रविवार, 14 अगस्त 2016

70 साल आजादी के
जरा याद करो कुर्बानी
– लाला लाजपत राधाकृष्ण राय (अग्रवाल)
जन्म – 28 जनवरी 1865.
जन्मस्थान – धुडेकी (जि. फिरोजपुर, पंजाब)
पिता – राधाकृष्ण जी गर्ग
माता – गुलाब देवी.
शिक्षा – *1880 में कलकत्ता और पंजाब विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण. *
1886 में कानून की उपाधि ली।
लालाजी ने 30 अक्टूबर 1928 को लाहौर में साइमन कमीशन का बहिष्कार करने वाली जनता का शांतिपूर्ण ढंग से नेतृत्व किया. लाठियों के प्रहार के फलस्वरूप लाला जी को गंभीर चोंटे आई और 16 नवम्बर 1929 को रात में उनकी दशा ख़राब होने से प्रातः उनकी मृत्यु हो गयी.
ऐसे महापुरुष को हमारा शत शत नमन.
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻💐💐
सभी कर्मचारी व आम नागरीक इतनी जानकारी जरूर रखें-
भारत का राष्ट्रीय ध्वज - तिरंगा
भारत का राष्ट्रीय गान - जन-गन-मन
भारत का राष्ट्रीय गीत - वन्दे मातरम्
भारत का राष्ट्रीय चिन्ह - अशोक स्तम्भ
भारत का राष्ट्रीय पंचांग - शक संवत
भारत का राष्ट्रीय वाक्य - सत्यमेव जयते
भारत की राष्ट्रीयता - भारतीयता
भारत की राष्ट्र भाषा - हिंदी
भारत की राष्ट्रीय लिपि - देव नागरी
भारत का राष्ट्रीय ध्वज गीत - हिंद देश
का प्यारा झंडा
भारत का राष्ट्रीय नारा - श्रमेव जयते
भारत की राष्ट्रीय विदेशनीति -गुट निरपेक्ष
भारत का राष्ट्रीय पुरस्कार - भारत रत्न
भारत का राष्ट्रीय सूचना पत्र - श्वेत पत्र
भारत का राष्ट्रीय वृक्ष - बरगद
भारत की राष्ट्रीय मुद्रा - रूपया
भारत की राष्ट्रीय नदी - गंगा
भारत का राष्ट्रीय पक्षी - मोर
भारत का राष्ट्रीय पशु - बाघ
भारत का राष्ट्रीय फूल - कमल
भारत का राष्ट्रीय फल - आम
भारत की राष्ट्रीय योजना - पञ्च वर्षीय योजना
भारत का राष्ट्रीय खेल - हॉकी
भारत की राष्ट्रीय मिठाई - जलेबी
भारत के राष्ट्रीय पर्व 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) और 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस

शनिवार, 13 अगस्त 2016

🌻 *थाइराइड का अचूक उपचार*🌻

...

आज के समय में ज़्यादातर लोगों को थाइराइड की समस्या है, इसके कारण सैकड़ों बीमारियां घेर लेती है।
मोटापा इसी के कारण बढ़ जाता है।
लोग दवा खाते रहते हैं लेकिन ये ठीक नही होता।
*इसलिए दवा के साथ कुछ नियम जान लें 10 दिन में थाइराइड से आराम मिल जायेगा।*

✍1: घर से रिफाइंड तेल बिलकुल हटा दीजिये, न सोयाबीन न सूरजमुखी, भोजन के लिए सरसों का तेल, तिल का तेल या देशी घी का प्रयोग करें।

✍2: आयोडीन नमक के नाम से बिकने वाला ज़हर बंद करके सेंधा नमक का प्रयोग करें, समुद्री नमक BP, थाइराइड, त्वचा रोग और हार्ट के रोगों को जन्म देता है।

✍3: दाल बनाते समय सीधे कुकर में दाल डाल कर सीटी न लगाएं, पहले उसे खुला रखें, जब एक उबाल आ जाये तब दाल से फेना जैसा निकलेगा, उसे किसी चमचे से निकाल कर फेंक दें, फिर सीटी लगा कर दाल पकाएं।

