमेशा लड़की की झोलीवात्सल्य से भरी रखना...)बात निकली है तो दूर तक जानी चाहिये!!! और लड़कियो को सम्मान दे!Salute to all girls
"करता हूं अनुरोध आज मैं , भारत की सरकार से ," "प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से........." "वर्ना रेल पटरियों पर जो , फैला आज तमाशा है ," "जाट आन्दोलन से फैली , चारो ओर निराशा है........." "अगला कदम पंजाबी बैठेंगे , महाविकट हडताल पर ," "महाराष्ट में प्रबल मराठा , चढ़ जाएंगे भाल पर........." "राजपूत भी मचल उठेंगे , भुजबल के हथियार से ," "प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से.........""निर्धन ब्राम्हण वंश एक , दिन परशुराम बन जाएगा ," "अपने ही घर के दीपक से , अपना घर जल जाएगा........" "भडक उठा गृह युध्द अगर , भूकम्प भयानक आएगा ," "आरक्षण वादी नेताओं का , सर्वस्व मिटाके जायेगा........""अभी सम्भल जाओ मित्रों , इस स्वार्थ भरे व्यापार से ," "प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से........""जातिवाद की नही , समस्या मात्र गरीबी वाद है ," "जो सवर्ण है पर गरीब है , उनका क्या अपराध है........." "कुचले दबे लोग जिनके , घर मे न चूल्हा जलता है ," "भूखा बच्चा जिस कुटिया में , लोरी खाकर पलता है........""समय आ गया है उनका , उत्थान कीजिये प्यार से ," "प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से.........""जाति गरीबी की कोई भी , नही मित्रवर होती है ," "वह अधिकारी है जिसके घर , भूखी मुनिया सोती है........""भूखे माता-पिता , दवाई बिना तडपते रहते है ," "जातिवाद के कारण , कितने लोग वेदना सहते है........." "उन्हे न वंचित करो मित्र , संरक्षण के अधिकार से ," "प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से........."भारत माता की जय
बाज लगभग 70 वर्ष जीता है ....परन्तु अपने जीवन के 40वें वर्ष में आते-आते उसे एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना पड़ता है ।उस अवस्था में उसके शरीर के3 प्रमुख अंग निष्प्रभावी होने लगते हैं .....पंजे लम्बे और लचीले हो जाते है, तथा शिकार पर पकड़ बनाने में अक्षम होने लगते हैं ।चोंच आगे की ओर मुड़ जाती है,और भोजन में व्यवधान उत्पन्न करने लगती है ।पंख भारी हो जाते हैं, और सीने से चिपकने के कारण पूर्णरूप से खुल नहीं पाते हैं, उड़ान को सीमित कर देते हैं ।भोजन ढूँढ़ना, भोजन पकड़ना,और भोजन खाना .. तीनों प्रक्रियायें अपनी धार खोने लगती हैं ।उसके पास तीन ही विकल्प बचते हैं....1. देह त्याग दे,2. अपनी प्रवृत्ति छोड़ गिद्ध की तरह त्यक्त भोजन पर निर्वाह करे !!3. या फिर "स्वयं को पुनर्स्थापित करे" !!आकाश के निर्द्वन्द एकाधिपति के रूप में.जहाँ पहले दो विकल्प सरल और त्वरित हैं, अंत में बचता है तीसरा लम्बा और अत्यन्त पीड़ादायी रास्ता ।बाज चुनता है तीसरा रास्ता ..और स्वयं को पुनर्स्थापित करता है ।वह किसी ऊँचे पहाड़ पर जाता है, एकान्त में अपना घोंसला बनाता है ..और तब स्वयं को पुनर्स्थापित करने की प्रक्रिया प्रारम्भ करता है !!सबसे पहले वह अपनी चोंच चट्टान पर मार मार कर तोड़ देता है,चोंच तोड़ने से अधिक पीड़ादायक कुछ भी नहीं है पक्षीराज के लिये !और वह प्रतीक्षा करता हैचोंच के पुनः उग आने का ।उसके बाद वह अपने पंजे भी उसी प्रकार तोड़ देता है,और प्रतीक्षा करता है ..पंजों के पुनः उग आने का ।नयी चोंच और पंजे आने के बाद वह अपने भारी पंखों को एक-एक कर नोंच कर निकालता है !और प्रतीक्षा करता है ..पंखों के पुनः उग आने का ।150 दिन की पीड़ा और प्रतीक्षा के बाद ...मिलती है वही भव्य और ऊँची उड़ान पहले जैसी....इस पुनर्स्थापना के बादवह 30 साल और जीता है ....ऊर्जा, सम्मान और गरिमा के साथ ।इसी प्रकार इच्छा, सक्रियता और कल्पना, तीनों निर्बल पड़ने लगते हैं हम इंसानों में भी !हमें भी भूतकाल में जकड़ेअस्तित्व के भारीपन को त्याग कर कल्पना की उन्मुक्त उड़ाने भरनी होंगी ।150 दिन न सही.....60 दिन ही बिताया जायेस्वयं को पुनर्स्थापित करने में !जो शरीर और मन से चिपका हुआ है, उसे तोड़ने औरनोंचने में पीड़ा तो होगी ही !!और फिर जब बाज की तरह उड़ानें भरने को तैयार होंगे ..इस बार उड़ानें और ऊँची होंगी,अनुभवी होंगी, अनन्तगामी होंगी ।हर दिन कुछ चिंतन किया जाएऔर आप ही वो व्यक्ति हेजो खुद को दुसरो से बेहतर जानते है ।सिर्फ इतना निवेदन की निष्पक्षता के साथ छोटी-छोटी शुरुवात करें परिवर्तन करने की ।विचार कर जीवन में आत्मसात कर लेने वाला है यह संदेश....."*AlwayS be Positive & Progressive..