Nice msg must readपिता बेटी के सर परहाथ रख कर बोला- मैं तेरेलिए ऐसा पतिखोजकर लाऊंगा जो तुझे बहुतप्यार करे,तेरी भवनाओं का सम्मानकरे,तेरे दुख सुख को समझ सके,तेरी आँखो में आँसू न आने दे,तेरी हर छोटी छोटीख्वाइशों को पूरा कर सके।बेटी ने पूछा : क्यो पापा?पिता बोला : बेटा हरबाप का सपना होता हैकीउसकी बेटी को राजकुमारजैसा पतिमिले जो उसे बहुत प्यार देऔरउसे हमेशा सुखी रखे।बेटी :-तो पापा नानाजी ने भी आपकोमम्मी का हाथ यहीसोचकर दियाहोगा न की आप भीराजकुमार हो।फिर आप मम्मी को हमेशाक्यो रुलाते हो?,कही बाहर भी नही लेजातेऔर प्यार भी नही करतेऔरहमेशा चिल्लाते रहते होतोक्या आप अच्छे वालेराजकुमार नही निकले?ये सुन पिता को एहसासहुआ कीमुझे भी किसी नेराजकुमारसमझ कर अपने कलेजेका टुकड़ा दिया और मैं खुदतोराजकुमार बना रहा परअपनीपत्नी को कभीराजकुमारी नही समझा।आज खुद बाप बंनने के बादएह्सास हुआ की अपने दिलके टुकड़े को सही हाथ मेनही सौपातो उसके दिल के टुकड़े होजायेगे जो कोई भी बापनही सहेगा।इसलिए जैसा आप अपनीबेटीके लिए सोचते है वैसा हीअपनीपत्नी के लिए सोचिये।आखिर वो भी किसी कीबेटी है,किसी का आँख का ताराहै।उसे दुख होगा तो उसकेपिता कोभी दुख होगा।कृपया कर अपनी घर कीऔरतों को भी इज़्ज़त औरप्यार दीजिए वोभी किसी की बेटी है।
बुधवार, 29 जून 2016
सोमवार, 27 जून 2016
फ्रीज़ किए गए नींबू के आश्चर्यजनक परिणाम🍋🍋🍋🍋🍋🍋🍋🍋🍋🍋सबसे पहले नींबू को धोकर फ्रीज़र में रखिए । ८ से १० घंटे बाद वह बर्फ़ जैसा ठंडा तथा कड़ा हो जाएगा । अब उपयोग मे लाने के लिए उसे कद्दूकस कर लें ।इसे आप जो भी खाएँ उस पर डाल कर इसे खा सकते हैं ।इससे खाद्य पदार्थ में एक अलग ही टेस्ट आऐगा ।नीबू के रस में विटामिन सी होता है। ये आप जानते हैंआइये देखें इसके और क्या-क्या फायदे हैं ।🍋नीबू के छिलके में ५ से १० गुना अधिक विटामिन सी होता है और वही हम फेंक देते हैं ।🍋नींबू के छिलके में शरीर कॆ सभी विषेले द्रव्यों को बाहर निकालने कि क्षमता होती है ।🍋नींबू का छिलका कैंसर का नाश करता है ।इसका छिलका कैमोथेरेपी से १०,००० गुना ज्यादा प्रभावी है ।🍋यह बैक्टेरियल इन्फेक्शन, फंगस आदि पर भी प्रभावी है ।🍋नींबू का रस विशेषत: छिलका, रक्तदाब तथा मानसिक दबाव को नियंत्रित करता है ।🍋नींबू का छिलका १२ से ज्यादा प्रकार के कैंसर में पूर्ण प्रभावी है और वो भी बिना किसी साईड इफेक्ट के । 🍋इसलिये आप अच्छे पके हुए तथा स्वच्छ नींबू फ्रीज़र में रखें और कद्दूकस कर प्रतिदिन अपने आहार के साथ प्रयोग करें ।
शनिवार, 25 जून 2016
चीनी चीजो का बहिस्कार करो ...।
चिड़िया जैसी आँखों में फिर भारत खटक गया ,
इसीलए एन एस जी में दाखिल होते होते अटक गया ।
उसने हमारे स्वाभिमान से उठते सर को देख लिया ,
साफ़ साफ़ चीनी आँखों में हमने डर को देख लिया ।
मालुम है उसको अब ये विश्व विजयी रथ नहीं रुक पायेगा ,
नेहरू को तो झुका लिया , पर मोदी का सर ना झुक पायेगा ।
एक तिहाई दुनिया खड़ी है जब भारत माँ के अभिनंदन में ,
तुझ जैसे साँपों से कोई फर्क नहीं खुद्दारी के चन्दन में ।
जिद पर अड़ा है तो हम जिद का गुब्बारा फोड़ भी सकते है ,
अब पैसठ वाली बात नहीं हम चीनी दिवार तोड़ भी सकते है ।
हमने आँख उठाई तो ड्रेगन तुम बिना जहर के हो जाओगे ,
तुम्हारा सामान बेचना बंद किया तो दर दर के हो जाओगे ।
तुम्हारी अर्थव्यवस्था में कमाई है हमारे खून पसीने की ,
हमने प्रतिबन्ध लगा दिया तो भीख मांगोगे जीवन जीने की ।
और भारत में भी जो जीत ढूंढ रहे मोदी की इस हार में ,
