मंगलवार, 26 अक्टूबर 2021

कुछ फर्क नहीं पडता कि तुम हथेली पे सिर्फ चन्दा उकेरो
या कि हाथ भर मेंहदी लगाओ

कुछ फर्क नहीं पडता कि तुम नये कपडे पहनो
या फिर पुरानी साडी में ही खुद को सजाओ

कुछ फर्क नहीं पडता कि तुम कोहनी भर चूड़ी पहनो
या कि कलाई में अकेला कडा झुलाओ 

कुछ फर्क नहीं पडता कि तुम सुबह से शाम तक भूखी रहो
या फिर पूरा दिन थोडा थोडा खाओ

कुछ फर्क नहीं पडता कि तुम सज धज के इठलाओ
या कि सादगी से अपना दिन मनाओ

कुछ फर्क नहीं पडता कि इस दिन तुम पति के पैर छुओ
या बराबरी में खडे रहकर 'करवे' को निभाओ

सखियाँ मेरी,

फर्क तब पडता है जब तुम चेहरे पे मुस्कान की जगह उदासी ले आओ
फर्क तब पडता है जब तुम ठहाकों की जगह होठों पे चुप्पी ले आओ
फर्क तब पडता है जब तुम वक्त बेवक्त, बेवजह तुनक जाओ
फर्क तब पडता है जब तुम बोझिल यादें बार बार सामने लाओ
फर्क तब पडता है जब तुम अपने रिश्ते से बेईमानी कर जाओ !

कि तुम्हारे व्रत नियम तुम्हारे साथी की उमर लम्बी नहीं करते
तुम्हारी चीख चिल्लाहट,तुम्हारे हर वक्त के ताने उसकी जान निकालते हैं! 

कि सुकून के लिये उसे तुम्हारे कर्मकांड या श्रृंगार की नहीं 
तुम्हारे प्रेम तुम्हारे विश्वास तुम्हारी ईमानदारी की जरूरत है!

और उसकी खुशी के लिए तुम इतना तो कर ही सकती हो न......!!

सोमवार, 25 अक्टूबर 2021

न्यायपालिका Supreme Courtसे विनम्र निवेदन*तुम हमें वोट दो; हम तुम्हें-*... लैपटॉप देंगे ..... स्कूटी देंगे ..... हराम की बिजली देंगे ...... लोन माफ कर देंगे..कर्जा डकार जाना, माफ कर देंगे ... ये देंगे .. वो देंगे .. *ये क्या खुल्लम खुल्ला रिश्वत नहीं?**कोई चुनाव आयोग है भी कि नहीं इस देश में !**आयोग की कोई गाइडलाइंस है भी कि नहीं, वोट के लिए आप कुछ भी प्रलोभन नहीं दे सकते?*ये जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा हैइसकी *जवाबदेही* होनी चाहियेरोकिए भई ये सब .. वर्ना *बन्द कीजिये ये चुनाव के नाटक .. मतदान ।**हम मध्यमवर्गीय तंग आ गए हैं, क्या हम इन सबके लिए ईमानदारी से भर-भर कर टैक्स चुकाते हैं?*डिफाल्टर की कर्जमाफी .. फोकट की स्कूटी हराम की बिजलीहराम का घर दो रुपये किलो गेंहूतीन रुपये किलो चावल...चार - छह रुपये किलो दाल .. कितना चूसोगे हमें? क्योंकि! वे तुम्हारे आका हैं!गरीब थोकिया वोट बैंक हैं, इसलिए फोकट खाना घर बिजली कर्जा माफी दिए जा रहे हैं हम किस बातकी सजा भोग रहे हैं? जबकि होना ये चाहिये कि हमारे टैक्स से सर्वजनहिताय काम हों, देश के विकास में काम हों तो टैक्स चुकाना अच्छा लगता.. लेकिन आप तो देश के एक बहुत बड़े भाग को शाश्वत गरीब ही बनाए रखना चाहते हो। उसके लिए रोजगार सृजन के अनूकूल परिस्थिति बनाने की बजाए आप तथाकथित सोशल वेलफेयर की खैराती योजनाओं के माध्यम से अपना अक्षुण्ण वोट बैंक बना रहे हो*चुनाव आयोग एवं सर्वोच्च न्यायालय से निवेदन हैं कि कर्मशील देश के बाशिन्दों को तुरंत कानून लाकर कुछ भी फ्री देने पर बंदिश लगाई जाए ताकि देश के नागरिक निकम्मे न बने*.... एक टैक्सपेयर का दर्द

