सोमवार, 7 सितंबर 2020

*दोस्त अब थकने लगे है*किसीका *पेट* निकल आया है,किसीके *बाल* पकने लगे है...सब पर भारी *ज़िम्मेदारी* है,सबको छोटी मोटी कोई *बीमारी* है।दिनभर जो *भागते दौड़ते* थे,वो अब चलते चलते भी *रुकने* लगे है।पर ये हकीकत है,सब दोस्त *थकने* लगे है...1किसी को *लोन* की फ़िक्र है,कहीं *हेल्थ टेस्ट* का ज़िक्र है।फुर्सत की सब को कमी है,आँखों में अजीब सी नमीं है।कल जो प्यार के *ख़त लिखते* थे,आज *बीमे के फार्म* भरने में लगे है।पर ये हकीकत है सब दोस्त थकने लगे है....2देख कर *पुरानी तस्वीरें*,आज जी भर आता है।क्या अजीब शै है ये वक़्त भी,किस तरहा ये गुज़र जाता है।कल का *जवान* दोस्त मेरा,आज *अधेड़* नज़र आता है...*ख़्वाब सजाते* थे जो कभी ,आज *गुज़रे दिनों में खोने* लगे है।पर ये हकीकत है सब दोस्त थकने लगे है...

शुक्रवार, 4 सितंबर 2020

*एक दोस्त हलवाई की दुकान पर मिल गया ।* मुझसे कहा- ‘आज माँ का श्राद्ध है, माँ को लड्डू बहुत पसन्द है, इसलिए लड्डू लेने आया हूँ ' मैं आश्चर्य में पड़ गया । अभी पाँच मिनिट पहले तो मैं उसकी माँ से सब्जी मंडी में मिला था । मैं कुछ और कहता उससे पहले ही खुद उसकी माँ हाथ में झोला लिए वहाँ आ पहुँची । मैंने दोस्त की पीठ पर मारते हुए कहा- 'भले आदमी ये क्या मजाक है ? माँजी तो यह रही तेरे पास ! दोस्त अपनी माँ के दोनों कंधों पर हाथ रखकर हँसकर बोला, ‍'भई, बात यूँ है कि मृत्यु के बाद गाय-कौवे की थाली में लड्डू रखने से अच्छा है कि माँ की थाली में लड्डू परोसकर उसे जीते-जी तृप्त करूँ । मैं मानता हूँ कि जीते जी माता-पिता को हर हाल में खुश रखना ही सच्चा श्राद्ध है । आगे उसने कहा, 'माँ को मिठाई, सफेद जामुन, आम आदि पसंद है मैं वह सब उन्हें खिलाता हूँ । श्रद्धालु मंदिर में जाकर अगरबत्ती जलाते हैं । मैं मंदिर नहीं जाता हूँ, पर माँ के सोने के कमरे में कछुआ छाप अगरबत्ती लगा देता हूँ सुबह जब माँ गीता पढ़ने बैठती है तो माँ का चश्मा साफ कर के देता हूँ । मुझे लगता है कि ईश्वर के फोटो व मूर्ति आदि साफ करने से ज्यादा पुण्य माँ का चश्मा साफ करके मिलता है यह बात श्रद्धालुओं को चुभ सकती है पर बात खरी है । हम बुजुर्गों के मरने के बाद उनका श्राद्ध करते हैं । पंडितों को खीर-पुरी खिलाते हैं । रस्मों के चलते हम यह सब कर लेते है, पर याद रखिए कि गाय-कौए को खिलाया ऊपर पहुँचता है या नहीं, यह किसे पता । अमेरिका या जापान में भी अभी तक स्वर्ग के लिए कोई टिफिन सेवा शुरू नही हुई है । *माता-पिता को जीते-जी ही सारे सुख देना वास्तविक श्राद्ध है ॥*

गुरुवार, 3 सितंबर 2020