*इन तीन उपायों को अगर अपना लिया तो पहले तो किसी को थाइराइड होगा नही और अगर पहले से है तो दवा खा कर 10 दिन में ठीक हो जायेगा।*


✍ *थाइराइड की दवा:*

2 चम्मच गाजर का रस
3 चम्मच खीरे का रस
1 चम्मच पिसी अलसी

तीनो को आपस में मिला कर सुबह खाली पेट खा लें।
इसे खाने के आधे घंटे बाद तक कुछ नही खाना है।

ये इलाज़ रोज सुबह खाली पेट कर लें 7 दिन में परिणाम देख लें।

और साथ मैं *नोनी और फ़्लेक्स आयल*का सेवन का सद्पयोग कर इस बीमारी को जड़ से ख़त्म किया जा सकता है

*आओ स्वस्थ भारत के निर्माण मैं अपना सहयोग प्रदान करे*


शुक्रवार, 12 अगस्त 2016

*एक बार मैने मॉ गंगा से पुछा -*
"हे माता, आप लाखों वर्षों से लोगों के पाप धो रही हैं | आखिर आप इतने सारे पापों का क्या करती हैं ?"
मां गंगा बोली. *"मै सारे पाप समुद्र मे डाल देती हुं |"*
मैने समुद्र से पुछा - *"आप क्या करते हैं इतने पापों का ?"*
समुद्र ने जवाब दिया. *"मै सारे पाप बादलों को सौंप देता हूं |"*
मैने बादलों को पुछा - *"आप कहां ले जाते हैं, इतने पापों को ?"*
*"मै उऩहे पानी बनाकर वहीं बरसा देता हूं, जहां से वो आए थे |"*
बादलों ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया |
*The Moral thing is:-* कुदरत हमे वही लौटाती है, जो हम उसे देते हैं |
*एक बार मैने मॉ गंगा से पुछा -*
"हे माता, आप लाखों वर्षों से लोगों के पाप धो रही हैं | आखिर आप इतने सारे पापों का क्या करती हैं ?"
मां गंगा बोली. *"मै सारे पाप समुद्र मे डाल देती हुं |"*
मैने समुद्र से पुछा - *"आप क्या करते हैं इतने पापों का ?"*
समुद्र ने जवाब दिया. *"मै सारे पाप बादलों को सौंप देता हूं |"*
मैने बादलों को पुछा - *"आप कहां ले जाते हैं, इतने पापों को ?"*
*"मै उऩहे पानी बनाकर वहीं बरसा देता हूं, जहां से वो आए थे |"*
बादलों ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया |
*The Moral thing is:-* कुदरत हमे वही लौटाती है, जो हम उसे देते हैं |

गुरुवार, 11 अगस्त 2016

**Really Very Nice**
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जो चाहा
कभी पाया नहीं,

जो पाया
कभी सोचा नहीं,

जो सोचा
कभी मिला नहीं,

जो मिला
रास आया नहीं,

जो खोया
वो याद आता है,

पर जो पाया
संभाला जाता नहीं ,

क्यों
अजीब सी पहेली है ज़िन्दगी,

जिसको
कोई सुलझा पाता नहीं...

जीवन में
कभी समझौता करना पड़े
तो कोई बड़ी बात नहीं है,

क्योंकि,

झुकता वही है
जिसमें जान होती है,

अकड़ तो
मुरदे की पहचान होती है।


ज़िन्दगी जीने के
दो तरीके होते है!

पहला:
जो पसंद है
उसे हासिल करना सीख लो.!

दूसरा:
जो हासिल है
उसे पसंद करना सीख लो.!


जिंदगी जीना
आसान नहीं होता;

बिना संघर्ष
कोई महान नहीं होता.!


जिंदगी
बहुत कुछ सिखाती है;

कभी हंसती है
तो कभी रुलाती है;

पर जो हर हाल में खुश रहते हैं;

जिंदगी उनके आगे
सर झुकाती है।

चेहरे की हंसी से
हर गम चुराओ;

बहुत कुछ बोलो
पर कुछ ना छुपाओ;

खुद ना रूठो कभी
पर सबको मनाओ;

राज़ है ये जिंदगी का
बस जीते चले जाओ।



"गुजरी हुई जिंदगी
 कभी याद न कर,

तकदीर मे जो लिखा है
उसकी फर्याद न कर...

