मंगलवार, 7 फ़रवरी 2017

�� हंसी रोक  कर  दिखाओ ...

*एक बहुत ही सुंदर महिला थी*.

अपने बेटे को पास के मदरसे मे उर्दू सीखने के लिए भर्ती करवा आयी ...

उर्दू पढ़ाने वाला मौलाना उस महिला की सुंदरता के बारे में जानता था.

छुट्टी के समय मौलाना ने उसके बेटे से कहा : अपनी अम्मी को मेरा सलाम कहना....

बेटे ने आकर माँ को कह दिया कि मौलाना साहब ने आपको सलाम भेजा है ।

महिला ने भी बेटे के हाथों सलाम का उत्तर सलाम भेज कर दे दिया।

ये सिलसिला हफ्ते भर चला ...

महिला ने " पति " से परामर्श किया और अगले दिन बेटे से मौलाना को कहलवाया कि
"शाम को घर पर बुलाया है" ...

*मौलान खुश*...

3 दिन से नहाया नहीं था,
बासी शेरवानी को इस्तरी करवाया,
इत्र मारा और
पहुँच गया सुंदरी के घर..

महिला ने पहले आवभगत की,
चाय नाश्ता करवाया,
फिर, बेटे की पढ़ाई के बारे मे जानकारी ली।

मौलाना औपचारिक बातें करने के बाद, अपनी असलियत पे आया , कहा : माशा अल्लाह , आपको खुदा ने बड़ी फुर्सत में तराशा है -

लेडी : "वो तो है, शुक्रिया"

मौलाना : मुझे आपसे इश्क़ हो गया है मोहतरमा ...

लेडी : हाँ वो तो है, पर ये बात यदि मेरे पति ने सुन ली तो बहुत मुश्किल होगी,
वो आते ही होंगे ...
आप अभी जाइए, कल शाम को फिर आईयेगा तब बात करेंगे... मैं आपका इंतज़ार करूंगी ...

मौलाना चलने को हुआ ही था कि
बाहर से उस महिला के पति की आवाज़ आई : कौन घर में घुसा है, हरामखोर ?

मौलाना घबराया ... कहाँ छुप जाऊँ ?

महिला ने उसे फटाफट साड़ी पहना दी ,घूँघट कर दिया
और
गेहूँ पीसने वाली पत्थर की चक्की के पास बैठा दिया
और कहा : आप धीरे-धीरे गेहूँ पीसिए ...
मैं अभी उनको चाय वगैरह पिला कर बाहर भेजती हूँ,
आप मौका देखकर भाग जाना ।

मौलाना लगे चक्की चलाने और गेहूँ पीसने ...

पति ने प्रवेश किया और पूछा कि ये कौन महिला है ?

लेडी : पड़ोस मे नए किरायेदार आए हैं, उनकी पत्नी है,
गेहूँ पीसने आई हैं ....

पति - पत्नी बहुत देर तक हंसी मज़ाक और बातें करते रहे ...

1 घंटे बाद पति ने कहा : मैं जरा नुक्कड़ की दुकान से पान खा कर आता हूँ और बाहर निकल गया।

एक घंटे तक गेहूं पीसते-पीसते पसीने से तर बतर मौलाना ने
साड़ी उतार के फेंकी
और
आनन-फानन में वहाँ से सरपट हो लिए।

*15 दिन बाद* -

महिला के बेटे ने मदरसे में मौलाना से कहा : माँ ने आपको सलाम भेजा है" ...

.
.
.
*हरामखोरों, आटा खत्म हो गया होगा* 
क्या 20 किलो आटा खा गए,
जो अब फिर से सलाम भेजा है ....

KPS

आजकल एक नया डिजिटल पेमेंट का चलन शुरू हुआ है, घर बैठे मोबाईल से बुक कराके कुछ भी मंगा लो...।

एक सरदार ने सलामत स्वीट्स को फ़ोन लगाया...

tring tring..