उनको प्लाट दिलवादो बीजिंग के मछली बाजार में ।
डूब मरो विपक्ष वालो मत अट्टहास कर हाहाकार करो ,
भारत माँ की संतान हो तो चीनी चीजों का बहिस्कार करो ।
चिड़िया जैसी आँखों में फिर भारत खटक गया ,
इसीलए एन एस जी में दाखिल होते होते अटक गया ।
उसने हमारे स्वाभिमान से उठते सर को देख लिया ,
साफ़ साफ़ चीनी आँखों में हमने डर को देख लिया ।
मालुम है उसको अब ये विश्व विजयी रथ नहीं रुक पायेगा ,
नेहरू को तो झुका लिया , पर मोदी का सर ना झुक पायेगा ।
एक तिहाई दुनिया खड़ी है जब भारत माँ के अभिनंदन में ,
तुझ जैसे साँपों से कोई फर्क नहीं खुद्दारी के चन्दन में ।
जिद पर अड़ा है तो हम जिद का गुब्बारा फोड़ भी सकते है ,
अब पैसठ वाली बात नहीं हम चीनी दिवार तोड़ भी सकते है ।
हमने आँख उठाई तो ड्रेगन तुम बिना जहर के हो जाओगे ,
तुम्हारा सामान बेचना बंद किया तो दर दर के हो जाओगे ।
तुम्हारी अर्थव्यवस्था में कमाई है हमारे खून पसीने की ,
हमने प्रतिबन्ध लगा दिया तो भीख मांगोगे जीवन जीने की ।
और भारत में भी जो जीत ढूंढ रहे मोदी की इस हार में ,
उनको प्लाट दिलवादो बीजिंग के मछली बाजार में ।
डूब मरो विपक्ष वालो मत अट्टहास कर हाहाकार करो ,
भारत माँ की संतान हो तो चीनी चीजों का बहिस्कार करो ।
शुक्रवार, 24 जून 2016
: समय समय की बात है :
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💥भारत और इण्डिया में अन्तर💥
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👳भारत में
👉 गाँव है : गली है : चौबारा है :
🕵इण्डिया में
👉 सिटी है : मॉल है : पंचतारा है :
~ ~ ~
👳भारत में
👉 घर है, चबूतरा है, दालान है :
🕵इण्डिया में
👉 फ्लैट और मकान है :
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 काका : बाबा हैं, दादा : दादी हैं
🕵 इण्डिया में
👉 अंकल : आण्टी की आबादी है :
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 खजूर है, जामुन है, आम है :
🕵 इण्डिया में 👇
मैगी, पिज्जा, माजा (नकली आम) है :
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 मटके हैं, दोने हैं, पत्तल हैं :
🕵 इण्डिया में
👉 पॉलिथिन, वाटर, वाईन बोटलें हैं
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 गाय है, गोबर है, कण्डे हैं :
🕵 इण्डिया में 👇
हानिकारक चिकन बिरयानी अण्डे हैं:
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 दूध है, दही है, लस्सी है :
🕵 इण्डिया में
👉प्राणघातक ह्विस्की कोक पेप्सी है
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 रसोई है, आँगन है, तुलसी है :
🕵 इण्डिया में
👉 रूम है, कमोड की कुर्सी है :
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 कथरी है, खटिया है, खर्राटे हैं :
🕵 इण्डिया में
👉 बेड है, डनलप है और करवटें है
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 मन्दिर हैं, मण्डप हैं, पण्डाल है :
🕵 इण्डिया में
👉 पब है, डिस्को है, हॉल है :
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 गीत है, संगीत है, रिदम है :
🕵 इण्डिया में
👉 डान्स है, पॉप है, आईटम है :
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 बुआ हैं, मौसी हैं, बहन हैं :
🕵 इण्डिया में
👉 सब के सब कज़न हैं :
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 पीपल है, बरगद है, नीम है :
🕵 इण्डिया में
👉 वॉल पर पूरे सीन हैं :
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 आदर है, प्रेम है, सत्कार है :