न्यायपालिका Supreme Court
से विनम्र निवेदन


*तुम हमें वोट दो; हम तुम्हें-*
... लैपटॉप देंगे ..
... स्कूटी देंगे ..
... हराम की बिजली देंगे ..
.... लोन माफ कर देंगे
..कर्जा डकार जाना, माफ कर देंगे 
... ये देंगे .. वो देंगे .. 

*ये क्या खुल्लम खुल्ला रिश्वत नहीं?*

*कोई चुनाव आयोग है भी कि नहीं इस देश में !*
*आयोग की कोई गाइडलाइंस है भी कि नहीं, वोट के लिए आप कुछ भी प्रलोभन नहीं दे सकते?*

ये जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा है
इसकी *जवाबदेही* होनी चाहिये
रोकिए भई ये सब .. 
वर्ना *बन्द कीजिये ये चुनाव के नाटक .. मतदान ।*

*हम मध्यमवर्गीय तंग आ गए हैं, क्या हम इन सबके लिए ईमानदारी से भर-भर कर टैक्स  चुकाते हैं?*

डिफाल्टर की कर्जमाफी .. फोकट की स्कूटी हराम की बिजली
हराम का घर दो रुपये किलो गेंहू
तीन रुपये किलो चावल...
चार - छह रुपये किलो दाल .. 
कितना चूसोगे हमें? 

क्योंकि! वे तुम्हारे आका हैं!
गरीब थोकिया वोट बैंक हैं, इसलिए फोकट खाना घर बिजली कर्जा माफी दिए जा रहे हैं 
हम किस बातकी सजा भोग रहे हैं? 

जबकि  होना ये चाहिये कि हमारे टैक्स से सर्वजनहिताय काम हों, देश के विकास में काम हों तो टैक्स चुकाना अच्छा लगता.. 
लेकिन आप तो  देश के एक बहुत बड़े भाग को शाश्वत गरीब ही बनाए रखना चाहते हो। उसके लिए रोजगार सृजन के अनूकूल परिस्थिति बनाने की बजाए आप तथाकथित सोशल वेलफेयर की खैराती योजनाओं के माध्यम से अपना अक्षुण्ण वोट बैंक बना रहे हो

*चुनाव आयोग एवं सर्वोच्च न्यायालय से निवेदन हैं कि कर्मशील देश के बाशिन्दों को तुरंत कानून लाकर कुछ भी फ्री देने पर बंदिश लगाई जाए ताकि देश के नागरिक निकम्मे न बने*

.... एक टैक्सपेयर का दर्द

आज की कहानी खाई औऱ ब्रिज (पूल)





खाई औऱ ब्रिज (पूल)




    दो भाई साथ साथ खेती करते थे। मशीनों की भागीदारी और चीजों का व्यवसाय किया करते थे।

 चालीस साल के साथ के बाद एक छोटी सी ग़लतफहमी की वजह से उनमें पहली बार झगडा हो गया था झगडा दुश्मनी में बदल गया था।

एक सुबह एक बढई बड़े भाई से काम मांगने आया. बड़े भाई ने कहा “हाँ ,मेरे पास तुम्हारे लिए काम हैं। उस तरफ देखो, वो मेरा पडोसी है, यूँ तो वो मेरा भाई है, पिछले हफ्ते तक हमारे खेतों के बीच घास का मैदान हुआ करता था पर मेरा भाई बुलडोजर ले आया और अब हमारे खेतों के बीच ये खाई खोद दी, जरुर उसने मुझे परेशान करने के लिए ये सब किया है अब मुझे उसे मजा चखाना है, तुम खेत के चारों तरफ बाड़ बना दो ताकि मुझे उसकी शक्ल भी ना देखनी पड़े."