सलामत स्वीट्स मे आपका स्वागत है,
कहिए क्या चाहिए.?"

सरदार बोला"मिठाई चाहिए।"

"लड्डू के लिए एक दबाए,
रसगुल्ला के लिए दो दबाए,
काजू कतली के लिए तीन दबाए,
गुलाब जामुन के लिए चार दबाए,
मलाई पेड़े के लिए...."

सरदार बोला मुझे लड्डू चाहिए थे,
मैंने एक दबाया,

"बूंदी के लिए एक दबाए,
मोतीचूर के लिए दो दबाए,
मगज के लिए तीन दबाए,
सोंठ के लिए चार......"

सरदार ने दो दबाया.....
मोतीचूर चाहिए।

एक किलो के लिए एक दबाए,
पाँच किलो के लिए दो दबाए,
एक क्विंटल के लिए तीन दबाए..."

गलती से तीसरा बटन दब गया।

डर के मारे सरदार ने फोन काट दिया ।

पर अगले ही पल फ़ोन आया -
"आपसे एक क्विंटल मोतीचूर के लड्डू का आर्डर मिला है,
अपना एड्रेस बताए।"

सरदार बोला - "मैंने तो कोई फोन नहीँ किया है ।"

"आपके भाई ने किया होगा
इसी नंबर से था..
अपने भाई को फ़ोन दीजिए।"

सरदार बोला -
"हम लोग छः भाई हैं,

बड़े से बात के लिए एक दबाए,
उससे छोटे के लिए दो दबाए,
उससे छोटे के लिए तीन दबाए,
उससे छोटे के लिए चार...."

सामने वाले ने फ़ोन काट दिया।

�� *जया एकादशी* ��

➡ *06 फरवरी 2017 शाम 04:10 से 07 फरवरी 2017 मंगलवार को दोपहर 01:47 तक एकादशी है ।*
�� *विशेष - 07 फरवरी 2017 मंगलवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।*

���� *युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा : भगवन् ! कृपा करके यह बताइये कि माघ मास के शुक्लपक्ष में कौन सी एकादशी होती है, उसकी विधि क्या है तथा उसमें किस देवता का पूजन किया जाता है ?*

���� *भगवान श्रीकृष्ण बोले : राजेन्द्र ! माघ मास के शुक्लपक्ष में जो एकादशी होती है, उसका नाम ‘जया’ है । वह सब पापों को हरनेवाली उत्तम तिथि है । पवित्र होने के साथ ही पापों का नाश करनेवाली तथा मनुष्यों को भाग और मोक्ष प्रदान करनेवाली है । इतना ही नहीं , वह ब्रह्महत्या जैसे पाप तथा पिशाचत्व का भी विनाश करनेवाली है । इसका व्रत करने पर मनुष्यों को कभी प्रेतयोनि में नहीं जाना पड़ता । इसलिए राजन् ! प्रयत्नपूर्वक ‘जया’ नाम की एकादशी का व्रत करना चाहिए ।*

���� *एक समय की बात है । स्वर्गलोक में देवराज इन्द्र राज्य करते थे । देवगण पारिजात वृक्षों से युक्त नंदनवन में अप्सराओं के साथ विहार कर रहे थे । पचास करोड़ गन्धर्वों के नायक देवराज इन्द्र ने स्वेच्छानुसार वन में विहार करते हुए बड़े हर्ष के साथ नृत्य का आयोजन किया । गन्धर्व उसमें गान कर रहे थे, जिनमें पुष्पदन्त, चित्रसेन तथा उसका पुत्र - ये तीन प्रधान थे । चित्रसेन की स्त्री का नाम मालिनी था । मालिनी से एक कन्या उत्पन्न हुई थी, जो पुष्पवन्ती के नाम से विख्यात थी । पुष्पदन्त गन्धर्व का एक पुत्र था, जिसको लोग माल्यवान कहते थे । माल्यवान पुष्पवन्ती के रुप पर अत्यन्त मोहित था । ये दोनों भी इन्द्र के संतोषार्थ नृत्य करने के लिए आये थे । इन दोनों का गान हो रहा था । इनके साथ अप्सराएँ भी थीं । परस्पर अनुराग के कारण ये दोनों मोह के वशीभूत हो गये । चित्त में भ्रान्ति आ गयी इसलिए वे शुद्ध गान न गा सके । कभी ताल भंग हो जाता था तो कभी गीत बंद हो जाता था । इन्द्र ने इस प्रमाद पर विचार किया और इसे अपना अपमान समझकर वे कुपित हो गये ।*