जो होगा वो होकर रहेगा,


तु कल की फिकर मे
अपनी आज की हसी
बर्बाद न कर...


 हंस मरते हुये भी गाता है
और मोर नाचते हुये भी
रोता है....

ये जिंदगी का फंडा है बॉस

दुखो वाली रात
निंद नही आती

और खुशी वाली रात
कौन सोता है...
          🌾🌾🌾
ईश्वर का दिया
कभी अल्प नहीं होता;

जो टूट जाये
वो संकल्प नहीं होता;

हार को
लक्ष्य से दूर ही रखना;

क्योंकि जीत का
कोई विकल्प नहीं होता।
           🌾🌾🌾
जिंदगी में दो चीज़ें
हमेशा टूटने के लिए ही होती हैं :

"सांस और साथ"

सांस टूटने से तो
इंसान 1 ही बार मरता है;

पर किसी का साथ टूटने से
इंसान पल-पल मरता है।
           🌾🌾🌾
जीवन का
सबसे बड़ा अपराध -

किसी की आँख में आंसू
आपकी वजह से होना।

और जीवन की
सबसे बड़ी उपलब्धि -

किसी की आँख में आंसू
आपके लिए होना।
            🌾🌾🌾
जिंदगी जीना
आसान नहीं होता;

बिना संघर्ष
कोई महान नहीं होता;

जब तक न पड़े
हथोड़े की चोट;

पत्थर भी
भगवान नहीं होता।
           🌾🌾🌾
जरुरत के मुताबिक जिंदगी जिओ
ख्वाहिशों के मुताबिक नहीं।,

क्योंकि जरुरत तो
फकीरों की भी पूरी हो जाती है;

और ख्वाहिशें बादशाहों की भी
अधूरी रह जाती है।
          🌾🌾🌾

मनुष्य सुबह से शाम तक
काम करके उतना नहीं थकता;

जितना क्रोध और चिंता से
एक क्षण में थक जाता है।
            🌾🌾🌾
दुनिया में
कोई भी चीज़ अपने आपके लिए
नहीं बनी है।

जैसे: दरिया
खुद अपना पानी नहीं पीता।

पेड़ -
खुद अपना फल नहीं खाते।

सूरज -
अपने लिए हररात नहीं देता।

फूल -
अपनी खुशबु
अपने लिए नहीं बिखेरते।

मालूम है क्यों?

क्योंकि दूसरों के लिए ही
जीना ही असली जिंदगी है।
           🌾🌾🌾
मांगो
तो अपने रब से मांगो;

जो दे तो रहमत
और न दे तो किस्मत;

लेकिन दुनिया से
हरगिज़ मत माँगना;

क्योंकि दे तो एहसान
और न दे तो शर्मिंदगी।
           🌾🌾🌾
कभी भी
'कामयाबी' को दिमाग

और 'नकामी' को दिल में
जगह नहीं देनी चाहिए।

क्योंकि,

कामयाबी
दिमाग में घमंड
और नकामी दिल में
मायूसी पैदा करती है।
           🌾🌾🌾
कौन देता है
उम्र भर का सहारा।,

लोग तो जनाज़े में भी
कंधे बदलते रहते हैं।
           🌾🌾🌾
कोई व्यक्ति
कितना ही महान क्यों न हो,

आंखे मूंदकर
उसके पीछे न चलिए।

यदि ईश्वर की
ऐसी ही मंशा होती
तो वह हर प्राणी को
आंख,
नाक,
कान,
मुंह,
मस्तिष्क आदि क्यों देता?