*भगवान कहाँ है....?*मैं कईं दिनों से बेरोजगार था , एक एक रूपये की कीमत जैसे करोड़ों लग रही थी , इस उठापटक में था कि कहीं नौकरी लग जाए। आज एक इंटरव्यू था , पर दूसरे शहर जाने के लिए जेब में सिर्फ दस रूपये थे . मुझे कम से कम दो सौ रुपयों की जरूरत थी। अपने इकलौते इन्टरव्यू वाले कपड़े रात में धो, पड़ोसी की प्रेस माँग के तैयार कर पहन, अपने योग्यताओं की मोटी फाइल बगल में दबाकर दो बिस्कुट खा के निकला। लिफ्ट ले पैदल जैसे तैसे चिलचिलाती धूप में तरबतर बस इस उम्मीद में स्टेंड पर पहुँचा कि शायद कोई पहचान वाला मिल जाए , जिससे सहायता लेकर इन्टरव्यू के स्थान तक पहुँच सकूँ।काफी देर खड़े रहने के बाद भी कोई नहीं दिखा। मन में घबराहट और मायूसी थी , क्या करूँगा अब कैसे पँहुचूगा ? पास के मंदिर पर जा पहुंचा , दर्शन कर सीढ़ियों पर बैठा था। मेरे पास में ही एक फकीर बैठा था , उसके कटोरे में मेरी जेब और बैंक एकाउंट से भी ज्यादा पैसे पड़े थे।मेरी नजरें और हालात समझ के बोला , "कुछ मदद चाहिए क्या ?" मैं बनावटी मुस्कुराहट के साथ बोला , "आप क्या मदद करोगे ?"*"चाहो तो मेरे पूरे पैसे रख लो ." वो मुस्कुराता बोला . मैं चौंक गया ! उसे कैसे पता मेरी जरूरत?मैनें कहा "क्यों"?"शायद आपको जरूरत है" वो गंभीरता से बोला। "हाँ है तो , पर तुम्हारा क्या , तुम तो दिन भर माँग के कमाते हो ?" मैने उस का पक्ष रखते हुए कहा .*वो हँसता हुआ बोला , "मैं नहीं माँगता साहब ! लोग डाल जाते हैं मेरे कटोरे में, पुण्य कमाने के लिए। मैं तो फकीर हूँ , मुझे इनका कोई मोह नहीं . मुझे सिर्फ भूख लगती है , वो भी एक टाइम . और कुछ दवाइयाँ . बस! मैं तो खुद ये सारे पैसे मंदिर की पेटी में डाल देता हूँ ." वो सहज था कहते कहते। मैनें हैरानी से पूछा , "फिर यहाँ बैठते क्यों हो..?" "जरूरतमंदों की मदद करने" कहते हुए वो मंद मंद मुस्कुरा रहा था।मैं उसका मुँह देखता रह गया। उसने दो सौ रुपये मेरे हाथ पर रख दिए और बोला , "जब हो तब लौटा देना।" मैं उसका शुक्रिया जताता हुआ वहाँ से अपने गंतव्य तक पँहुचा . मेरा इंटरव्यू हुआ , और सलेक्शन भी। मैं खुशी खुशी वापस आया, सोचा उस फकीर को धन्यवाद दे दूँ।मैं मंदिर पँहुचा , बाहर सीढ़़ियों पर भीड़ लगी थी , मैं घुस के अंदर पँहुचा , देखा वही फकीर मरा पड़ा था। मैं भौंचक्का रह गया ! मैने दूसरों से पूछा यह कैसे हुआ ?पता चला , वो किसी बीमारी से परेशान था . सिर्फ दवाईयों पर जिन्दा था . आज उसके पास दवाइयाँ नहीं थी और न उन्हें खरीदने के पैसे। मैं अवाक् सा उस फकीर को देख रहा था। अपनी दवाईयों के पैसे वो मुझे दे गया था जिन पैसों पे उसकी जिंदगी का दारोमदार था। उन पैसों से मेरी ज़िंदगी बना दी थी। भीड़ में से कोई बोला , अच्छा हुआ मर गया ये भिखारी भी साले बोझ होते हैं , कोई काम के नहीं।मेरी आँखें डबडबा आयी!*वो भिखारी कहाँ था , वो तो मेरे** लिए भगवान ही था।नेकी का फरिश्ता। मेरा भगवान! *भगवान कौन हैं ? कहाँ हैं ?* *किसने देखा है ? बस ! इसी* *तरह मिल जाते हैं।**हे! मेरे प्रभु आपको कोटी कोटी प्रणाम* ✨🌷🙏🌷