🕵 इण्डिया में
👉 स्वार्थ हैं, नफरत हैं, दुत्कार हैं :
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 हजारों भाषा हैं, बोली है :
🕵 इण्डिया में
👉 एक अँग्रेजी एक बड़बोली है :
~ ~ ~
👳 भारत
👉 सीधा है, सहज है, सरल है :
🕵 इण्डिया
👉 धूर्त है, चालाक है, कुटिल है :
~ ~ ~
👳भारत में
👉 सन्तोष है, सुख है, चैन है :
🕵इण्डिया
👉 बदहवास, दु:खी, बेचैन है :
~ ~ ~ ~ ~ ~
👆 💥 क्योंक 💥
👳 भारत को
🙏 💥 देवों ने रचाया है 💥 ✨
और
🕵 इण्डिया को
👋 लालची, अँग्रेजों ने बसाया है :
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💥भारत और इण्डिया में अन्तर💥
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👳भारत में
👉 गाँव है : गली है : चौबारा है :
🕵इण्डिया में
👉 सिटी है : मॉल है : पंचतारा है :
~ ~ ~
👳भारत में
👉 घर है, चबूतरा है, दालान है :
🕵इण्डिया में
👉 फ्लैट और मकान है :
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 काका : बाबा हैं, दादा : दादी हैं
🕵 इण्डिया में
👉 अंकल : आण्टी की आबादी है :
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 खजूर है, जामुन है, आम है :
🕵 इण्डिया में 👇
मैगी, पिज्जा, माजा (नकली आम) है :
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 मटके हैं, दोने हैं, पत्तल हैं :
🕵 इण्डिया में
👉 पॉलिथिन, वाटर, वाईन बोटलें हैं
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 गाय है, गोबर है, कण्डे हैं :
🕵 इण्डिया में 👇
हानिकारक चिकन बिरयानी अण्डे हैं:
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 दूध है, दही है, लस्सी है :
🕵 इण्डिया में
👉प्राणघातक ह्विस्की कोक पेप्सी है
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 रसोई है, आँगन है, तुलसी है :
🕵 इण्डिया में
👉 रूम है, कमोड की कुर्सी है :
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 कथरी है, खटिया है, खर्राटे हैं :
🕵 इण्डिया में
👉 बेड है, डनलप है और करवटें है
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 मन्दिर हैं, मण्डप हैं, पण्डाल है :
🕵 इण्डिया में
👉 पब है, डिस्को है, हॉल है :
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 गीत है, संगीत है, रिदम है :
🕵 इण्डिया में
👉 डान्स है, पॉप है, आईटम है :
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 बुआ हैं, मौसी हैं, बहन हैं :
🕵 इण्डिया में
👉 सब के सब कज़न हैं :
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 पीपल है, बरगद है, नीम है :
🕵 इण्डिया में
👉 वॉल पर पूरे सीन हैं :
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 आदर है, प्रेम है, सत्कार है :
🕵 इण्डिया में
👉 स्वार्थ हैं, नफरत हैं, दुत्कार हैं :
~ ~ ~
👳 भारत में
👉 हजारों भाषा हैं, बोली है :
🕵 इण्डिया में
👉 एक अँग्रेजी एक बड़बोली है :
~ ~ ~
👳 भारत
👉 सीधा है, सहज है, सरल है :
🕵 इण्डिया
👉 धूर्त है, चालाक है, कुटिल है :
~ ~ ~
👳भारत में
👉 सन्तोष है, सुख है, चैन है :
🕵इण्डिया
👉 बदहवास, दु:खी, बेचैन है :
~ ~ ~ ~ ~ ~
👆 💥 क्योंक 💥
👳 भारत को
🙏 💥 देवों ने रचाया है 💥 ✨
और
🕵 इण्डिया को
👋 लालची, अँग्रेजों ने बसाया है :
beautiful poem:
कुछ हँस के
बोल दिया करो,
कुछ हँस के
टाल दिया करो,
यूँ तो बहुत
परेशानियां है
तुमको भी
मुझको भी,
मगर कुछ फैंसले
वक्त पे डाल दिया करो,
न जाने कल कोई
हंसाने वाला मिले न मिले..
इसलिये आज ही
हसरत निकाल लिया करो !!
हमेशा समझौता
करना सीखिए..