💦
Nice Lines
By Gulzar Sahab:-
🌀💦🌀💦🌀💦🌀
पानी से
तस्वीर कहा बनती है,

ख्वाबों से
तकदीर कहा बनती है,

किसी भी रिश्ते को
सच्चे दिल से निभाओ,

ये जिंदगी
फिर वापस कहा मिलती है,

कौन किस से
चाहकर दूर होता है,

हर कोई अपने हालातों से
मजबूर होता है,

हम तो
बस इतना जानते है,

हर रिश्ता "मोती"
और हर दोस्त
"कोहिनूर" 💎 होता है।

बुधवार, 10 अगस्त 2016



एक प्रोफ़ेसर कक्षा में आये और उन्होंने छात्रों से कहा कि वे आज जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढाने वाले हैं ...

उन्होंने अपने साथ लाई एक काँच की बडी बरनी ( जार ) टेबल पर रखा और उसमें टेबल टेनिस की गेंदें डालने लगे और तब तक डालते रहे जब तक कि उसमें एक भी गेंद समाने की जगह नहीं बची ...

उन्होंने छात्रों से पूछा - क्या बरनी पूरी भर गई ?

हाँ ... आवाज आई ...

फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने छोटे - छोटे कंकर उसमें भरने शुरु किये धीरे - धीरे बरनी को हिलाया तो काफ़ी सारे कंकर उसमें जहाँ जगह खाली थी , समा गये ,

फ़िर से प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्या अब बरनी भर गई है , छात्रों ने एक बार फ़िर हाँ ... कहा

अब प्रोफ़ेसर साहब ने रेत की थैली से हौले - हौले उस बरनी में रेत डालना शुरु किया , वह रेत भी उस जार में जहाँ संभव था बैठ गई , अब छात्र अपनी नादानी पर हँसे ...

फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्यों अब तो यह बरनी पूरी भर गई ना ? हाँ .. अब तो पूरी भर गई है .. सभी ने एक स्वर में कहा ..

सर ने टेबल के नीचे से चाय के दो कप निकालकर उसमें की चाय जार में डाली , चाय भी रेत के बीच स्थित
थोडी सी जगह में सोख ली गई ...

प्रोफ़ेसर साहब ने गंभीर आवाज में समझाना शुरु किया

इस काँच की बरनी को तुम लोग अपना जीवन समझो ....

टेबल टेनिस की गेंदें सबसे महत्वपूर्ण भाग अर्थात भगवान , परिवार , बच्चे , मित्र , स्वास्थ्य और शौक हैं ,

छोटे कंकर मतलब तुम्हारी नौकरी , कार , बडा़ मकान आदि हैं , और

रेत का मतलब और भी छोटी - छोटी बेकार सी बातें , मनमुटाव , झगडे़ है ..

अब यदि तुमने काँच की बरनी में सबसे पहले रेत भरी होती तो टेबल टेनिस की गेंदों और कंकरों के लिये जगह ही नहीं बचती , या कंकर भर दिये होते तो गेंदें नहीं भर पाते , रेत जरूर आ सकती थी ...

ठीक यही बात जीवन पर लागू होती है ...

यदि तुम छोटी - छोटी बातों के पीछे पडे़ रहोगे और अपनी ऊर्जा उसमें नष्ट करोगे तो तुम्हारे पास मुख्य बातों के लिये अधिक समय नहीं रहेगा ...

मन के सुख के लिये क्या जरूरी है ये तुम्हें तय करना है । अपने बच्चों के साथ खेलो , बगीचे में पानी डालो , सुबह पत्नी के साथ घूमने निकल जाओ , घर के बेकार सामान को बाहर निकाल फ़ेंको , मेडिकल चेक - अप करवाओ ...

टेबल टेनिस गेंदों की फ़िक्र पहले करो , वही महत्वपूर्ण है ... पहले तय करो कि क्या जरूरी है ... बाकी सब तो रेत है ..

छात्र बडे़ ध्यान से सुन रहे थे ..

अचानक एक ने पूछा , सर लेकिन आपने यह नहीं बताया कि " चाय के दो कप " क्या हैं ?

प्रोफ़ेसर मुस्कुराये , बोले .. मैं सोच ही रहा था कि अभी तक ये सवाल किसी ने क्यों नहीं किया ...

इसका उत्तर यह है कि , जीवन हमें कितना ही परिपूर्ण और संतुष्ट लगे , लेकिन अपने खास मित्र के साथ दो कप चाय पीने की जगह हमेशा होनी चाहिए।