*Vacancy**तुरन्त आवश्यकता है*1- *एक इलेक्ट्रिशियन* : जो ऐसे दो व्यक्तियों के बीच कनेक्शन कर सके जिनकी आपस में बातचीत बन्द है।2- *एक ऑप्टिशियन* : जो लोगों की दृष्टि के साथ दृष्टिकोण में भी सुधार कर सके।3- *एक चित्रकार* : जो हर व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान की रेखा खींच सके।4- *एक राज मिस्त्री* : जो दो पड़ोसियों के बीच पुल बनाने में सक्षम हो।5- *एक माली* : जो अच्छे विचारों का रोपण करना जानता हो।6- *एक प्लम्बर* : जो टूटे हुए रिश्तों को जोड़ सके।7- *एक वैज्ञानिक* : जो दो व्यक्तियों के बीच ईगो का इलाज खोज सके।*और सबसे महत्वपूर्ण*8- *एक शिक्षक* : जो एक दूसरे के साथ विचारों का सही आदान प्रदान करना सिखा सके।9- *एक डॉक्टर* : जो सब के दिलों में से नफरत, जलन, क्रोध निकाल कर स्नेह और भाईचारा ट्रांसप्लांट कर दे।10- *एक जज* : जो धर्म, जाति, पैसा के वर्चस्व को समाप्त कर मानवता और समानता के आधार पर न्याय कर सके।*आज इन सभी व्यक्ति की देश समाज और व्यक्ति को अत्यन्त ही आवश्यकता है*

*मुस्लिमों की जातियाँ कितनी होती हैं *.How much is the castes of muslims *इस्लाम में कितनी जातिया हैं । हमने जब स्वाध्याय किया तो इस रेगिस्तानी धर्म में इस्लामी जातियों की लंबी फेहरिस्त (सूची) निकली।**आइये एक नज़र डालें....*1-महकमिय्या 2-अजराकिया 3-आयुजि 4-नजरात 5-असफरिया 6-अबाजिया 7-अहसाम्य्या 8-बहशिस्यह 9-नागलियाह 10-अजजदह 11-अख्वास्या 12-शैबानीयह्ह् 13-मकराम्या 14-वासलिय्या 15-हज़ेलिया 16-नजामिया 17-अस्वारिया 18-अस्काफिया 19-मज्वारिया 20-बशरिया 21-अस्मरिया 22-हसामिया 23-साल्जियह 24 हाबतिया 25-मुकमरिया 26-समामिया 27-जाख्तिया 28-हरीबा 29-जाफरिया 30-बहशमिया 31-जबानिया 32-कबेया 33-ख्यातेया 34-गरसानिया 35-सोबानिया 36-सोबेया 37-अहदया 38-बर्गोसिया 39-नाफेरानिया 40-ब्यानिया 41-मुगिरिया 42-कामलिया 43-मंसूरिया 44-खताबिया 45-अजआबिया 46-जमिया 47-मुस्तदरिकिया48-मुजसामिया 49-करामिया 50-जाहिमिया 51-हनफिया 52-मालकिय्या 53-शाफ्या 54-हम्बिलिया 55-सूफिया 56-दावड़िया 57-सबाइया 58-मफज़जलिया 59-जारिया60-इशहकिया 61-शेतानिया 62-मफुजिया 63-कसानिया 64-रजानिया 65-इस्माइल्लिया66-नासिरिया 67-जैदिया 68-नारुसिया 69-अहफटया 70-वाकफीफीया 71-गलात72-हशविया 73-उल्वेया 74-अबड़िया 75-शमसिया 76-अब्बासिया 77-इमामिया78-नावस्या 79-तनासुख्या 80-मूर्तजिया 81-राजइय्या82-खलिफिया 83-कंजिया 84-हज़तरिया 85-मोतजलिया 86-मैमुनिया 87-अफालिया 88-माबिया 89-तारक्या 90-नजमैमुनिया 91-हज़तिया 92-कंदरिया 93-अहरिया 94-वहमिय्या 95-मोटलिया 96-मुतरआ बसिया 97-मुतरफिया 98-मखलुखिया 99-मुतराफिया100-वबरिया101-मजिया 102-शाबाइया 103-अमालिया 104-मुस्तसिया105-मुशबह्य्या 106-सालमिया 107-कास्मिया 108-कनामिया 109-खारिजया 110-तर्किया 111-हज़ीमिया112-दहरिया 113-साआल्बिया 114-वहाबिया 115-नसारिया 116-मझुलिया 117-सलया 118-अख़बसया 119-बहसिया 120-समराख्या 121-अतबिया 122-गालिया 123-कतएया 124-कुर्बिया 125-मुहमदीया 126-हसनिया 127-क़राबतइया 128-मुबारिकिया 129-श्मतिया 130-अमारिया 131-मख्तुरिया 132-मोसुमिया 133-नानेया 134-तयारिया 135-यतरायह 136-सैरफिया137-सरीइयह 