क्योंकि थोड़ा सा
झुक जाना
किसी रिश्ते को
हमेशा के लिए
तोड़ देने से
बहुत बेहतर है ।।।
किसी के साथ
हँसते-हँसते
उतने ही हक से
रूठना भी आना चाहिए !
अपनो की आँख का
पानी धीरे से
पोंछना आना चाहिए !
रिश्तेदारी और
दोस्ती में
कैसा मान अपमान ?
बस अपनों के
दिल मे रहना
आना चाहिए...!
कुछ हँस के
बोल दिया करो,
कुछ हँस के
टाल दिया करो,
यूँ तो बहुत
परेशानियां है
तुमको भी
मुझको भी,
मगर कुछ फैंसले
वक्त पे डाल दिया करो,
न जाने कल कोई
हंसाने वाला मिले न मिले..
इसलिये आज ही
हसरत निकाल लिया करो !!
हमेशा समझौता
करना सीखिए..
क्योंकि थोड़ा सा
झुक जाना
किसी रिश्ते को
हमेशा के लिए
तोड़ देने से
बहुत बेहतर है ।।।
किसी के साथ
हँसते-हँसते
उतने ही हक से
रूठना भी आना चाहिए !
अपनो की आँख का
पानी धीरे से
पोंछना आना चाहिए !
रिश्तेदारी और
दोस्ती में
कैसा मान अपमान ?
बस अपनों के
दिल मे रहना
आना चाहिए...!
गुरुवार, 23 जून 2016
बुधवार, 22 जून 2016
लोग सच कहते हैं -
औरतें अजीब होतीं है
रात भर सोती नहीं पूरा
थोड़ा थोड़ा जागती रहतीं है
नींद की स्याही में उंगलियां डुबो कर दिन की बही लिखतीं।
टटोलती रहतीं है
दरवाजों की कुंडिया
बच्चों की चादर
पति का मन
और जब जागती सुबह
तो पूरा नहीं जागती।
नींद में ही भागतीं है
सच है, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं ।
हवा की तरह घूमतीं, घर बाहर...
टिफिन में रोज़ नयी रखतीं कविताएँ
गमलों में रोज बो देती आशाऐ
पुराने अजीब से गाने गुनगुनातीं
और चल देतीं फिर
एक नये दिन के मुकाबिल
पहन कर फिर वही सीमायें
खुद से दूर हो कर ही
सब के करीब होतीं हैं
औरतें सच में अजीब होतीं हैं ।
कभी कोई ख्वाब पूरा नहीं देखतीं
बीच में ही छोड़ कर देखने लगतीं हैं चुल्हे पे चढ़ा दूध...
कभी कोई काम पूरा नहीं करतीं
बीच में ही छोड़ कर ढूँढने लगतीं हैं
बच्चों के मोजे, पेन्सिल, किताब
बचपन में खोई गुडिया,
जवानी में खोए पलाश,
मायके में छूट गयी स्टापू की गोटी,
छिपन-छिपाई के ठिकाने
वो छोटी बहन छिप के कहीं रोती...
सहेलियों से लिए
दिये चुकाए हिसाब
बच्चों के मोजे,पेन्सिल किताब
खोलती बंद करती खिड़कियाँ
क्या कर रही हो ?सो गयीं क्या ?
खाती रहती झिङकियाँ
न शौक से जीती है ,
न ठीक से मरती है
कोई काम ढ़ंग से नहीं करती है
सच है, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं ।
कितनी बार देखी है...
मेकअप लगाये,
चेहरे के नील छिपाए
वो कांस्टेबल लडकी,
वो ब्यूटीशियन,
वो भाभी,
वो दीदी...
चप्पल के टूटे स्ट्रैप को
साड़ी के फाल से छिपाती
वो अनुशासन प्रिय टीचर
और कभी दिखही जाती है
कॉरीडोर में, जल्दी जल्दी चलती,
नाखूनों से सूखा आटा झाडते,
सुबह जल्दी में नहाई
अस्पताल आई वो लेडी डॉक्टर
दिन अक्सर गुजरता है शहादत में रात फिर से सलीब होती है...
सच है, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं ।
सूखे मौसम में बारिशों को
याद कर के रोतीं हैं
उम्र भर हथेलियों में
तितलियां संजोतीं हैं
और जब एक दिन
बूंदें सचमुच बरस जातीं हैं
हवाएँ सचमुच गुनगुनाती हैं
फिजाएं सचमुच खिलखिलातीं हैं
तो ये सूखे कपड़ों, अचार ,पापड़
बच्चों और सब दुनिया को
भीगने से बचाने को दौड़ जातीं हैं...