“ठीक हैं”, बढई ने कहा। 
बड़े भाई ने बढई को सारा सामान लाकर दे दिया और खुद शहर चला गया, शाम को लौटा तो बढई का काम देखकर भौंचक्का रह गया, बाड़ की जगह वहा एक पुल था जो खाई को एक तरफ से दूसरी तरफ जोड़ता था. इससे पहले की बढई कुछ कहता, उसका छोटा भाई आ गया। 

छोटा भाई बोला “तुम कितने दरियादिल हो , मेरे इतने भला बुरा कहने के बाद भी तुमने हमारे बीच ये पुल बनाया, कहते कहते उसकी आँखे भर आईं और दोनों एक दूसरे के गले लग कर रोने लगे. जब दोनों भाई सम्भले तो देखा कि बढई जा रहा है।

रुको! मेरे पास तुम्हारे लिए और भी कई काम हैं, बड़ा भाई बोला।  

मुझे रुकना अच्छा लगता ,पर मुझे ऐसे कई पुल और बनाने हैं, बढई मुस्कुराकर बोला और अपनी राह को चल दिया. 

दिल से मुस्कुराने के लिए जीवन में पुल की जरुरत होती हैं खाई की नहीं। छोटी छोटी बातों पर अपनों से न रूठें। 

"दीपावली आ रही है घरेलू रिश्तों के साथ साथ सभी दोस्ती के रिश्तों पर जमी धूल भी साफ कर लेना, खुशियाँ चार गुनी हो जाएंगी"।

 *आने वाली दीपावली आप सभी के लिए खुशियाँ ले कर आए, यह शुभकामनाएं !*ये परमपिता ईश्वर राम जी भी यही चाहते थे। तभी उन चार भाईयो मे कभी बेर दुश्मनी वैराग्य पैदा नही ह

रविवार, 24 अक्टूबर 2021

👉 #एक_पुजारी_का_जीवन👈
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             दुर्गापूजा समाप्त हुई ,पुजारी अपने थके हुए शरीर के साथ दुर्गा पूजा करके घर लौटे।  सभी लोगों का एक ही  बात पूजा में पुजारी जी की अच्छी खासी आमदनी हुई है।  फ्रूट स्वीट साड़ी बहुत कुछ मिला होगा।    

लेकिन उनको कौन समझाये बीस लाख रुपये के बजट वाले पूजा में केवल चार लाल झालर वाली सफेद साड़ी मिला वह भी एकदम जाल की तरह हैं।   गमछा मिला जिसका आकार देखकर  रूमाल  भी शर्मा जाये।  

    सभी समितियों में एक या दो ऐसे व्यक्ति  होते है जो  पुजारी जी की गलती को पकड़ने के लिए बैठे रहते है।  वह समय-समय पर ज्ञान देते रहते हैं कि वह पुरी के पुजारी दक्षिणेश्वर के पुजारी  से बहस कर चुके  है और उनका स्थिती खराब कर दिये थे।  अब आईये दक्षिणा की ओर दशवें दिन  समिति द्वारा पुजारी जी को  दक्षिणा  दिया जाता है वो भी कमिटी जो देता है पुजारी जी खुशी-खुशी रख लेते हैं।  इस प्रकार दस दिन की पूजा पूरी कर वे  एक रूमाल से भी छोटा गमछा और 2,4 साड़ी लेकर घर लौटे।