138-जारुदिया139-सुलेमनिया 140-तबारिया 141-नइमया 142-याक़ूबिया 143-शमरिया144-युनानिया 145-बखारिया 146-गेलिन्या 147-शाएबिया 148-समहाज़िया 149-मरसिया 150-हासमिया151-खरारिया 152-क्लाबिया 153-हालिया 154-बाटनिया155-अबाजिया 156-ब्राह्मिया 157-अशअरिया 158-सोफ्सतैया 159-फिलसफिया 160-समिनिया 161-मशाईन 162-अश्राकिन 163-अजुसियह 164-उम्बिया 165-वजीदीया 166-अलीळालाहिया167-सादकिया 168-फुरकानिया 169-फरुकिया 170-शेखिय्या 171-शम्ससया 172-सम्मिस्या173-फरकिया 174-नक़्शबंदिया 175-कादरिया 176-नेचीरिया 177-मिजाइय्या 178-आगखानिया179-शहर बदीया 180-चिश्तिया 181-क्रानिया 182-नजदीया183-बाबिया184-मवाहदीया वहाबी 185-राफजिया 186-नजिया 187-जस्तीया 188-इबारिया 189-जबरिया190-टबरिया 191-सल्फिया 192-अकलिया 193-सफत्या 194-तकलिया 195-मुट्सफिया 196-हमाओसत 197-शमाफिया 198-हफ्तइमामिया199-हश्तइमामिया200-अशन अशारिया201-अखबारिय्यिन 202-मुतकल्लमिन 203-मुत्सररइन 204-रोशनियां 205-कोकबिया 206-तबकुमिया 207-अर्शेआसेयानी 208-तातिलिया 209 अन्सारिया 210-रखबिया 211-रहमानिया 212-रुहानिया 213-अन्नजिया 214-हबिबिया 215-अजिया 216-हबिरिया 217-सक्तिया 218-जनिदिया 219-जबिया 220-आरहिमिया 221-क्लद्रिया 222-फिरडोमिया 223-मदारिया 224-रजजिया 225-सफाइय्या 226-खाकिया 227-वादिया 228-तशनिया 229-आविया 230-तैकुरिया 231-दवाया 232-शैतारिया 233-तबकानिया 234-सय्यद जमालुद्दीन 235-मतबरिया 236-आर्गुनिया 237-आल्याया 238-गजिरुनिया 239-जाहडिया 240-तोबिया 241-कजिया 242-तशिरिया 243-हलालिया 244-नूरिया 245-एदुसिया 246-यस्विया 247-रफइय्या 248-मोइन्या 249-शकरगजिया 250-महबुने इलहिया 251-महमुदिया 252-फखरुदिनिया 253-नुरे मुहामादिया 254-वुनसुया 255-अल्लाहबक्षिया 256-हाफजिया 257-खिजरुया 258-कर्मनिया 259-करिमियऑ 260-जलिलिया 261-जमालिया 262-कुडिसिया263-साबरिया 264-मखदुमिया 265-हज़रूमिया266-निजामिया 267-अबूलअलैया 268-हसमिया चितस्या 269-निजमहिरिया270-बखारिया 271-हमजआशाही272-फखरिया 273-नायजिया274-जायइया 275-फक्रिया फरीदइया276-शमशिया सुलमानिया 277-फखरिया सुलमानिया 278-सुदुशाही 279-रजाकिया 280-वहाविया 281-नोशाही282-शय्येदशाही 283-हुस्सैनशाही284-कबिसिया 285-मुहम्मदशाही286-बहलोलशाही 287-हासशाही 288-सुदुशाही 289-मुकियशाही 290-महुवदशाही 291-कासिमशाही 292-नंतुल्लाहशाही 293-मिरशाही294-सुफियाहमीडिया 295-कंमसिय्या 296-दोलशाही 297-रसुलशाही298-सुहागशाही 299-सफबीय्या 300-लालशाही 301-बाजिया302-बुखारिया 303-कर्मजहलि 304-हबिबशाही 305-मूर्तज़शाही306-अब्दुलकरिमि307-इस्मैलशाही 308-हलिमशाही 309-रुजाकशाही 310-मिजाकशाही 311-संगरिया 312-अय्याजिया313-नासिरियापंडित*सत्यदेव काशी की पुस्तक इस्लाम के 313 फिरके पृष्ट 8 से 10 से साभार उद्घृत।**एक मौलाना से बातचीत मौलाना साहब जन्नत में कौन जायेंगे ?**मौलाना- मुसलमान**जी कौन मुसलमान ? शिया या सुन्नी ?**मौलाना- बेशक सुन्नी जनाब**जी सुन्नी में कौन ? मुकल्लिद या गैर-मुकल्लिद ?**मौलाना- मुकल्लिद और कौन.**जी मुकल्लिद में तो चार हैं उनमें से ?**मौलाना- हनफी और कौन ?**जी, पर हनफी में तो देबबंदी और बरेलवी दोनों हैं फिर उनमें..**मौलाना- देबबंदी**बहुत शुक्रिया, पर देबबंदी में भी तो हयाती और ममाती दोनों हैं, उनमें से कौन ??**इसके बाद मौलाना गायब हो गए वो दोबारा दिखे ही नहीं।