सच है, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं ।
खुशी के एक आश्वासन पर
पूरा पूरा जीवन काट देतीं है ।
अनगिनत खाईयों को
अनगिनत पुलो से पाट देतीं है.
सच है, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं ।
ऐसा कोई करता है क्या?
रस्मों के पहाड़ों जंगलों में
नदी की तरह बहती...
कोंपल की तरह फूटती...
जिन्दगी की आँख से
दिन रात इस तरह
और कोई झरता है क्या ?
ऐसा कोई करता है क्या ?
(हमारे जीवन में ख़ुशी, समर्पण और प्रेम बरसाने वाली महिलाओं को सादर समर्पित)
औरतें अजीब होतीं है
रात भर सोती नहीं पूरा
थोड़ा थोड़ा जागती रहतीं है
नींद की स्याही में उंगलियां डुबो कर दिन की बही लिखतीं।
टटोलती रहतीं है
दरवाजों की कुंडिया
बच्चों की चादर
पति का मन
और जब जागती सुबह
तो पूरा नहीं जागती।
नींद में ही भागतीं है
सच है, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं ।
हवा की तरह घूमतीं, घर बाहर...
टिफिन में रोज़ नयी रखतीं कविताएँ
गमलों में रोज बो देती आशाऐ
पुराने अजीब से गाने गुनगुनातीं
और चल देतीं फिर
एक नये दिन के मुकाबिल
पहन कर फिर वही सीमायें
खुद से दूर हो कर ही
सब के करीब होतीं हैं
औरतें सच में अजीब होतीं हैं ।
कभी कोई ख्वाब पूरा नहीं देखतीं
बीच में ही छोड़ कर देखने लगतीं हैं चुल्हे पे चढ़ा दूध...
कभी कोई काम पूरा नहीं करतीं
बीच में ही छोड़ कर ढूँढने लगतीं हैं
बच्चों के मोजे, पेन्सिल, किताब
बचपन में खोई गुडिया,
जवानी में खोए पलाश,
मायके में छूट गयी स्टापू की गोटी,
छिपन-छिपाई के ठिकाने
वो छोटी बहन छिप के कहीं रोती...
सहेलियों से लिए
दिये चुकाए हिसाब
बच्चों के मोजे,पेन्सिल किताब
खोलती बंद करती खिड़कियाँ
क्या कर रही हो ?सो गयीं क्या ?
खाती रहती झिङकियाँ
न शौक से जीती है ,
न ठीक से मरती है
कोई काम ढ़ंग से नहीं करती है
सच है, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं ।
कितनी बार देखी है...
मेकअप लगाये,
चेहरे के नील छिपाए
वो कांस्टेबल लडकी,
वो ब्यूटीशियन,
वो भाभी,
वो दीदी...
चप्पल के टूटे स्ट्रैप को
साड़ी के फाल से छिपाती
वो अनुशासन प्रिय टीचर
और कभी दिखही जाती है
कॉरीडोर में, जल्दी जल्दी चलती,
नाखूनों से सूखा आटा झाडते,
सुबह जल्दी में नहाई
अस्पताल आई वो लेडी डॉक्टर
दिन अक्सर गुजरता है शहादत में रात फिर से सलीब होती है...
सच है, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं ।
सूखे मौसम में बारिशों को
याद कर के रोतीं हैं
उम्र भर हथेलियों में
तितलियां संजोतीं हैं
और जब एक दिन
बूंदें सचमुच बरस जातीं हैं
हवाएँ सचमुच गुनगुनाती हैं
फिजाएं सचमुच खिलखिलातीं हैं
तो ये सूखे कपड़ों, अचार ,पापड़
बच्चों और सब दुनिया को
भीगने से बचाने को दौड़ जातीं हैं...
सच है, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं ।
खुशी के एक आश्वासन पर
पूरा पूरा जीवन काट देतीं है ।
अनगिनत खाईयों को
अनगिनत पुलो से पाट देतीं है.
सच है, औरतें बेहद अजीब होतीं हैं ।
ऐसा कोई करता है क्या?
रस्मों के पहाड़ों जंगलों में
नदी की तरह बहती...
कोंपल की तरह फूटती...
जिन्दगी की आँख से
दिन रात इस तरह
और कोई झरता है क्या ?
ऐसा कोई करता है क्या ?
(हमारे जीवन में ख़ुशी, समर्पण और प्रेम बरसाने वाली महिलाओं को सादर समर्पित)
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