      पुजा कराते,कराते पुजारी जी का गला भी बैठ चुका था।  जहां हर कोई अपने पत्नी बच्चों एवम् परिवार  के साथ पूजा में खुशी मना रहा है परिवार के साथ घुम रहें है वहीं पुजारी जी खाली पेट जोर-जोर से मंदिर में मंत्रोच्चारण कर रहे हैं। मैं उन लोगों को कहना चाहता हूं  जो सोचते हैं कि  एक पुजारी बिना परिश्रम के ही कमाई करते हैं, तो उनमें से कोई भी एक व्यक्ति 10 दिन बिना खाये-पिये  खाली पेट एक मंडप से दूसरा मंडप दौड़िये  और लगातार 2 घंटा उच्चस्वर  में दुर्गासप्तशती का पाठ किजीये फिर सच्चाई समझ में आ जायेगी एक पुजारी कितना परिश्रम करते हैं। 
         पुरोहित की पत्नी बच्चें एवम् उनके बुढ़े माता-पिता  भी उस दशमी का इंतजार करते हैं उस दक्षिणा के पैसे से पुजारी जी के  बच्चों के लिए पुस्तक, कपड़े माता-पिता के लिए दवा खरीदना होता है पूजा के  बाद सभी परिवार के सदस्य उनके घर लौटने का बेसब्री से इंतजार करते है.  वापस लौटते समय रास्ते में कोई कहेगा  आज तो बहुत कमाई हुई हैं पंडित जी पुरा बैग भरा हुआ हैं।इसी में से कुछ हमें भी दे दो ऐसे बोलकर पुजारी जी का उपहास उरायेगा।फिर भी पुजारी जी उसको अनसुना करके आगे निकल जाते है।
      वे लोग पुजारी जी के जीवन की शारीरिक और मानसिक पीड़ा को नोटिस नहीं करते हैं।  "जब किसी को रेलवे में भारी बोनस मिलता है या अन्य व्यवसायों में बहुत पैसा कमाता है, तो उनको कोई यह कहने नही जाता है कि इसबार तो काफी बोनस मिला है कुछ मुझे भी दे दो । 
फिर एक कर्मकांडी ब्राह्मण को ही क्यो कोई कहता हैं ?
 कभी कोई ये नही कहता कि पंडित जी पुजा आ गया हैं बच्चों के कपड़े खरीदने के लिए आप ये कुछ पैसे रख लो वैसे भी  पुजा  में काफी खर्च होता हैं।

       वे हमेशा कालीघाट, तिरुपति या जगन्नाथ मंदिरों के पुजारियों की आय की तुलना एक साधारण पुजारी से करते हुए उदाहरण देते हैं।  लेकिन अधिकांश पुजारी जानते हैं कि जीवन कितना कठिन है।  पुजारी सभी का भला चाहता है,  उपवास करके जोर जोर से मंत्रोच्चारण करते हैं और अपने लीवर एवम् हार्ट का समय से पहले 12 बजा देते हैं ।  मैंने यह भी देखा है कि घर पर मासिक आय डेढ़ लाख से अधिक है। लेकिन सत्यनारायण पूजा की दक्षिणा इक्यावन रुपये है।  इसे बढ़ाने के लिए यदि पुजारी बोल दे ।तो ,लोग एक परिचित शब्द  का उपयोग करते है कि "पुजारी लालची" है।  पुजारी को एक पैसे से भी संतुष्ट होना चाहिए।  हाँ, पुरोहित का तो ना पेट है, न पीठ, न रोग, न वस्त्र और जो खरीदने जायेगे वो भी फ्री में मिल जायेगा।  जब कोई नर्सिंग होम अतिरिक्त पैसे लेता है तो ये लोग कुछ नहीं कहते।  यदि  स्कूल  चंदा के नाम पर अधिक पैसे लेते हैं, तो भी आप चुप हैं।  वे लालच नहीं हैं ?

 हाँ, यह समाज है।  और यही न्याय है।
 और क्या आप जानते हैं कि शर्म कब आती है? 
अधिक दुख तब होता हैं जब कोई ब्राह्मण अधिकारी
 जब एक कर्मकांडी ब्राह्मण से कहता हैं आजकल तो बहुत लुट रहें हो लोगों को । 

 अब तो कुछ लोग कहते हैं इधर भी लूट रहे हो और राज्य सरकार के तरफ  से पुरोहित भत्ता भी मिल रहा हैं सब कहा रखते हो ?  