बुधवार, 2 सितंबर 2020

जलती रही जोहर में नारियां भेड़िये फ़िर भी मौन थे। हमें पढाया गया अकबर'' महान,तो फिर महाराणा प्रताप कौन थे।😇😇सड़ती रही लाशें सड़को पर गांधी फिर भी मौन थे,हमें पढ़ाया गांधी के चरखे से आजादी आयी,तो फांसी चढ़ने वाले 25-25 साल के वो जवान कौन थे 😇😇वो रस्सी आज भी संग्रहालय में हैजिस्से गांधीजी बकरी बांधा करते थेकिन्तु वो रस्सी कहां हैजिस पे भगत सिंह , सुखदेव और राजगुरु हसते हुए झूले थे😇😇" हालात.ए.मुल्क देख के रोया न गया...कोशिश तो की पर मूंह ढक के सोया न गया". जाने कितने झूले थे फाँसी पर,कितनो ने गोली खाई थी....क्यो झूठ बोलते हो साहब, कि चरखे से आजादी आई थी....😥😥😥😥😥😥मंगल पांडे को फाँसी❓तात्या टोपे को फाँसी❓रानी लक्ष्मीबाई को अंग्रेज सेना ने घेर कर मारा❓भगत सिंह को फाँसी❓सुखदेव को फाँसी❓राजगुरु को फाँसी❓चंद्रशेखर आजाद का एनकाउंटर अंग्रेज पुलिस द्वारा❓सुभाषचन्द्र बोस को गायब करा दिया गया❓भगवती चरण वोहरा बम विस्फोट में मृत्यु❓रामप्रसाद बिस्मिल को फाँसी❓अशफाकउल्लाह खान को फाँसी❓रोशन सिंह को फाँसी❓लाला लाजपत राय की लाठीचार्ज में मृत्यु❓वीर सावरकर को कालापानी की सजा❓चाफेकर बंधू (३ भाई) को फाँसी❓मास्टर सूर्यसेन को फाँसी❓ये तो कुछ ही नाम है जिन्होंने स्वतन्त्रता संग्राम और इस देश की आजादी में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया❓कई वीर ऐसे है हम और आप जिनका नाम तक नहीं जानते ❓एक बात समझ में आज तक नही आई कि भगवान ने गांधी और नेहरु को ऐसे कौन से कवच-कुण्डंल दिये थे❓जिसकी वजह से अग्रेंजो ने इन दोनो को फाँसी तो दूर, कभी एक लाठी तक नही मारी...❓उपर से यह दोनों भारत के बापू और चाचा बन गए और इनकी पीढ़ियाँ आज भी पूरे देश के उपर अपना पेंटेंट समझती है❓ *गहराई से सोचिए❓❓* 🙏🏻एक सच्चा 🇮🇳भारतीय🙏🏻

*जंगल के स्कूल का रिजल्ट 😗हुआ यूँ कि जंगल के राजा शेर ने ऐलान कर दिया कि अब आज के बाद कोई अनपढ़ न रहेगा। हर पशु को अपना बच्चा स्कूल भेजना होगा। राजा साहब का स्कूल पढ़ा-लिखाकर सबको Certificate बँटेगा।सब बच्चे चले स्कूल। हाथी का बच्चा भी आया, शेर का भी, बंदर भी आया और मछली भी, खरगोश भी आया तो कछुआ भी, ऊँट भी और जिराफ भी।FIRST UNIT TEST/EXAM हुआ तो हाथी का बच्चा फेल। अब हाथी की पेशी हुई स्कूल में, मास्टरनी बोली,"आपने पैदा करके मुसीबत छोड़ दिये हो मेरे लिये ? औलाद पर ध्यान दीजिए, फेल हो गए हैं। जनाब, इनके कारण मेरा रिजल्ट खराब होगा। तुम्हारे नालायक बेटे के कारण मेरा रिजल्ट खराब हो, ये मुझे मंजूर नहीं।" "किस Subject में फेल हो गया जी?" "पेड़ पर चढ़ने में फेल हो गया, हाथी का बच्चा।" "अब का करें?" "ट्यूशन रखाओ, कोचिंग में भेजो।" अब हाथी की जिन्दगी का एक ही मक़सद था कि हमारे बच्चे को पेड़ पर चढ़ने में Top कराना है।