����  *अत: इन दोनों को शाप देते हुए बोले : ‘ओ मूर्खो ! तुम दोनों को धिक्कार है ! तुम लोग पतित और मेरी आज्ञाभंग करनेवाले हो, अत: पति पत्नी के रुप में रहते हुए पिशाच हो जाओ ।’*

���� *इन्द्र के इस प्रकार शाप देने पर इन दोनों के मन में बड़ा दु:ख हुआ । वे हिमालय पर्वत पर चले गये और पिशाचयोनि को पाकर भयंकर दु:ख भोगने लगे । शारीरिक पातक से उत्पन्न ताप से पीड़ित होकर दोनों ही पर्वत की कन्दराओं में विचरते रहते थे । एक दिन पिशाच ने अपनी पत्नी पिशाची से कहा : ‘हमने कौन सा पाप किया है, जिससे यह पिशाचयोनि प्राप्त हुई है ? नरक का कष्ट अत्यन्त भयंकर है तथा पिशाचयोनि भी बहुत दु:ख देनेवाली है । अत: पूर्ण प्रयत्न करके पाप से बचना चाहिए ।’*

���� *इस प्रकार चिन्तामग्न होकर वे दोनों दु:ख के कारण सूखते जा रहे थे । दैवयोग से उन्हें माघ मास के शुक्लपक्ष की एकादशी की तिथि प्राप्त हो गयी । ‘जया’ नाम से विख्यात वह तिथि सब तिथियों में उत्तम है । उस दिन उन दोनों ने सब प्रकार के आहार त्याग दिये, जल पान तक नहीं किया । किसी जीव की हिंसा नहीं की, यहाँ तक कि खाने के लिए फल तक नहीं काटा । निरन्तर दु:ख से युक्त होकर वे एक पीपल के समीप बैठे रहे । सूर्यास्त हो गया । उनके प्राण हर लेने वाली भयंकर रात्रि उपस्थित हुई । उन्हें नींद नहीं आयी । वे रति या और कोई सुख भी नहीं पा सके ।*

���� *सूर्यादय हुआ, द्वादशी का दिन आया । इस प्रकार उस पिशाच दंपति के द्वारा ‘जया’ के उत्तम व्रत का पालन हो गया । उन्होंने रात में जागरण भी किया था । उस व्रत के प्रभाव से तथा भगवान विष्णु की शक्ति से उन दोनों का पिशाचत्व दूर हो गया । पुष्पवन्ती और माल्यवान अपने पूर्वरुप में आ गये । उनके हृदय में वही पुराना स्नेह उमड़ रहा था । उनके शरीर पर पहले जैसे ही अलंकार शोभा पा रहे थे ।*

���� *वे दोनों मनोहर रुप धारण करके विमान पर बैठे और स्वर्गलोक में चले गये । वहाँ देवराज इन्द्र के सामने जाकर दोनों ने बड़ी प्रसन्नता के साथ उन्हें प्रणाम किया ।*

���� *उन्हें इस रुप में उपस्थित देखकर इन्द्र को बड़ा विस्मय हुआ ! उन्होंने पूछा: ‘बताओ, किस पुण्य के प्रभाव से तुम दोनों का पिशाचत्व दूर हुआ है? तुम मेरे शाप को प्राप्त हो चुके थे, फिर किस देवता ने तुम्हें उससे छुटकारा दिलाया है?’*