अब उन्हें कौन समझाये कि वह  एक हजार रुपए पाने के लिए नेता जी के पैरों में तेल मालीस करना होगा। फिर भाग्य अच्छा रहा तो कही बात बनेगी।

 इसलिए मेरे जैसे अधिकांश पुजारियों को अभी भी सरकार के तरफ से कोई  भत्ता नहीं मिलता है।  यह सब सुनकर मुझे वास्तव में एक पुजारी के रूप में असहनीय पीड़ा होती  है। 

 पता नही हमारा समाज कब बदलेगा।

शनिवार, 23 अक्टूबर 2021

भारत को आखिर बॉलीवुड ने दिया क्या है? 
1. बलात्कार गैंग रेप करने के तरीके।
2. विवाह किये बिना लड़का- लड़की का शारीरिक सम्बन्ध बनाना।
3. विवाह के दौरान लड़की को मंडप से भगाना
4. चोरी डकैती करने के तरीके।
5. भारतीय संस्कारों का उपहास उड़ाना।
6. लड़कियों को छोटे कपड़े पहने की सीख देना....जिसे फैशन का नाम देना।
7. दारू सिगरेट चरस गांजा कैसे पिया और लाया जाये।
8. गुंडागर्दी कर के हफ्ता वसूली करना।
9. भगवान का मजाक बनाना और अपमानित करना।
10. पूजा- पाठ ,यज्ञ करना पाखण्ड है व नमाज पढ़ना ईश्वर की सच्ची पूजा है।
11. भारतीयों को अंग्रेज बनाना।
12. भारतीय संस्कृति को मूर्खता पूर्ण बताना और पश्चिमी संस्कृति को श्रेष्ठ बताना।
13. माँ बाप को वृध्दाश्रम छोड़ के आना।
14. गाय पालन को मज़ाक बनाना और कुत्तों को उनसे श्रेष्ठ बताना और पालना सिखाना।
15. रोटी हरी सब्ज़ी खाना गलत बल्कि रेस्टोरेंट में पिज़्ज़ा बर्गर कोल्ड ड्रिंक और नॉन वेज खाना श्रेष्ठ है।
16. पंडितों को जोकर के रूप में दिखाना, चोटीरखना या यज्ञोपवीत पहनना मूर्खता है मगर बालों के अजीबो- गरीब स्टाइल (गजनी) रखना व क्रॉस पहनना श्रेष्ठ है उससे आप सभ्य लगते हैं।
17. शुद्ध हिन्दी या संस्कृत बोलना हास्य वाली बात है और उर्दू या अंग्रेजी बोलना सभ्य पढ़ा-लिखा और अमीरी वाली बात...
18. पुराने फिल्म्स मे कितने मधुर भजन हुआ करते थे, अब उसकी जगह अल्ला/मौला/इलाही जैसे गानो ने ली है, और हम हिंदू समाज भी हिXडो के जैसे उन गानो को लाखो की लाईक्स पकडा देते है, गुनगुनाते है; इससे ज्यादा और क्या विडंबना हो सकती है???

हमारे देश की युवा पीढ़ी बॉलीवुड को और उसके अभिनेता और अभिनेत्रियों का अपना आदर्श मानती है.....अगर यही बॉलीवुड देश की संस्कृति सभ्यता दिखाए ..तो सत्य मानिये हमारी युवा पीढ़ी अपने रास्ते से कभी नहीं भटकेगी...