किसी तरह साल बीता। Final Result आया तो हाथी, ऊँट, जिराफ सब फेल हो गए। बंदर की औलाद first आयी। Principal ने Stage पर बुलाकर मैडल दिया। बंदर ने उछल-उछल के कलाबाजियाँ दिखाकर। गुलाटियाँ मार कर खुशी का इजहार किया। उधर अपमानित महसूस कर रहे हाथी, ऊँट और जिराफ ने अपने-अपने बच्चे कूट दिये। नालायकों, इतने महँगे स्कूल में पढ़ाते हैं तुमको, ट्यूशन-कोचिंग सब लगवाए हैं। फिर भी आज तक तुम पेड़ पर चढ़ना नहीं सीखे। सीखो, बंदर के बच्चे से सीखो कुछ, पढ़ाई पर ध्यान दो।फेल हालांकि मछली भी हुई थी। बेशक़ Swimming में First आयी थी पर बाकी subject में तो फेल ही थी। मास्टरनी बोली,"आपकी बेटी के साथ attendance की problem है।" मछली ने बेटी को ऑंखें दिखाई। बेटी ने समझाने की कोशिश की कि,"माँ, मेरा दम घुटता है इस स्कूल में। मुझे साँस ही नहीं आती। मुझे नहीं पढ़ना इस स्कूल में। हमारा स्कूल तो तालाब में होना चाहिये न?" नहीं, ये राजा का स्कूल है। तालाब वाले स्कूल में भेजकर मुझे अपनी बेइज्जती नहीं करानी। समाज में कुछ इज्जत Reputation है मेरी। तुमको इसी स्कूल में पढ़ना है। पढ़ाई पर ध्यान दो।"हाथी, ऊँट और जिराफ अपने-अपने Failure बच्चों को पीटते हुए ले जा रहे थे। रास्ते में बूढ़े बरगद ने पूछा,"क्यों पीट रहे हो, बच्चों को?" जिराफ बोला,"पेड़ पर चढ़ने में फेल हो गए?"बूढ़ा बरगद सबसे पते की बात बोला,"पर इन्हें पेड़ पर चढ़ाना ही क्यों है ?" उसने हाथी से कहा,"अपनी सूंड उठाओ और सबसे ऊँचा फल तोड़ लो। जिराफ तुम अपनी लंबी गर्दन उठाओ और सबसे ऊँचे पत्ते तोड़-तोड़ कर खाओ।" ऊँट भी गर्दन लंबी करके फल पत्ते खाने लगा। हाथी के बच्चे को क्यों चढ़ाना चाहते हो पेड़ पर।मछली को तालाब में ही सीखने दो न?*दुर्भाग्य से आज स्कूली शिक्षा का पूरा Curriculum और Syllabus सिर्फ बंदर के बच्चे के लिये ही Designed है। इस स्कूल में 35 बच्चों की क्लास में सिर्फ बंदर ही First आएगा। बाकी सबको फेल होना ही है। हर बच्चे के लिए अलग Syllabus, अलग subject और अलग स्कूल चाहिये।*हाथी के बच्चे को पेड़ पर चढ़ाकर अपमानित मत करो। जबर्दस्ती उसके ऊपर फेलियर का ठप्पा मत लगाओ। ठीक है, बंदर का उत्साहवर्धन करो पर शेष 34 बच्चों को नालायक, कामचोर, लापरवाह, Duffer, Failure घोषित मत करो। *मछली बेशक़ पेड़ पर न चढ़ पाये पर एक दिन वो पूरा समंदर नाप देगी।**शिक्षा - अपने बच्चों की क्षमताओं व प्रतिभा की कद्र करें चाहे वह पढ़ाई, खेल, नाच, गाने, कला, अभिनय, किसी भी क्षेत्र में हो और उन्हें उसी दिशा में अच्छा करने दे जरूरी नहीं की सभी बच्चे पढ़ने में ही अव्वल हो बस जरूरत हैं उनमें अच्छे संस्कार व नैतिक मूल्यों की जिससे बच्चे गलत रास्ते नहीं चुने l* 🙏🙏🙏🙏