���� *माल्यवान बोला : स्वामिन् ! भगवान वासुदेव की कृपा तथा ‘जया’ नामक एकादशी के व्रत से हमारा पिशाचत्व दूर हुआ है ।*

���� *इन्द्र ने कहा : … तो अब तुम दोनों मेरे कहने से सुधापान करो । जो लोग एकादशी के व्रत में तत्पर और भगवान श्रीकृष्ण के शरणागत होते हैं, वे हमारे भी पूजनीय होते हैं ।*

���� *भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं : राजन् ! इस कारण एकादशी का व्रत करना चाहिए । नृपश्रेष्ठ ! ‘जया’ ब्रह्महत्या का पाप भी दूर करनेवाली है । जिसने ‘जया’ का व्रत किया है, उसने सब प्रकार के दान दे दिये और सम्पूर्ण यज्ञों का अनुष्ठान कर लिया । इस माहात्म्य के पढ़ने और सुनने से अग्निष्टोम यज्ञ का फल मिलता है ।*
           ��

��Happy World Family Day��

         "परिवार" से बड़ा कोई
            "धन" नहीं!
            "पिता" से बड़ा कोई
            "सलाहकार" नहीं!
            "माँ" की छाव से बड़ी
             कोई "दुनिया" नहीं!
            "भाई" से अच्छा कोई 
            "भागीदार" नहीं!
            "बहन" से बड़ा कोई
            "शुभचिंतक" नहीं!
            "पत्नी" से बड़ा कोई
            "दोस्त" नहीं
                    इसलिए
            "परिवार" के बिना
            "जीवन" नहीं!!!
           ��������������������
आज परिवार दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाऍ ��

रविवार, 5 फ़रवरी 2017

�� ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ ��
⛅ *आज का दिनांक - 06 फरवरी  2017*
⛅ *दिन - सोमवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2073*
⛅ *शक संवत -1938*
⛅ *अयन - उत्तरायण*
⛅ *ऋतु - शिशिर*
⛅ *मास - माघ*
⛅ *पक्ष - शुक्ल*    
⛅ *तिथि - शाम 04:09 तक दशमी - शाम 04:10 से एकादशी*
  ⛅ *नक्षत्र - रोहिणी*
⛅ *योग -  इन्द्र*
⛅ *राहुकाल - सुबह 08:31 से सुबह 09:52 तक*
⛅ *सूर्योदय - 07:15*
⛅ *सूर्यास्त - 18:29*
⛅ *दिशाशूल - पूर्व दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण - भक्त पुंडलीक उत्सव  (पंढरपुर)*
�� *विशेष - हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है lराम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।*
�� *आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l*
�� *एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।*
�� *एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।*
�� *जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।*
          �� *~ हिन्दू पंचांग ~* ��

�� *जया एकादशी* ��
➡ *06 फरवरी 2017 शाम 04:10 से 07 फरवरी 2017 मंगलवार को दोपहर 01:47 तक एकादशी है ।*
�� *विशेष - 07 फरवरी 2017 मंगलवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।*
���� *( इस दिन का व्रत ब्रह्महत्या जैसे पाप व पिशाचत्व का नाशक है तथा प्रेतयोनि से रक्षा करता है | )*
���� *स्त्रोत – ऋषि प्रसाद – जनवरी – २०१७ से*
          �� *~ हिन्दू पंचांग ~* ��

�� *एकादशी के दिन ये सावधानी रहे* ��
➡ *06 फरवरी 2017 शाम 04:10 से 07 फरवरी 2017 मंगलवार को दोपहर 01:47 तक एकादशी है ।*
�� *विशेष - 07 फरवरी 2017 मंगलवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।*
���� *महीने में १५-१५ दिन में  एकादशी  आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के दिन  जो चावल खाता है... तो धार्मिक ग्रन्थ से एक एक चावल एक एक कीड़ा खाने का पाप लगता है...ऐसा डोंगरे जी महाराज के भागवत में डोंगरे जी महाराज ने कहा*
���� *- पूज्य बापूजी मुंबई 1/1/2012*
          �� *~ हिन्दू पंचांग ~* ��

�� *जया एकादशी - प्रेत मोचिनी एकादशी*
���� *भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया ..ये जया एकादशी ( 07st Feb' 2017 ) (प्रेत मोचिनी  एकादशी) का उपवास रखने वाले को भोग भी मिलता है - संसार का सुख सम्पदा भी मिलता है | ब्रम्ह की हत्या, ब्रम्हज्ञानी की हत्या बड़े में बड़ा पाप है | वो ब्रम्ह हत्या के पाप को नाश करनेवाली एकादशी है जया एकादशी | और कभी वो व्यक्ति पिशाच योनी को प्राप्त नहीं होगा |प्रेत योनी में कोई पड़ा हो उसकी सदगति होती है और जया एकादशी का जो व्रत रखेगा उसे प्रेत योनी में कभी नहीं जाना पड़ेगा | किसी कारण ये व्रत नहीं भी कर सकते तो चावल तो एकादशी को नहीं खाना... बीमारी भी देंगे और पाप भी देंगे | चावल एकादशी के दिन दुश्मन को भी नहीं खिलाना |*


एक ऐसा सच जो आपको आज तक नहीं बताया गया ????

*भारत में 3 लाख मस्जिदें हैं।*

जो अन्य किसी देश में भी नहीं है ।

वाशिंगटन में 24 चर्च हैं

लन्दन में 71 चर्च

और इटली के मिलान शहर में 68 चर्च हैं।

*जबकि अकेले दिल्ली में 271 चर्च हैं।*

*लेकिन हिन्दू फिर भी सांप्रदायिक है?*

किसी सेकुलर के पास इसका जवाब ???

*मैंने ISIS का विरोध करते किसी मुस्लिम को नहीं देखा है।*

*पर RSS का विरोध करते हुए लाखो हिन्दू देखे है।*

*मैंने किसी मुस्लिम को होली दीवाली की पार्टी देते नहीं देखा है पर हिन्दुओ को इफ्तार पार्टी देते देखा है।*

मैंने कश्मीर में भारत के झंडे जलते देखे है।

*पर कभी पाकिस्तान का झंडा जलाते हुए मुसलमान नहीं देखा है*।

*मैंने हिन्दुओ को टोपी पहने मजारो पर जाते देखा है।*

*पर किसी मुस्लिम को टिका लगाते मंदिर जाते नहीं देखा है।*

मैंने मिडिया को विदेशो के गुण गाते देखा है।

पर भारत के संस्कार के प्रचार करते नहीं देखा है।


मैनें आज तक

राम बूट हाउस

लक्षमण लेदर स्टोर्स

*माँ वैष्णो लस्सी भंडार*

*शंकर छाप तंबाकू*,

बजरंग पान भंडार

गणेश छाप बीडी,

लक्ष्मी छाप पटाखे

*कृष्णा  बार  ऐंड  रेस्टारेंट*

जय माँ अम्बे होटल ( चाय नाश्ता )

इस तरह के प्रोडक्ट और दुकाने आपको हर जगह पर दिखाई देंगी

लेकिन,
आज तक मेनें

*अल्लाह छाप गुटका,*

*खुदा छाप बीडी*

*ईसा मसीह  छाप तंबाकू बिकते नहीं देखा।*

मुसलमान  और  ईसाई  से

हम हिन्दू

*यह सीखे की अपने धर्म का*

*सम्मान कैसे किया जाता है।*

अपने भगवान् और उनके प्रतिक चिन्हों को

*कचरे में*

और रास्तो पर ना फेंके।

*अपने धर्म का सन्मान करे।*

*संभव हो तो ऐसी चिन्हों वाली वस्तुए कतई ख़रीदे ही नहीं।*

*कंपनिया अपने आप सुधार में आ जायेगी।*


*वन्देमातरम............जय हिन्द*  *जय भारत*