ये पोस्ट उन हिन्दू छोकरों के लिए है जो फिल्म देखने के बाद गले में क्रॉस मुल्ले जैसी छोटी सी दाड़ी रख कर खुद को मॉडर्न समझते हैं हिन्दू नौंजवानों की रगो में धीमा जहर भरा जा रहा है। 

#फिल्म_जेहाद__
सलीम - जावेद की जोड़ी की लिखी हुई फिल्मों को देखें, तो उसमें आपको अक्सर बहुत ही चालाकी से हिन्दू धर्म का मजाक तथा मुस्लिम / ईसाई  को महान दिखाया जाता मिलेगा. इनकी लगभग हर फिल्म में एक महान मुस्लिम चरित्र अवश्य होता है और हिन्दू मंदिर का मजाक तथा संत के रूप में पाखंडी ठग देखने को मिलते हैं। 

फिल्म "शोले" में धर्मेन्द्र भगवान् शिव की आड़ लेकर हेमा मालिनी" को प्रेमजाल में फंसाना चाहता है, जो यह साबित करता है कि - मंदिर में लोग लडकियां छेड़ने जाते हैं. इसी फिल्म में ए. के. हंगल इतना पक्का नमाजी है कि - बेटे की लाश को छोड़कर, यह कहकर नमाज पढने चल देता है.कि- उसे और बेटे क्यों नहीं दिए कुर्बान होने के लिए.

"दीवार" का अमिताभ बच्चन नास्तिक है और वो भगवान् का प्रसाद तक नहीं खाना चाहता है, लेकिन 786 लिखे हुए बिल्ले को हमेशा अपनी जेब में रखता है। और वो बिल्ला भी बार बार अमिताभ बच्चन की जान बचाता है. 

"जंजीर" में भी अमिताभ नास्तिक है और जया भगवान से नाराज होकर गाना गाती है लेकिन शेरखान एक सच्चा इंसान है.

फिल्म 'शान" में अमिताभ बच्चन और शशिकपूर साधू के वेश में जनता को ठगते हैं, लेकिन इसी फिल्म में "अब्दुल" जैसा सच्चा इंसान है जो सच्चाई के लिए जान दे देता है. 

फिल्म"क्रान्ति" में माता का भजन करने वाला राजा (प्रदीप कुमार) गद्दार है और करीमखान (शत्रुघ्न सिन्हा) एक महान देशभक्त, जो देश के लिए अपनी जान दे देता है.

अमर-अकबर-अन्थोनी में तीनों बच्चों का बाप किशनलाल एक खूनी स्मगलर है, लेकिन उनके बच्चों अकबर और एन्थॉनी को पालने वाले मुस्लिम और ईसाई महान इंसान हैं. 

 फिल्म "हाथ की सफाई" में चोरी - ठगी को महिमामंडित करने वाली प्रार्थना भी आपको याद ही होगी.

कुल मिलाकर आपको इनकी फिल्म में हिन्दू नास्तिक मिलेगा या धर्म का उपहास करता हुआ कोई कारनामा दिखेगा और इसके साथ साथ आपको शेरखान पठान, DSP डिसूजा, अब्दुल, पादरी, माइकल, डेबिड, आदि जैसे आदर्श चरित्र देखने को मिलेंगे। 

हो सकता है आपने पहले कभी इस पर ध्यान न दिया हो लेकिन अबकी बार ज़रा ध्यान से देखना। केवल सलीम / जावेद की ही नहीं बल्कि कादर खान, कैफ़ी आजमी, महेश भट्ट, आदि की फिल्मो का भी यही हाल है। 

फिल्म इंडस्ट्री पर दाउद जैसों का नियंत्रण रहा है. इसमें अक्सर अपराधियों का महिमामंडन किया जाता है और पंडित को धूर्त, ठाकुर को जालिम, बनिए को सूदखोर, सरदार को मूर्ख कामेडियन, आदि ही दिखाया जाता है.

"फरहान अख्तर" की फिल्म …

करवाचौथ है, सभी माता बहिनों को इस पावन पर्व की बहुत बहुत अग्रिम शुभकामनाएं, हम आपको करवा चौथ की पौराणिक व्रत कथा बतायेंगे

करवाचौथ है, सभी माता बहिनों को इस पावन पर्व की बहुत बहुत अग्रिम शुभकामनाएं, हम आपको करवा चौथ की पौराणिक व्रत कथा बतायेंगे 
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सुहागिन महिलाएं क्यों देखती हैं छलनी से पति का चेहरा?

भारतीय महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं इसलिए यह व्रत और इसकी पूजा काफी सतर्कता के साथ की जाती है। सुहागिन महिलाएं चांद को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। इस पूजा में प्रयोग होनेवाली हर चीज का अपना एक अलग महत्व है। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह व्रत तब तक पूरा नहीं माना जाता है जब तक पत्नी छलनी से चांद और अपने पति का चेहरा ना देख लें।

आखिर क्या है कारण ?

सुहागन महिलाएं छलनी में पहले दीपक रखती हैं, फिर इसके बाद चांद को और फिर अपने पति को देखती हैं। इसके बाद पति अपनी पत्नी को पानी पिलाकर और मिठाई खिलाकर व्रत पूरा करवाते हैं। क्या कभी आपने सोचा है कि पहले चांद और फिर पति को छलनी से क्यों देखा जाता है। आइए जानते हैं कि छलनी के इस व्रत में क्या मायने हैं और इसके पीछे क्या कथा है…

पौराणिक कथाओं के अनुसार, वीरवती नाम की एक सुहागिन स्त्री थी। अपने भाईयों की वीरवती अकेली बहन होने के कारण उसके भाई बहुत प्रेम करते थे। करवा चौथ पर वीरवती ने निर्जल व्रत रखा और जिससे उसकी तबीयत खराब होने लगी। वीरवती की हालत उसके भाईयों से देखी नहीं जा रही थी। उनकी बहन की तबीयत खराब ना हो इसलिए उन्होंने एक योजना बनाई।

उन्होंने तुंरत एक पेड़ की ओट में छलनी के पीछे जलता दिया रख दिया और अपनी बहन से कह दिया कि चांद निकल आया है तुम अपने व्रत खोल लो और जल्दी खाना खा लो। बहन ने झूठा चांद देखकर अर्घ्य दे देती है और खाना खाने बैठ जाती है। खाने का पहला टुकड़ा मुंह में डालने पर उसको छींक आ जाती है, दूसरे पर बाल बीच में आ जाता है और तीसरा खाने का टुकड़ा जब मुंह में डालने की कोशिश करती है तो उसके पति की मृत्यु का समाचार घर आ जाता है।

उसकी भाभी सच्चाई से अवगत कराती हैं कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। वीरवती को जब पता चलता है तो फिर करवा चौथ का व्रत रखती है और सच्चे मन से अपनी गलती स्वीकार करती है और अपने पति की फिर जीवित होने की कामना करती है। इसके बाद वह छलनी से पहले चंद्रमा और उसके बाद अपने पति को देखती है। करवा चौथ माता उसकी यह मनोकामना पूरी करती हैं, इससे उसका पति फिर से वापस जीवित हो जाता है।

करवाचौथ की पौराणिक कथा.
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बहुत समय पहले की बात है, एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन करवा थी। सभी सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। यहां तक कि वे पहले उसे खाना खिलाते और बाद में स्वयं खाते थे। एक बार उनकी बहन ससुराल से मायके आई हुई थी..

शाम को भाई जब अपना व्यापार-व्यवसाय बंद कर घर आए तो देखा उनकी बहन बहुत व्याकुल थी। सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है। चूंकि चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है..

सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती और वह दूर पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। दूर से देखने पर वह ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चतुर्थी का चांद उदित हो रहा हो..

इसके बाद भाई अपनी बहन को बताता है कि चांद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चांद को देखती है, उसे अर्घ्‍य देकर खाना खाने बैठ जाती है..

वह पहला टुकड़ा मुंह में डालती है तो उसे छींक आ जाती है। दूसरा टुकड़ा डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुंह में डालने की कोशिश करती है तो उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिलता है। वह बौखला जाती है..

उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं और उन्होंने ऐसा किया है..

सच्चाई जानने के बाद करवा निश्चय करती है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी। वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रहती है। उसकी देखभाल करती है। उसके ऊपर उगने वाली सूईनुमा घास को वह एकत्रित करती जाती है। 

एक साल बाद फिर करवा चौथ का दिन आता है। उसकी सभी भाभियां करवा चौथ का व्रत रखती हैं। जब भाभियां उससे आशीर्वाद लेने आती हैं तो वह प्रत्येक भाभी से 'यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन बना दो' ऐसा आग्रह करती है, लेकिन हर बार भाभी उसे अगली भाभी से आग्रह करने का कह चली जाती है..

इस प्रकार जब छठे नंबर की भाभी आती है तो करवा उससे भी यही बात दोहराती है। यह भाभी उसे बताती है कि चूंकि सबसे छोटे भाई की वजह से उसका व्रत टूटा था अतः उसकी पत्नी में ही शक्ति है कि वह तुम्हारे पति को दोबारा जीवित कर सकती है, इसलिए जब वह आए तो तुम उसे पकड़ लेना और जब तक वह तुम्हारे पति को जिंदा न कर दे, उसे नहीं छोड़ना। ऐसा कह क र वह चली जाती है। 

सबसे अंत में छोटी भाभी आती है। करवा उनसे भी सुहागिन बनने का आग्रह करती है, लेकिन वह टालमटोली करने लगती है। इसे देख करवा उन्हें जोर से पकड़ लेती है और अपने सुहाग को जिंदा करने के लिए कहती है। भाभी उससे छुड़ाने के लिए नोचती है, खसोटती है, लेकिन करवा नहीं छोड़ती है..

अंत में उसकी तपस्या को देख भाभी पसीज जाती है और अपनी छोटी अंगुली को चीरकर उसमें से अमृत उसके पति के मुंह में डाल देती है। करवा का पति तुरंत श्रीगणेश-श्रीगणेश कहता हुआ उठ बैठता है। इस प्रकार प्रभु कृपा से उसकी छोटी भाभी के माध्यम से करवा को अपना सुहाग वापस मिल जाता है..

हे श्रीगणेश मां गौरी जिस प्रकार करवा को चिर सुहागन का वरदान आपसे मिला है, वैसा ही सब सुहागिनों को मिले.
🚩🚩🚩
पैकिंग आटा में कीड़े क्यों नही पड़ते ?

एक प्रयोग करके देखें। गेहूं का आटा पिसवा कर उसे 2 महीने स्टोर करने का प्रयास करें। आटे में कीड़े पड़ जाना स्वाभाविक हैं। आप आटा स्टोर नहीं कर पाएंगे!
*फिर ये बड़े-बड़े ब्रांड आटा कैसे स्टोर कर पा रहे हैं? यह सोचने वाली बात है!*

*एक केमिकल है - 'बेंजोयलपर ऑक्साइड' जिसे  'फ्लौर इम्प्रूवर ' भी कहा जाता है।*
इसकी पेरमिसीबल लिमिट 4 मिलीग्राम है, लेकिन आटा बनाने वाली फर्में 400 मिलीग्राम तक ठोक देती हैं।
कारण क्या है?
आटा खराब होने से लम्बे समय तक बचा रहे!
*बेशक़ उपभोक्ता की किडनी का बैंड बज जाए!*

 कोशिश कीजिये खुद सीधे गेहूं खरीदकर अपना आटा पिसवाकर खाएं।

नियमानुसार आटा टिकने का समय...
ठंड के दिनों में 30 दिन
गर्मी के दिनों में 20 दिन
बारिश के दिनों में 15दिन
का बताया गया है। 

ताजा आटा खाइये, स्वस्थ रहिये...
समझदार बनें,
अपने लिए पुरुषार्थी बन सभी गेंहू पिसवा कर काम ले। न कि कोई रेडीमेड थैली का!